07/10/2026
धामी जी, मुख्यमंत्री का दौरा था या सवालों से बचने की कवायद? आपके उत्तरकाशी पहुँचने से पहले कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष श्री मनीष राणा की गिरफ्तारी की खबर बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर उनका अपराध क्या है? जनता की समस्याएँ उठाना, युवाओं के भविष्य की बात करना या सरकार से जवाब माँगना? सरकार स्पष्ट करे कि यह कार्रवाई किस आधार पर हुई। क्या मुख्यमंत्री के स्वागत में सिर्फ फूल स्वीकार किए जाएँगे और सवाल उठाने वालों के हिस्से पुलिस आएगी?
वाह धामी जी, जनसमस्याओं के समाधान का क्या अनोखा मॉडल है कि समस्या उठाने वाले को ही रास्ते से हटा दो! युवा रोजगार की बात करे तो उससे संवाद करने की जगह उसे रोक दो, छात्र अपने भविष्य पर सवाल करे तो उसकी आवाज दबा दो और विपक्ष जनता की पीड़ा सामने रखे तो उसे कार्यक्रम तक पहुँचने ही मत दो। क्या इसी व्यवस्था को भाजपा सुशासन कहती है? मुख्यमंत्री जी, रास्ते से सवाल पूछने वाले हटाने पर रास्ता साफ दिखाई दे सकता है, सरकार का दामन और उसका कामकाज अपने आप साफ नहीं हो जाता।
खुद को मजबूत नेतृत्व बताने वाली सरकार को जनता की आवाज उठाने वाले एक युवा से इतनी परेशानी क्यों है? मंच से ऊँची आवाज में भाषण देना आसान है, सामने खड़े नागरिक के सवाल का जवाब देना असली परीक्षा है। यदि मनीष राणा को जनसमस्याएँ उठाने से रोकने के लिए गिरफ्तार किया गया है, तो यह सरकार की ताकत नहीं, उसकी जवाबदेही से भागने की प्रवृत्ति का प्रमाण है। धामी जी, उपलब्धियाँ इतनी ही शानदार हैं तो सवालों का सामना कीजिए। अपनी सरकार के काम का हिसाब दीजिए। पुलिस की मौजूदगी आपके जवाबों की कमी पूरी नहीं कर सकती।
धामी जी, आप मोदी जी के असली चेले हैं।
राजनीतिक पाठशाला से सिर्फ प्रचार करना सीखा है, जनता को सुनना नहीं। लोकतंत्र अपनी प्रशंसा सुनने का विशेषाधिकार नहीं देता; आलोचना सुनने और जवाब देने की जिम्मेदारी भी देता है। जनता ने मुख्यमंत्री चुना है, ऐसा दरबार नहीं बनाया जहाँ जयकार करने वालों का स्वागत हो और सवाल करने वालों को बाहर रोक दिया जाए। सत्ता की कुर्सी पर बैठकर जनता की आवाज से असहज होना बताता है कि अहंकार कितना बढ़ गया है और संवाद की गुंजाइश कितनी घट गई है।
याद रखिए धामी जी, किसी को गिरफ्तार कर लेने से उसके उठाए सवाल गिरफ्तार नहीं हो जाते। बेरोजगारी पर सवाल उठाने वाले को रोक देने से रोजगार पैदा नहीं होता। छात्रों की आवाज दबाने से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं होता। महिलाओं की सुरक्षा की बात करने वालों को चुप कराने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। समस्याओं से मुँह मोड़ेंगे तो वे खत्म नहीं होंगी, वे और गंभीर होंगी, और जनता आपसे उनका हिसाब माँगेगी।
श्री मनीष राणा पर हुई कार्रवाई का स्पष्ट कारण सार्वजनिक किया जाए। उत्तराखंड की जनता किसी सरकार की प्रजा नहीं है कि आदेश सुनकर चुपचाप सिर झुका ले। यह अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानती है और मतपत्र के जरिए सत्ता का अहंकार तोड़ना भी। धामी जी, आज जिन सवालों से बचने के लिए रास्ते बंद किए जा रहे हैं, कल वही सवाल जनता आपके सामने लेकर खड़ी होगी और तब जवाब देना ही पड़ेगा!
और हाँ धामी जी! ये भी सुनते जाइए-
“जब जब धामी डरता है,
पुलिस को आगे करता है !!”