31/03/2026
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एक ऐसी सुबह जिसकी कभी फिर रात नहीं हुयी!
जैसे ही अमृतसर से आने वाली ट्रेन से मैं ही था उतरा था,तो कांगड़ा घाटी की ओर जाने वाली ट्रेन की अनाउंसमेंट हो रही थी, और कहा जा रहा था कि थोड़ी ही देर में ट्रेन प्लेटफार्म से छूटने वाली है! तो भागते-भागते मै प्लेटफार्म नंबर एक पर गया क्योंकि मुझे हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के बैजनाथ क्षेत्र में जाना था! वहाँ बाजार में मेरे कई ग्राहक थे! जो होजरी,मनियारी आदि का सामान अक्सर मुझसे ही आर्डर करवाते थे! और मुझे शाम को ही आर्डर लेकर वापस भी अमृतसर के लिए लौटना था! बड़ी मुश्किल से टिकट मिला! तो दौड़ते हुए कांगड़ा घाटी रेलवे प्लेटफार्म पर पहुंचा! तो देखा ट्रेन चलने को बिल्कुल तैयार थी! गार्ड विसल दे रहा था और हरी झंडी दिखा रहा था! मैंने कई दरवाजो पर हाथ मारा, पर पहले से ही इस ट्रेन में बहुत ज्यादा रश था! कहीं भी जगह नहीं थी पायदान पर भी लोग लटके हुए थे! फिर क्या मेरे सामने वो ट्रेन निकल गयी व मेरी तरह कई और यात्री भी इस ट्रेन मे चढ़ने से चूक गये!
बाद मे पता चला कि यह ट्रेन कांगड़ा जाने वाली पहली ट्रेन है, इसलिए बड़ी ट्रेनो से रात भर जो भी यात्री आते हैं! वो इसी ट्रेन में चढ़कर हिमाचल की तरफ जाते हैं इसलिए ट्रेन में ज्यादा रश था! हालांकि मैं पहले जब भी जाता था तो अगले दिन वापसी करता था! बैजनाथ शिव मंदिर के पास होटल में रुकता था, और अगले दिन वापस आता था!
फिर क्या एक चाय बेचने वाला आया, उस से चाय ली और स्टेशन पर सीट पर बैठ गया कब 2 घंटे बीत गए, पता ही नहीं चला इतने में अगली ट्रेन भी, शैड यार्ड से बैक होकर, प्लेटफार्म पर लग गयी! जैसे ही ट्रेन लगी तो सभी यात्री उसमें चढ़ने की कोशिश करने लगे! पर उसके दरवाजे अंदर से लॉक थे! डिब्बो की खिड़कियां भी बंद थी फिर भी उसके अंदर लोग बैठे हुए थे!
जैसे कैसे करके मुझे उसमें जगह मिल गई और मै आराम से सिंगल विंडो सीट पर बैठ गया! देखते ही देखते! ट्रेन की फिर से अनाउंसमेंट हुई की ट्रेन अपने निर्धारित समय पर चलने वाली है! देखते ही देखते! गार्ड की सिटी की आवाज सुनकर, ड्राइवर द्वारा हॉर्न बजा कर ट्रेन को रवाना कर दिया गया! और देखते ही देखते पठानकोट स्टेशन कब पीछे छूट गया, पता भी नहीं चला! ट्रेन में यात्रियों की स्थिति देखकर ऐसा लग रहा था कि, की बहुत सारे यात्री किसी लंबे सफर से आ रहे हैं! धीरे-धीरे ट्रेन चलती रही बीच में स्टेशन आते रहे, सफर रोमांचित होता रहा! 2 घंटे का सफर पूरा हो चुका था अब ट्रेन जंवावाला शहर स्टेशन पर ख़डी थी! इस स्टेशन पर, ट्रेन काफ़ी देर तक रुकी रही, यहां जितने यात्री उतरे, उतने ही फिर से चढ़ गये!
ट्रेन के चालक जस्सा सिंह और सह-चालक मोहन सिंह दोनों ही स्टेशन पर उतरे हुए चाय पी रहे थे! सिग्नल मिलते ही एकाएक हॉर्न बजाया और ट्रेन अपने अगले पढ़ाव की ओर चल पड़ी!
खिड़की से बाहर झांकने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था! की ट्रेन की गति सामान्य से कहीं ज्यादा है! दोनों और पहाड़ियों थी लंबे-लंबे मोड प्रतीत हो रहे थे! और सभी डिब्बे डगमगा रहे थे! आगे नजर दौड़ा कर देखने पर लग रहा था, की कोई एक लंबा पुल आने वाला है! जिसको देखने के लिए कई यात्री खिड़कियों की तरफ आ गए थे! ताकि पुल के सौंदर्य को देख सके! मैं दूसरे डिब्बे में बैठकर इस सफर को तय कर रहा था! फिर अचानक से एक जोरदार आवाज़ होती है जैसे मानो हमारी ट्रेन के साथ कुछ बहुत बड़ी चीज टकरा गई हो,! और एक जोरदार धमाके के साथ चारों ओर चीख पुकार मच गई! किसी को समझ मै नहीं आ रहा था की अक्सर हुआ क्या है? मेरे माथे पर खून निकल रहा था! हाथ की हड्डी शायद टूट गयी थी! मेरे सामने एक बुजुर्ग बेसुध पड़े थे! जब मुझे पूर्ण रूप से होश आया तो पता चला की ट्रेन के 2 डिब्बे पटरी से निकल कर पलट गये है इंजन पुल के ऊपर खड़ा है! मेरी आंखों के सामने कई यात्री हता हत हो गये थे! कुछ डिब्बो के निचे भी दबे हुए थे! सामान इधर उधर बिखरा गया था! चारों तरफ गमगीन माहौल हो गया था! हर कोई अपनों को ढूंढ रहा था! थोड़ी ही देर बाद जब इस हादसे की जानकारी स्थानीय लोगो को पता चली तो उन्होंने काफी लोगों की मदद भी की !
इस पहाड़ी ट्रेन मे अधिकतर स्कूल कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी, हिंदू तीर्थयात्रियों और पर्यटक थे जो हिमाचल घूमने जा रहे थे और देवियों के दर्शन हेतु जा रहे थे! इस दुर्घटना में आधिकारिक तौर पर 27 लोगों की मृत्यु हुई थी और लगभग 80 लोग घायल हुए थे।
यह हादसा जवांवाला शहर और हरसर देहरी स्टेशनों के बीच,जवाली के एक बड़े पुल के समीप हुआ था! जैसे ही इस हादसे की खबर सरकार को लगी, तो मानो पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई हो! इस हादसे में कई लोगों ने अपनों को खोया है! उन सभी के लिए यह एक काला दिवस था! इस हादसे की मुख्य वजह ओवर स्पीड थी!दोनों ही ड्राइवर द्वारा ये एक बहुत बड़ी लापरवाही की गई थी!
थोड़ी ही देर बाद मुझे भी लोगों ने, अस्पताल ले जाने की बात कही, पर मैंने कहाँ मेरे परिचित है पठानकोट मे, मै वहाँ चला जाऊंगा! फिर मैं दर्द से कहराता हुआ एक बस द्वारा वापस पठानकोट पहुंचा! जहां मुझे 2 महीने का प्लास्टर चढ़ा! समाचार पत्रों द्वारा बाद में मुझे इस हादसे की विस्तृत जानकारी मिली! जिसे पढ़कर तथा सुनकर बहुत ही दुख हुआ!
कुछ खबरों में ऐसा भी लिखा गया था कि बहुत सारे लोगों ने घायल तथा मृतकों के साथ गलत व्यवहार भी किया, बहुत सारे लोगों के आभूषण चोरी हो गए, सामान चोरी हो गया था! ऐसे लोगों को भगवान कभी भी माफ नहीं करेगा!
कानूनी कार्रवाई: हादसे के बाद ट्रेन के चालक जस्सा सिंह और सह-चालक मोहन सिंह पर लापरवाही और तेज गति से ट्रेन चलाने के आरोप में मामला चलाया गया था। हालांकि, मई 2003 में कांगड़ा की एक अदालत ने उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा था।
स्थान: यह हादसा जवांवाला शहर और हरसर देहरी स्टेशनों के बीच, जवाली के समीप हुआ था।
भगवान सभी मृतको की आत्माओं को शांति प्रदान करें!
अगर इस हादसे में आपने भी किसी अपने को खोया है तो कमेंट में जरूर बताएं! अन्यथा पोस्ट को शेयर करें!
[इस पोस्ट मे दिखाई गयी तस्वीरे AI Tool से बनाई गयी है! जिसको वास्तविक ना समझा जाए ]
[एक घटना असल में 7 दिसंबर 1991 को घटी थी, समय लगभग 3.30 का था ]