जागो उत्तराखंड

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“जागो उत्तराखंड” एक मंच है जहाँ उत्तराखंड के विभिन्न मुद्दों को पूरी ईमानदारी के साथ उठाया जाता है और उत्तराखंड सरकार व प्रशासन से मुखर होकर सवाल भी किया जाता है। आप सभी साथ आकर हमारा हौंसला बने ताकि सरकार से सवालों का सिलसिला लगातार बना रहे।

26/05/2026

कांग्रेस सरकार के समय मशहूर हुआ गाना “महंगाई डायन खाये जात है” एक बार फिर से खूब चर्चाओं में है। बढ़ती महँगाई पर सरकार चाहे कितना कहे की वैश्विक युद्ध के कारण समस्या आ रही है लेकिन पेट्रोल/डीज़ल तो जब सस्ता था तभी भी सरकार ने महंगे दामों में बेचा है और तेल कम्पनियों ने लाखों करोड़ो का मुनाफा कमाया लेकिन अब कंपनियाँ अगर थोड़ा नुक़सान में हैं तो जनता भुगतेगी। जनता तो सस्ते समय में भी भुगत रही थी और आज भी भुगत रही है। बस नेता लोग मजे में जनता के टैक्स के मुफ्त का जीवन जी रहे हैं और अपने परिवारों को भी मुफ्तखोरी से मजे करा रहे हैं।।

Cockroach Janta Party Dehradun का गठन हो चुका है। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में आप लोग ज़्यादा से ज़्यादा इस पार्टी...
20/05/2026

Cockroach Janta Party Dehradun का गठन हो चुका है। भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में आप लोग ज़्यादा से ज़्यादा इस पार्टी से instagram पर जुड़े और इस भ्रष्ठ system के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करें।।

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी का आज निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्...
19/05/2026

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी का आज निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ होने के कारण देहरादून के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती थे।
भुवन चंद्र खंडूरी जी अपनी ईमानदारी, अनुशासन और प्रशासनिक दृढ़ता के लिए जाने जाते थे, जिन्होंने दो बार राज्य की कमान संभाली और केंद्रीय मंत्री भी रहे। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।
मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 'जीरो टालरेंस' और सख्त प्रशासन के लिए जाना गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी छवि इतनी मजबूत थी कि सरकारी मशीनरी तक में उनका नाम अनुशासन के प्रतीक के रूप में लिया जाता था। हालांकि उनकी सख्ती कई नेताओं और विधायकों को असहज भी करती रही।
भुवन चंद्र खंडूरी जी के निधन के साथ उत्तराखंड ने एक ऐसा जननेता खो दिया, जिसकी पहचान सत्ता से ज्यादा सिद्धांतों और अनुशासन से थी।
भगवान उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में संभलने की हिम्मत दे।

17/05/2026

आज समझ आया की 2014 में मोदी ने ये क्यों कहा था “हम तो फ़क़ीर आदमी हैं, झोला उठाकर चल पड़ेंगे।।”
मोदी को पता था की उनकी नीतियाँ एक दिन इस देश को संकट के हालातों में ला धकेलेंगी।
आज की धरती से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की अगर हालात नहीं सुधरे तो देश गरीबी की दलदल में फस सकता है।
सवाल ये है की अचानक से इतने बुरे हालात हुए कैसे? ज्या सरकार को इन परिस्थितिओं का पहले से पता नहीं था? बंगाल चुनाव जीतने के लिए अंधाधुन संसाधनों को खर्च करने समय ये ज्ञान कहाँ चला गया था? सरकार पहले से जानती थी की हालात बुरे होने वाले हैं लेकिन पूँजीपतियों की सरकार को आम जनमानस की कोई चिंता नहीं है। सरकार ये मान चुकी है की गरीब और मिडिल क्लास व्यक्ति को मुफ्त की थोड़ी रेवड़ियाँ दे दो और उन्हें ये यकीन दिला दो की यही उनका विकास है और हो भी वही रहा है।
लेकिन अब मुश्किल हालातों को देखते हुए हम सभी से ये अपील करते हैं की हर जरूरी संसाधनों की खपत को हम कम करें और देशहित में सरकार का साथ दें।

14/05/2026

खबर डोईवाला से। 😅😅विधायक जी डीज़ल ही तो बचाना है।।

एक ओर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पेट्रोल डीज़ल बचाने की अपील के चलते ज़्यादातर नेताओं ने अपने निजी व सरकारी वाहनों से दूरी बनायी है वहीं आज डोईवाला में एक हास्यास्पद नजारा देखने को मिला जहाँ हमारे डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला जी मीडिया को संबोधित करने के चक्कर में यह भी भूल गए की जिस बस में खड़े होकर वो मीडिया से बात कर रहे हैं वो बस स्टार्ट होकर खड़ी हुई है। लेकिन हमारे सुशील, सौम्य, सरल स्वभाव के विधायक बृजभूषण गैरोला जी को हम बताना चाहेंगे की डीज़ल बचाना है, इसीलिए आगे से बस आने से पहले ही मीडिया को संबोधित करने का प्रयास करें। इससे डीज़ल भी बचेगा और समय भी। वैसे विधायक जो भी संदेश दिया वो डीज़ल बस की आवाज़ के कारण ठीक से सुनाई नहीं दिया।।

02/05/2026

सतपुली के रहने वाले 20 वर्षीय पंकज ने आत्महत्या से पहले वीडियो जारी कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और सुसाइड नोट में लिखा कि “पुलिस में इंसानियत नहीं है, बिना सुने हाथ उठाया, घरवालों को भी अपशब्द सुनाए।”
मेरा सीधा सवाल Uttarakhand Police और Pushkar Singh Dhami जी से है कि ऐसा कौनसा अपराध किया था 20 वर्षीय पंकज ने जो उसको ने इतना बेदर्दी से पीटा और जो आरोप पंकज ने आत्महत्या करने से पहले SHO पर लगाये हैं क्या उस सनकी SHO और उसके साथियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होगा? इस लड़के की आत्महत्या नहीं बल्कि पुलिस द्वारा की गई हत्या है जिसका हिसाब उत्तराखंड पुलिस को देना होगा। उत्तराखंड में जंगल राज का सबसे बड़ा उदाहरण तो उत्तराखंड की मित्र पुलिस ने पेश किया है। उत्तराखंड पुलिस को जब केशव ने मूत्रपुलिस कहा तो हमे ग़लत लगा था लेकिन आज समझ आया की क्यों उसने ऐसा कहा था। आज जो हुआ इससे उत्तराखंड पुलिस का रावण रूप सामने आया है और ये कोई नई बात नहीं है। हमने अक्सर देखा है की पुलिस किस बेदर्दी से चेकिंग के नाम पर मारने लगती है, और भाषा तो गुंडों से भी गई गुज़री होती है। शायद यही कारण है की लोगों को जब भी पुलिस को कोसने का मौका मिलता है तो दिल खोल के कोसते हैं। पंकज को इंसाफ़ दिलाने की लड़ाई में अब उत्तराखंड की जनता पीछे नहीं हटेगी। डूब कर मर जाना चाहिए ऐसे प्रशासन को जिसके अंदर हैवान रूपी मानसिकता है।
***de

28/04/2026

वाह रे उत्तराखंड पुलिस, जनता को मूर्ख समझा हुआ क्या?
कल जिस रोमियो लेन बार में पुलिस ने देर रात छापा मारा और ये बात सामने आई की आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप(I.P.S.) की मौजूदगी के कारण पुलिस ने उस समय बार पर कोई कार्यवाही नहीं की। जैसे ही ये खबर अखबारों और इंटरनेट पर सुर्ख़ियों में आई, उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। सूत्रों ने यहाँ तक बताया कि आईजी गढ़वाल ने एसपी सिटी को फटकार लगाकर वहाँ से भेज दिया तब तो मानो उत्तराखंड की जनता में आक्रोश पैदा हो गया और सोशल मीडिया पर जम कर आईजी गढ़वाल को जनता ने आड़े हाथों लिया। मामले ने तूल पकड़ा तो आनन फ़ानन में इस प्रकरण पर उत्तराखंड पुलिस द्वारा जाँच शुरू की गई और बार पर कार्यवाही की बात करते हुए अंत में उत्तराखंड पुलिस ने कहा की आईजी गढ़वाल वहाँ डिनर के लिए गए थे और उनके द्वारा पुलिस कार्यवाही में किसी भी तरह का कोई भी दखल नहीं दिया गया। जैसे ही पुलिस की तरफ़ से ये सफ़ाई सामने आई तो लोगों ने कहा कि बार का cctv footage पब्लिक डोमेन में डाल दो, सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ।
अब सवाल ये है की क्या उत्तराखंड पुलिस इस मामले में लीपापोती कर रही है या अपने ही अधिकारी को बचाने के लिए झूठे बयानों का सहारा लिया जा रहा है?
पुलिस की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, कानून सिर्फ आम जनता के लिए है, अधिकारी, नेता, मंत्री जब चाहे जैसे चाहे कानून से खिलवाड़ कर सकते हैं।

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