Bardhuwan, Madhya Pradesh, India

Bardhuwan, Madhya Pradesh, India village and post

05/12/2025
15/11/2025

चन्द्रशेखर रावण की सभी सीटों पर जमानत जब्त अब अम्बेडकर भी नहीं बचा पाए, तुम लोगों को राजनीति में
बुआ भतीजा मुक्त बिहार🙏
#मनुवाद_जिन्दावाद
ीएन_राव

28/09/2025

जिसने समुंदर में तैराकी सीखी हो, वो तालाबो में डूबा नहीं करते

05/09/2025

30/08/2025
एक सन्देश अपने  बरधुवा गांव के नाम 🌾“गाँव सिर्फ एक जगह नहीं  होति – ये हमारी पहचान होती है, हमारा घर, हमारी विरासत।”आज ह...
18/08/2025

एक सन्देश अपने बरधुवा गांव के नाम 🌾

“गाँव सिर्फ एक जगह नहीं होति – ये हमारी पहचान होती है, हमारा घर, हमारी विरासत।”

आज हम सब महसूस कर रहे हैं कि हमारे गांव का माहौल पहले जैसा नहीं रह रहा। राजनीति के छोटी-छोटी बातों ने हमें एक दूसरे से दूर कर दिया है। दिलों में शंका, बातों में कड़वाहट, और चेहरों पर मुस्कान की जगह संकोच आ गया है।

लेकिन एक बात याद रखें - राजनीति बदलती रहती है, लेकिन रिश्ते हमेशा के लिए होते हैं।

हम सब एक ही मिट्टी से जुड़े हैं, एक ही गलियों में खेले हैं, एक ही छत के नीचे त्यौहार मनाये हैं। क्या ये सब इतना कमज़ोर था कि एक वोट, एक पार्टी, या कोई अफ़वाह से टूट जाए?

गांव तभी बनता है जब लोग एक दूसरे का हाथ थामें- ना कि तब जब वो एक दूसरे से मुंह मोड़ लें।''

🙏🏻

नीच राजनीति हमें यहाँ पर ले आई है जहाँ बकरीद पर ‘राम’ को काटने का संदेश दिया जा रहा है। राम कोई व्यक्ति मात्र नहीं, बल्क...
16/06/2024

नीच राजनीति हमें यहाँ पर ले आई है जहाँ बकरीद पर ‘राम’ को काटने का संदेश दिया जा रहा है।

राम कोई व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि एक प्रतीक हैं। राम हिन्दुओं की सामूहिकता हैं, राम अयोध्या का मंदिर हैं, राम हिन्दुओं का विश्वास हैं, राम हिन्दुओं की सहिष्णुता हैं।

आखिर किसी मुसलमान के हृदय में यह दुस्साहस भरता कौन है? घृणित राजनीति का परिणाम है कि अब मुसलमान छुपता नहीं, वीडियो बना कर ऐसे काम करने के पहले ही संदेश देता है कि ‘हम राम को काटेंगे, तुम कर क्या लोगे!’

हे राम दुबारा मत आना अब यहाँ लखन हनुमान नही।।सौ करोड़ इन मुर्दों में अब बची किसी में जान नहीं।।भाईचारे के चक्कर में,बहनों...
04/06/2024

हे राम दुबारा मत आना
अब यहाँ लखन हनुमान नही।।

सौ करोड़ इन मुर्दों में
अब बची किसी में जान नहीं।।

भाईचारे के चक्कर में,
बहनों कि इज्जत का भान नहीं।।

इतिहास थक गया रो-रोकर,
अब भगवा का अभिमान नहीं।।

याद इन्हें बस अकबर है,
उस राणा का बलिदान नही।।

हल्दीघाटी सुनसान हुई,
अब चेतक का तूफान नही।।

हिन्दू भी होने लगे दफन,
अब जलने को शमसान नहीं।।

विदेशी धरम ही सबकुछ है,
सनातन का सम्मान नही।।

हिन्दू बँट गया जातियों में,
अब होगा यूँ कल्याण नहीं।।

सुअरों और भेड़ियों की,
आबादी का अनुमान नहीं।।

खतरे में हैं सिंह सावक,
इसका उनको कुछ ध्यान नहीं।।

चहुँ ओर सनातन लज्जित है,
कुछ मिलता है परिणाम नहीं।।

वीर शिवा की कूटनीति,
और राणा का अभिमान नही।।

जो चुना दिया दीवारों में,
गुरु पुत्रों का सम्मान नही।।

हे राम दुबारा मत आना,
अब यहाँ लखन हनुमान नही।।

🪷🙏🏻🚩

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