29/12/2022
जो अपनी संस्कृति, अपने लोग, अपनी विरासत और जो अपने पहाड़ के लिए नहीं बोल पाया, जो अपनी मिट्टी के लिए दो शब्द नहीं बोल पाया वह कभी उत्तराखंडी नहीं हो सकता संक्षेप में उत्तराखंड का अर्थ ही अपनी जमीन और अपने लोग और अपने धर्म अपने संस्कृति को बचाना है।
नमन करता हु में अपनी लोक संस्कृति और पौराणिक धरोहर को। अगर इस विधा को बचा न पाए तो आने वाली पीड़ी कभी नहीं देख और सुन पायेगी ये सब।
मात्र भूमि का ऋण है हम पर और उसको चुकाना है तो वंहा की संस्कृति हमें जिन्दा रखनी होगी। जिस भी प्रदेश व देश ने अपनी संस्कृति से मुँह मोड़ा है उसका विनास ही हुआ इतिहास गवाह है इसका।
सरकार कुछ नही करेगी, जब तक आप अपने क्षेत्रिय मुद्दों से हटकर धर्म और राज्यवाद से हटकर राष्ट्रवाद पर वोट करते रहेगें। पहले अपने घर को दुरूस्त कीजिये, राष्ट्र को बचाने के लिये हमारे हर दूसरे तीसरे घर से एक व्यक्ति सेना मे है, हम यहां रहकर पहाड़ भी नही बचायेगें क्या?
पहले कांग्रेस हमे यूज किया और भाजपा को गुमान है कि हमारा विकल्प नही है।
वक्त कम हैं जितना दम हैं लगा दो,
कुछ उत्तराखंड को मैं जगाता हूँ,
कुछ उत्तराखंड को तुम
आवो मिलकर उत्तराखंड की पहचान बना दो।
उत्तराखंड मांगे भू कानून और मूल निवास।
जय उत्तराखंड।