11/04/2026
#फेक_काउंटर_की_कहानी : वो साल 2009 था, ज़ब देहरादून मे पुलिस ने एक #निर्दोष को मौत के घाट उतार दिया था और पुलिस की रिपोर्ट को सबने सच मान लिया था |
आज हम बात करेंगे देहरादून मे हुए रणवीर सिंह हत्याकांड की जिसने खाकी को शर्मसार कर दिया था |
एक 23 साल का नौजवान युवक जो MBA का छात्र था वो गाजियाबाद से नौकरी की तलाश मे देहरादून इंटरव्यू देने आया था लेकिन #पुलिस चेकिंग के दौरान उसकी पुलिस से कहासुनी हो जाती है और फिर वहीं होता है जो पुलिस अक्सर करती दिखती है अपनी #पॉवर का इस्तेमाल |
#मीडिया रिपोर्ट के अनुसार -
पुलिस रणवीर को देहरादून की एक पुलिस चौकी ले आती है जहां उसे #थर्ड_डिग्री दी जाती है, उसे इतना मारा जाता है कि उसकी तबियत बिगड जाती है और उसकी तबियत बिगड़ता देख पुलिस के हाथ पाँव फूल जाते है और फिर पुलिस रचती है एक ऐसी #साजिश जिसने एक युवक के सपनो को रौद कर उसके परिवार की खुशियाँ छीन ली थी |
पुलिस रणवीर को रायपुर के जंगल मे ले जाती है जहां उसको एक के बाद एक करीब 20 गोलिया मारकर उसे मौत के घाट उतार देती है, और अगले दिन पुलिस मीडिया मे कहती है कि राष्ट्पति दौरा होने की वजह से पुलिस चेकिंग कर रही थी जहां उसने तीन बाइक सवार युवकों को रोका तो वो पुलिस पर हमला कर पुलिस की #रिवाल्वर छीन कर भाग गए जिसमे पीछा करने पर दोनों तरफ से फायरिंग हुई और पुलिस नें एक बदमाश को मुठभेड़ में मार गिराया है और अन्य दो फरार हो गए , पुलिस की ये कहानी मीडिया और आम लोगो नें तो सच मान ली थी लेकिन रणवीर सिंह के परिजनों नें इसे नहीं स्वीकारा क्योकि वो सच जानते थे उनको यकीन था कि उनका बेटा ऐसा नहीं कर सकता...
तो वो इसके लिए #सीबीआई जाँच की मांग पर उतारू हो गए...
अच्छा यहाँ पऱ एक पॉइंट वर्तमान हालातो को देखकर जोड़ रहा हूँ, वैसे उस समय भी पुलिस के कई तथाकथित #दलाल हुआ करते थे लेकिन वो दलाल आज के जैसे सक्षम नहीं थे और उस दौर मे सोशल मीडिया इतना प्रभावी नहीं था कि वो पुलिस की जाँच का समर्थन कर उस परिवार का #विरोध करते लेकिन.वर्तमान युग मे कुछ राज्यों मे पुलिस के दलालो नें अच्छा खासा पैसा जमा कर लिया है और सोशल मीडिया भी प्रभावी है जिस वजह से ज़ब पुलिस पर कोई आरोप लगते है तो वो अपनी दलाली की #कीमत चुकाने पुलिस के पक्ष मे सोशल मीडिया मे उतर जाते है जिससे आम व्यक्ति को न्याय मिल पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है |
खैर ये दलाल किस्म के लोग तो हमेशा हमारे बीच रहेंगे लेकिन अब हम वापस कहानी मे लौटते है तो रणवीर सिंह के परिजन धरने पर बैठे रहे और ज़ब ये विवाद रुकने का नाम नहीं लिया, मामला बढ़ा तो केंद्र मे बैठे नेताओं से मीडिया के लोगो नें सवाल जवाब करने शुरू कर दिए थे |
अच्छा हाँ उस समय केंद्र मे #कांग्रेस और प्रदेश मे #भाजपा की सरकार थी फिर कुछ समय बाद इसमें जाँच सीबीआई को दे दी गई और फिर हुआ वहीं जिसका यकीन रणवीर सिंह के परिवार वालों को था |
सीबीआई नें इसमें 18 पुलिस कर्मियों को दोषी मानते हुए दिल्ली कोर्ट मे चार्ज शीट दायर की |
अच्छा ये भारत का पहला ऐसा मामला था जिसमे इतनी बड़ी संख्या मे पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोर्ट मे #चार्जशीट फाइल हुई थी और इसमें कोर्ट नें कई लोगो को आजीवन #कारावास की सजा तक़ सुनाई थी |
इस आदेश से पीड़ित परिवार का बेटा तो नहीं लौट सका लेकिन परिवार को न्याय जरूर मिल गया था |
अच्छा इस कहानी का #अंत हमें बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देता है कि
👉उस दिन अगर सीबीआई की एंट्री नहीं हुई होती तो क्या वो पुलिस वाले कभी जेल जा पाते?
👉बिना #सीबीआई जाँच के क्या उस परिवार को कभी न्याय मिल पाता?
👉क्या पुलिस की जाँच हमेशा सच होती है?
👉क्या पुलिस के अधिकारी अपने कर्मियों को नहीं बचाते?
👉क्या पुलिस के लिए किसी को झूठे केस मे फ़साना मुश्किल काम है?
👉उस दिन उस चौकी मे क्या कोई ऐसा कर्मी नहीं था जो उस अपराध मे भले ही शामिल नहीं था लेकिन अपराध होता चुप चाप मजबूरन ही सही लेकिन देख रहा था ?
👉अगर कोई ऐसा था तो वो दोषी कर्मियों के खिलाफ मीडिया मे कुछ क्यों नहीं बोला?
👉क्या उसकी चुप्पी ये नहीं दर्शाती कि पुलिस कभी पुलिस के खिलाफ नहीं जाती?
अगर सीबीआई की एंट्री नहीं होती तो #रणवीर एक अपराधी बनकर रह जाता जो उन पुलिस वालों के लिए करना बाये हाथ का खेल था |
ऐसे तमाम सवाल थे जो उस समय भी उठे थे और आज भी लोगो के मन मे कभी कभी उठ ही जाते है जिसमे बाहुबली व्यक्ति तो कोर्ट का सहारा लेकर अपने लिए बड़ा #वकील खड़ा करके काफी हद तक अपने लिए न्याय ले ही लेता है लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग आज भी बिना धन के आभाव मे सही जाँच या न्याय से अछूता रह जाता है |
ये कहानी ये भी बताती है कि पुलिसकर्मी भले ही #संविधान की कसम खा ले, गीता की कसम खा ले या भारत माँ की कसम खा ले अगर किसी पुलिस कर्मी के अंदर #अपराधी प्रवृति / अधिक खाने की भूख जन्म ले चुकी है तो वो उस प्रवृत्ति को मौका देख एक ना एक दिन बाहर निकालने का प्रयास जरूर करता है जिसका खामियाजा गरीब/ मध्यम वर्ग को भुक्तना पड़ता है |
#मेरीकलम📝