04/07/2016
Botanical name -Cichorium intybus, (hindi name - कासनी) with blue flower.
Take this herbs and get rid from fatal deceases like KIDNEY FAILURE , BLOOD SUGAR, LEVER DISORDER, PILES.
किडनी, ब्लड शुगर, लीवर और बवासीर जैसी कई गंभीर बीमारियों से पीडित लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। आज आपको इन गंभीर बीमारियों में काम आने वाले चमत्कारी पौधा के बारे में बताने जा रहे है। इस मेडिसन पौधे की पत्तियों का सेवन मरीजों के लिए रामबाण का काम कर रही है। इस चमत्कारी पौधे का नाम कासनी है। आर्युवैदिक गुणों से भरपूर इस चमत्कारी पौधे की मांग न केवल हमारे देश में है, बल्कि विदेशों तक के डॉक्टर भी इन रोगों से ग्रसित मरीजों को कासनी के सेवन की सलाह दे रहे हैं।
वहीं, देश के कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टर्स भी इसका लोहा मान चुके हैं। आपको सिर्फ इतना करना है कि हर रोज इसकी कुछ पत्तियां तोडक़र चबानी होती हैं। आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर कासनी किडनी, ब्लड शुगर, लीवर सहित बवासीर जैसी घातक बीमारियों में बड़ा कारगर साबित हो रहा है, जिसके चलते पिछले दो साल में लगभग 25 हजार से अधिक कासनी के पौधों की डिमांड देश के हर हिस्सों से आई है। मात्र दस रुपए की कीमत वाले इस हर्बल पौधे की मांग अब देश के साथ-साथ विदेश तक में हो रही है।
इस पौधे की पत्तियां फेंफड़े के रोगियों के लिए अचूक दवा है। दरअसल कासनी की तीन प्रजाति है- पीला, नीला और सफेद रंग के फूल वाले लेकिन सबसे ज्यादा फायदेमंद नीले रंग के फूल वाले कासनी के पौधे हैं।
उत्तराखण्ड की जलवायु और हल्द्वानी के वन एवं अनुसंधान केन्द्र में हुई रिसर्च ने इस विलुप्त होते गुणीय पौधे को तो नई ऊंचाइयां दी हैं। साथ ही तमाम मरीजों को एक नई उम्मीद और आशा दी है।
वन अनुंसधान केन्द्र हल्द्वानी के कर्मठ वन अधिकारी मदन बिष्ट जी के कार्यालय में आज कल निरंतर बेकाबू भीड़ है। यह भीड़ एक पौधे के लिए है जिसका नाम है ’कासनी’। इसका वानस्पतिक नाम है Cichorium intybus ’यह किडनी की अच्छी दवा है। हजारों किडनी पीडि़त इस पौध की पत्ती चबाने से रोग मुक्त हो गये है। एक मरीज का क्यूरेटिन लेवल 10.8 था वह अब 4.8 हो गया है। उसी तरह से शुगर लेवल 500 था आज वह नार्मल इस संजीवनी से ठीक हो गया। कितने ही मरीजों के लिए यह मुक्ति दाता है। एम्स के डाक्टरों ने भी इसकी ताकत को मुहर लगायी है। मदन बिष्ट जन हित में हजारों पौंधे जनता को बाँट चुके हैं। ऐसे अधिकारी पर हमें नाज है। सलाम ऐसे असली आदमी होने के हकदार को।
ये पौधे आपको हल्द्वानी में ‘वन अनुसंधान केंद्र, हल्द्वानी’ से उपलब्ध हो सकते है