उभरता उत्तराखंड

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27/08/2026

जब विपक्षी मुद्दा विहीन हो जाते तो वो कट पेस्ट की राजनीति तक सीमित हो जाते है।

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01/03/2026

🏔️ श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 🏔️

​🗓️ काउंटडाउन शुरू : अब बस 52 दिन शेष❗️

जय श्री केदारनाथ

बधाई हो बधाई। टोक्यो (जापान) में बिखरेंगे सौरव मैठाणी लोक संस्कृति के रंग     उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एक बार फि...
28/01/2026

बधाई हो बधाई।
टोक्यो (जापान) में बिखरेंगे सौरव मैठाणी लोक संस्कृति के रंग
उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एक बार फिर देश की सीमाओं को पार कर विश्वपटल पर अपनी पहचान बनाने जा रही है। आगामी 01 फरवरी 2026 को टोक्यो, जापान में प्रवासी उत्तराखंडियों द्वारा एक भव्य “उत्तराखंड मात्सुरी” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक सौरव मैठाणी अपनी सशक्त और भावनात्मक प्रस्तुति से लोकसंस्कृति के रंग बिखेरते नजर आएंगे।
यह कार्यक्रम न केवल प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर होगा, बल्कि जापान में पहली बार आयोजित होने जा रहा ऐसा उत्तराखंडी सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो अपनी विशिष्टता के कारण विशेष महत्व रखता है।
कार्यक्रम में उत्तराखंड की संस्कृति, सभ्यता, पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन, लोकगीत एवं लोकनृत्यों की जीवंत झलक देखने को मिलेगी। ढोल-दमाऊ की थाप, लोकगीतों की मिठास और पारंपरिक वेशभूषा में सौरव मैठाणी उत्तराखंड की आत्मा को टोक्यो की धरती पर प्रस्तुत करेंगे। इस ऐतिहासिक आयोजन के मुख्य आयोजक मनमलंग उत्तराखंड फिल्म्स, देसी वॉर्डरोब, मयंक डबराल, बिपिन सैमवाल, मनोज भारद्वाज एवं कुलदीप बिष्ट हैं, जिनके प्रयासों से यह कार्यक्रम साकार हो रहा है।
लोकगायक सौरव मैठाणी इससे पूर्व कनाडा, लंदन, दुबई, ओमान, सिंगापुर सहित कई देशों में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति का परचम लहरा चुके हैं। उनकी गायकी में पहाड़ का दर्द, खुशी, संघर्ष और संस्कृति की आत्मा स्पष्ट रूप से झलकती है, जो श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ देती है। यह आयोजन निश्चित रूप से प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनापन, स्मृतियाँ और पहाड़ से जुड़ाव लेकर आएगा, वहीं जापान में उत्तराखंड की संस्कृति की एक नई पहचान भी स्थापित करेगा। (सू.वि.)

26/01/2026

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर गुलाबराय मैदान रुद्रप्रयाग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनपद रुद्रप्रयाग निवासी लोक गायक स्व. श्री नवीन सेमवाल जी के सुपुत्र मा. मोहित सेमवाल द्वारा अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए सुन्दर सा गढ़वाली गाना गाया।

 #दुखद_घटना15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात, हवलदार रविन्द्र सिंह पुत्र श्री सतेंद्र सिंह राणा,( पूर्व ग्राम प्रधान, ग्राम आग...
19/01/2026

#दुखद_घटना
15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात, हवलदार रविन्द्र सिंह पुत्र श्री सतेंद्र सिंह राणा,( पूर्व ग्राम प्रधान, ग्राम आगर, दशज्यूला रुद्रप्रयाग) अरुणाचल प्रदेश में मातृभूमि की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त होने की दुःखद सूचना प्राप्त हुई है।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकसंतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
जय हिन्द। 🇮🇳

06/01/2026

उत्तराखंड के मा मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी ने कहा है की राज्य का मुख्य सेवक होने के नाते संबंधित प्रकरण में बहन अंकिता के माता-पिता से बात करूंगा और वे बेटी के न्याय के लिए जो भी चाहेंगे उसे कानून सम्मत आगे बढ़ाएँगे।

देवप्रयाग उत्तराखंड, भारत में एक महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थस्थल और पंच प्रयागों में से एक है, जहाँ अलकनंदा और भागीरथी नदिया...
01/01/2026

देवप्रयाग उत्तराखंड, भारत में एक महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थस्थल और पंच प्रयागों में से एक है, जहाँ अलकनंदा और भागीरथी नदियाँ मिलकर गंगा नदी के रूप में आगे बढ़ती हैं; यह स्थान भगवान राम से जुड़ा है और यहाँ रघुनाथ मंदिर, दशरथशिला जैसे स्थल हैं और इसे पवित्र और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर गंगा नदी के 'नामकरण' के लिए.

• नदियों का संगम: देवप्रयाग वह स्थान है जहाँ अलकनंदा और भागीरथी नदियाँ मिलती हैं, जिसके बाद संयुक्त धारा को गंगा कहा जाता है.
• धार्मिक महत्व: यह पंच प्रयागों (पांच पवित्र संगमों) में से एक है और इसे मोक्षदायिनी भूमि माना जाता है.
• भगवान राम से संबंध: माना जाता है कि ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने यहाँ तपस्या की थी.
• नामकरण: इस स्थान का नाम ऋषि देव शर्मा के नाम पर पड़ा, जिन्होंने यहाँ कठोर तपस्या की थी.
• आकर्षण: यहाँ रघुनाथ मंदिर, दशरथशिला और झूला पुल जैसी जगहें हैं.

रुद्रप्रयाग संगम में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियाँ मिलती हैं, जो पंचप्रयागों (पांच पवित्र संगमों) में से एक है और चारधाम या...
01/01/2026

रुद्रप्रयाग संगम में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियाँ मिलती हैं, जो पंचप्रयागों (पांच पवित्र संगमों) में से एक है और चारधाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ श्रद्धालु संगम स्नान करते हैं और भगवान शिव के रुद्र रूप की पूजा करते हैं, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव ने यहीं नारद मुनि को दर्शन दिए थे।

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