22/01/2021
भरतु की ब्वारी और कड़कड़ाती ठंड-- जारी - नवल खाली--
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भरतु की ब्वारी के देहरादून राजावाला में ठंड के मारे बुरे हाल थे .....कभी रजाई के अंदर बैठती तो कभी हीटर के बहार बैठती !!!!
कुलमिलाकर इस ठंड में उसे उठ- पौड़ हो गयी थी ।।।
कभी बिस्तर में पड़ रही थी तो कभी चड़म खड़ी उठकर हीटर ताप रही थी ।।
उधर गाँव मे लगातार बर्फ गिर रही थी और भरतु की ब्वारी की बूढ़ी सास का रर्गऱर्याट भी जारी था ...बुढ़िया कभी दरवाजे पर आकर ,अकेले में कुछ बड़बड़ाती फिर चूल्हे पर जाकर उन बांज की लकड़ियों की झौ$ल बढाती ।।
फिर बुढ़िया ने अंदर से तवा उठाया और चौक में उल्टा करके रख दिया .... बोली- सर्ग दीदा यख मूसा जाणा बल प्राण .... अर बिराला तें होयूँ बल खेल ....!!!
चूल्हे से सटकर बैठे भरतु के पिता एकटक उस आग को देखते हुए ,अपने हुक्के का धुंवा भी उसी आग में छोड़ते हुए एकडगर हो गए थे ।।।
तभी आग भभड़ाने लगी तो भरतु की माँ बोली- जरूर मेरी बिनीता होली हम ते याद कन्नी ?
आज सुबेर बटी ये निर्भगी फोन मा सिग्नल भी नि ...!!!
भरतु के पिताजी ने बात काटते हुए कहा- जरूर हमारू भरतु होलु ??☺️...
भरतु आजकल जम्बू कश्मीर में आये दिन आतंकवादियों से जूझ रहा था !!
एकतरफ लोग इस स्नो फॉल का आनन्द उठा रहे थे तो दूसरी तरफ हमारी देश की सीमा पर भरतु 6 फिट हिमपात में स्टेनगन व 50 किलो असला लेकर, आतंकवादियों को ढेर करने की पोजिशन में लक्ष्य को भेदने के लिए मुस्तेद बैठा था ।।
फौजी अपनी लाइफ में रुपये तो कमाता है पर उसके जीवन का अमूल्य पल देश के लिए समर्पित होता है । अपने परिवार को वो समय नही दे पाता ।।
फौजी परिवारों को हमेशा ही अपने जवान बेटों व भाइयों की फिक्र लगी रहती है ।। जवानों के इस समर्पण के लिए देश का हर नागरिक उनका कर्जदार है ।।
अब अमूमन पहाड़ी लोगों को खुद नही लगती ,जो वर्षो पहले लगा करती थी ।। खुद लगने के बाद या तो बडुलि लगती थी या फिर आग भड़भड़ाती थी ।। पर बॉर्डर पर दुर्गम पोस्टों पर तैनात फौजी भाइयो और उनके परिवारों को आज भी वो खुद जरूर लगती है ।। उनके चूल्हों में वो आग आज भी भड़भड़ाती है और गले मे वो बडुलि भी जरूर लगती है ।।
इधर भरतु की ब्वारी को भी भरतु की बहुत खुद लग रही थी ... वो मोबाइल में उसकी ,अपनी व बच्चों की फोटो जोड़कर एलबम बना रही थी ।।
तब तक पड़ोसन मिसेज गुंसाइन आ गयी , बोली-- चल रे भुल्ली बारिश में दो चार सेल्फी मारते हैं यार.... ।। फिर दोनों ने बारिश में टेड़ा मेड़ा मुँह बनाने वाली सेल्फी खींची और अंदर आकर भट्ट भुजने लगी ।।
अब दोनों भट्ट बुकाते बुकाते गाँव के पुराने किस्सों में खो गए...कभी गाँव के चूल्हे की आग ...तो कभी भड्डू की तौर का साग... कभी स्कूली दिनों को याद करते हुए भरतु की ब्वारी कहने लगी - भई दीदी हमारे जमाने मे तो हयूं पड़े ,बरखा पड़े ...स्कूल तो जाना ही पड़ता था ।।
वो तो शुक्र है कि ... कभी कभार कोई टपक जाता था तब जाकर छुट्टी होती थी ... और फिर दोनों खितखित कर हंसने लगी ।।।
मिसिज गुसाईंन बोली-- भुल्ली आज तो जरा सा बादल भी आ रहे तो छुट्टी हो जा रही ।।। जमाना बदल गया भई ....
तब तक लाइट चली गयी ... दोनों ठंड में कबूतरी बन गई ..!!! लाइट वालों को गालियाँ देने लगी ...फिर मिसेज गुसाईंन बोली-- भुल्ली वो गैस का चूल्हा ही ले आ यहाँ पर.... उसी में सेंकते आग... मैं तो अपने घर मे खूब सेंकती हूँ.... अब दो चार रुपयों के लिए इस शरीर को क्यों तक्लीप देनी ।। चल सिलेंडर मैं उठाती हूँ तू चूल्हा ला ....!! ऐसा कहते हुए किचन से सिलेंडर उठाकर ले आयी... भरतु की ब्वारी को चूल्हा लाना पड़ा... फिर दोनों उसमें आग सेंकने लगी ।।
जब गैस की आग लाल होने लगी .....तो मिसेज गुंसाइन सड़म से खड़ी उठी और बोली -- चलती हूँ दीदी ... ये भी आ गए होंगे ।।।
जैसे ही वो दरवाजे से निकली .... गैस के चूल्हे से सुडूक सूडूक दो बार आवाज हुई और फिर दपप्प की ध्वनि आयी और गैस स्वक हो गयी.... भरतु की ब्वारी खौल गयी .... पहाड़ी में खौल गयी मतलब तो आपको पता ही होगा ......🤣🤣