manju rauthan

manju rauthan Manju Rauthan

12/08/2026
29/10/2025

गोपाष्टमी

यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत् स्थावरजङ्गमम्। तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम्॥
गौ माता के चरण में बसता है सुख समृद्धि।
उनके प्रेम से जीवन में, मिलती सभी सिद्धि ।।
गोपाष्टमी के दिन गौ माता और बाल गोपाल की पूजा करने का विधान है। इस दिन भक्त गौशाला में गाय और बछड़े की पूजा करते हैं। गायों को स्नान कराते हैं, सजाते हैं और चारा खिलाते हैं। गौमाता की परिक्रमा की जाती है। इस दिन ग्वालों को दान देना और उन्हें नए वस्त्र भेंट करना शुभ माना जाता है। आमतौर पर ये पर्व किसानों के लिए एक महापर्व की तरह होता है। किसान अपनी गाय, बछड़े और बैलों की विशेष पूजा करते हैं उनका शृंगार करते हैं।
आज के दिन से भगवान बाल कृष्ण ने गायों को चराना शुरु किया था। वह धेनु चरौय्या बन गए।
यह माना जाता है कि बाल कृष्ण ने कार्तिक शुक्ल अष्टमी को पहली बार गौ-चारण लीला (गाय चराना) की थी। इससे पहले वे केवल बछड़े चराते थे। जब वे 6 वर्ष के हुए, तब माता यशोदा और नंद बाबा से गाय चराने की अनुमति मांगी। इसके बाद इस तिथि से भगवान ग्वाल-बालों के साथ गायों को चराने लगे। इसी कारण उन्हें गोविंद और गोपाल नाम से भी पुकारा जाने लगा। ये पर्व श्रीकृष्ण के गौ प्रेम को दर्शाता है।
गौ माता से जुड़ी मान्यताएं
सर्वपापविशुद्धानां, गोश्च विष्णोः पदांबुजे।
न त्यजेत् कादर्यं कार्यं, गोदानं विधिवधि यः॥
गायों के चरणों की रज माथे पर लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन गौशाला में चारा, अनाज, धन, वस्त्र आदि का दान करना चाहिए।
ऐसाभी कहा गया है कि गाय में तैंतीस करोड़ देवी- देवताओं का वास है। इसलिए गौ-पूजन करने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और सभी पापों का नाश होता है।
जहां गौ माता निवास करती हैं, वहां पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। गोपाष्टमी पर गौ सेवा करने से परिवार में सुख- शांति, स्वास्थ्य, लाभ और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। ये पर्व पशुओं के संरक्षण, दया और सेवा करने का संदेश देता है।
गोपाष्टमी का महत्व इसलिये भी है कि आज के दिन इंद्र का मान मर्दन ,भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल और ग्वालों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किया था, ताकि वे देवराज इंद्र द्वारा की जा रही भयंकर वर्षा से सभी को बच सकें। आठवें दिन यानी कार्तिक शुक्ल अष्टमी पर इंद्र का अहंकार टूटा और वह भगवान की शरण में आए। तब कामधेनु गाय ने भगवान कृष्ण का अभिषेक किया था और उन्हें गोविंद नाम दिया। हमारी संस्कृति की आधारभूता गौमाताओं की रक्षार्थ देवराज इंद्र जैसे शक्ति सम्पन्न व्यक्तित्व का विरोध कर गौमाता की रक्षा और सेवा का संदेश संपूर्ण जगत को दिया गया है। हम सबका प्रमुख कर्तव्य है, कि यथा सामर्थ्य गौ-वंश की सेवा करें।
आरती कुंज बिहारी की नटवर नागर गिरधारी की।।
************

26/10/2025

घरों की रसोई बन्द होने के दुष्परिणामों से बचिए , क्योंकि इस का परिणाम अमेरिका भुगत चुका है..... अवश्य पढ़ें
**********************
जब रसोई के चूल्हे खामोश हो जाएं!!
अमेरिका का सबक – भारत कब समझेगा?
जब रसोई शांत हो जाती है – टूटने लगती है गृहस्थी
क्या आपने कभी सोचा है,
क्या सिर्फ़ एक चुपचाप रसोई पूरे देश का भविष्य बदल सकती है?
अमेरिका में यही हुआ।
सन् 1970 के दशक तक ज़्यादातर घरों में दादा-दादी, माँ-बाप और बच्चे सब साथ रहते थे। शाम को सब एक ही डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाते। घर की रोटी, सूप, पाई सिर्फ़ पेट नहीं भरती थी, रिश्तों को भी मज़बूत करती थी।
लेकिन 1980 के बाद तस्वीर बदलने लगी।
फास्ट-फ़ूड, रेस्तरां और टेकअवे ने रसोई पर कब्ज़ा कर लिया।
माँ-बाप नौकरी में व्यस्त हो गए, बच्चे पिज़्ज़ा-बर्गर में उलझ गए, और दादा-दादी की आवाज़ दबने लगी।
कुछ विशेषज्ञों ने उसी समय चेताया था –
“अगर घर की रसोई कंपनियों को सौंप दी और बच्चों-बुज़ुर्गों की ज़िम्मेदारी सरकार पर डाल दी, तो परिवार बिखर जाएंगे।”
लोगों ने बात नहीं मानी और वही हुआ।
1971 में अमेरिका के 71% घर पारंपरिक परिवार थे – माँ-बाप और बच्चे साथ रहते थे।
आज यह संख्या घटकर सिर्फ़ 20% रह गई है।
बाकी क्या बचा?
बुज़ुर्ग – वृद्धाश्रमों में।
युवा – अकेले किराए के फ्लैट में।
शादियाँ – टूटती हुई।
बच्चे – अकेलेपन के शिकार।
तलाक की दर देखिए –
पहली शादी में 50%,
दूसरी में 67%,
तीसरी में 74%!
यह कोई संयोग नहीं, बल्कि चुप रसोई की क़ीमत है।
क्योंकि घर का बना खाना सिर्फ़ खाना नहीं होता।
उसमें माँ के हाथ का स्पर्श, दादा की बातें, दादी की कहानियाँ, और वह जादू होता है जो घर को परिवार बनाता है।
लेकिन आज खाना स्विगी-ज़ोमैटो से आता है और घर धीरे-धीरे मकान तो रह जाता है, परिवार नहीं।
इसका दूसरा डरावना रूप है बिगड़ती सेहत।
फास्ट-फ़ूड की लत ने अमेरिका को मोटापा, डायबिटीज़ और दिल की बीमारियों में धकेल दिया।
स्वास्थ्य उद्योग अब बीमार पीढ़ियों से ही मुनाफ़ा कमा रहा है।
लेकिन अभी देर नहीं हुई है।
रसोई को फिर से जलाना होगा।
जापानियों ने यह साबित किया है – वे अब भी साथ मिलकर पकाते और खाते हैं, इसलिए लंबी उम्र पाते हैं।
भूमध्यसागर के देशों में खाना पवित्र माना जाता है, इसलिए उनके रिश्ते मज़बूत रहते हैं।
अमेरिका की यह कहानी हमें चेतावनी देती है।
भारत में भी यही खतरा सामने है – बाहर का खाना, व्यस्त जीवन, और धीरे-धीरे बुझती रसोई।
तो कल आपकी रसोई चुप न हो जाए, इसके लिए आज ही चूल्हा जलाइए।
खाना पकाइए, परिवार को टेबल पर बुलाइए।
क्योंकि शयनकक्ष घर देता है, पर रसोई परिवार बनाती है।
निर्णय आपका है –
आप घर बनाना चाहते हैं या सराय🙏🙏🙏🙏🙏

Address

Dehradun
Dehra Dun
248001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when manju rauthan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category