रामभद्रपुर

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आय 14 सितम्बर कए मिथिलाक लोकपावनि चौरचन (चौठ चान) अछि। सामान्‍यत: एहि दिन भारत वर्ष मे चंद्रमा क दर्शन नहि कैल जाइत अछि।...
14/09/2026

आय 14 सितम्बर कए मिथिलाक लोकपावनि चौरचन (चौठ चान) अछि। सामान्‍यत: एहि दिन भारत वर्ष मे चंद्रमा क दर्शन नहि कैल जाइत अछि। कहल जाइत अछि जे एहि दिन चंद्रमाक दर्शन स अनेरे कलंक लगैत अछि। मुदा मिथिला मे चद्रमा देखबाक प्रचलन अछि। हाथ मे कोनो फल लेने लोक चान क बाट तकैत अछि आ ओकर दर्शनक बाद अन्‍न ग्रहण करैत अछि। एकर पाछु दू तीनटा लोक कथा अछि। कियो एहि दिन कए अहल्‍या स जोडैत अछि त किनको कहब अछि जे एहि दिन मिथिला नरेश कलंक स मुक्‍त भेल छथि। कारण जे हो मुदा मिथिला मे एहि दिन चान देखबाक परंपरा पुरान अछि। प्रस्‍तुत अछि एहि पावनि पर पवन कुमार मिश्रक इ आलेख।

समस्त विज्ञजन केँ विदित अछि जे समग्र विश्‍व मे भारत ज्ञान विज्ञान सँ महान तथा जगत्‌ गुरु कऽ उपाधि सँ मण्डित अछि । एतवे टा नहि भारत पूर्व काल मे “सोनाक चिड़िया” मानल जाइत छल एवं ब्रह्माण्डक परम शक्‍ति छल । भूलोकक कोन कथा अन्तरिक्ष लोक मे एतौका राजा शान्ति स्थापित करऽ लेल अपन भुज शक्‍तिक उपयोग करैत छलाह । एकर साक्ष्य अपन पौराणिक कथा ऐतिह्‌य प्रमाणक रुप मे स्थापित अछि ।

हमर पूर्वज जे आई ऋषि महर्षि नाम सँ जानल जायत छथि हुनक अनुसंधानपरक वेदान्त (उपनिषद्‍) एखनो अकाट्‍य अछि । हुनक कहब छनि काल (समय) एक अछि, अखण्ड अछि, व्यापक (सब ठाम व्याप्त) अछि । महाकवि कालिदास अभिज्ञान शकुन्तलाक मंगलाचरण मे “ये द्वे कालं विधतः” एहि वाक्य द्वारा ऋषि मत केँ स्थापित करैत छथि । जकर भाव अछि व्यवहारिक जगत्‌ मे समयक विभाग सूर्य आओर चन्द्रमा सँ होइछ ।

‘प्रश्नोपनिषद्‍’ मे ऋषिक मतानुसार परम सूक्ष्म तत्त्व “आत्मा” सूर्य छथि तथा सूक्ष्म गन्धादि स्थूल पृथ्वी आदि प्रकृति चन्द्र छथि । एहि दूनूक संयोग सँ जड़ चेतन केँ उत्पत्ति पालन आओर संहार होइछ ।

आत्यिमिक बौद्धिक उन्‍नति हेतु सूर्यक उपासना कैल जाइछ । जाहि सँ ज्ञान प्राप्त होइछ । ज्ञान छोट ओ पैघ नहि होइछ अपितु सब काल मे समान रहैछ एवं सतत ओ पूर्णताक बोध करवैछ । मुक्‍तिक साधन ज्ञान, आओर मुक्‍त पुरुष केँ साध्यो ज्ञाने अछि । सूर्य सदा सर्वदा एक समान रहैछ । ठीक एकरे विपरीत चन्द्र घटैत बढ़ैत रहैछ । ओ एक कलाक वृद्धि करैत शुक्ल पक्ष मे पूर्ण आओर एक-एक कलाक ह्रास करैत कृष्ण पक्ष मे विलीन भऽ जाय्त छाथि । सम्पत्सर रुप (समय) जे परमेश्‍वर जिनक प्रकृति रुप जे प्रतीक चन्द्र हुनक शुक्ल पक्ष रुप जे विभाग ओ प्राण कहवैछ प्राणक अर्थ भोक्‍ता । कृष्ण पक्ष भोग्य (क्षरण शील वस्तु) ।

विश्‍वक समस्त ज्योतिषी लोकनि जातकक जन्मपत्री मे सूर्य आओर चन्द्र केँ वलावल केँ अनुसार जातक केर आत्मबल तथा धनधान्य समृद्धिक विचार करैत छथिन्ह । वैज्ञानिक लोकनि अपना शोध मे पओलैन जे चन्द्रमाक पूर्णता आओर ह्रास्क प्रभाव विक्षिप्त (पागल) क विशिष्टता पर पड़ैछ । भारतीय दार्शनिक मनीषी “कोकं कस्त्वं कुत आयातः, का मे जनजी को तात:” अर्थात्‌ हम के छी, अहाँ के छी हमर माता के छथि तथा हमर पिता के छथि इत्यादि प्रश्नक उत्तर मे प्रत्यक्ष सूर्य के पिता (पुरुष) आओर चन्द्रमा के माता (स्त्री) क कल्पना कऽ अनवस्था दोष सं बचैत छथि ।

अपना देश मे खास कऽ हिन्दू समाज मे जे अवतारवादक कल्पना अछि ताहि मे सूर्य आओर चन्द्रक पूर्णावतार मे वर्णन व्यास्क पिता महर्षि पराशर अपन प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘वृद्ध पराशर’ मे करैत छथि । “रामोऽवतारः सूर्यस्य चन्द्रस्य यदुनायकः” सृ. क्र. २६ अर्थात्‌ सूर्य राम रुप मे आओर चन्द्र कृष्ण रुप मे अवतार ग्रहण केलन्हि ।

ई दुनू युग पुरुष भारतीय संस्कृति-सभ्यता, आचार-विचार तथा जीवन दर्शनक मेरुद्ण्ड छथि आदर्श छथि । पौराणिक ग्रन्थ तथा काव्य ग्रन्थ केँ मान्य नायक छथि । कवि, कोविद, आलोचक, सभ्य विद्धत्‌ समाजक आदर्श छथि । सामान्यजन हुनका चरित केँ अपना जीवन मे उतारि ऐहिक जीवन के सुखी कऽ परलोक केँ सुन्दर बनाबऽ लेल प्रयत्‍नशील होईत छथि ।

एहि संसार मे दू प्रकारक मनुष्य वास करै छथि । एकटा प्रवृत्ति मार्गी (प्रेय मार्गी)- गृहस्थ दोसर निवृत्ति मार्गी योगी, सन्यासी । प्रवृत्ति मार्गी-गृहस्थ काञ्चन काया कामिनी चन्द्रमुखी प्रिया धर्मपत्‍नी सँ घर मे स्वर्ग सुख सँ उत्तम सुखक अनुभव करै छथि । ओहि मे कतहु बाधा होइत छनि तँ नरको सँ बदतर दुःख केँ अनुभव करै छथि ।

कर्मवादक सिद्धान्तक अनुसार सुख-दुःख सुकर्मक फल अछि ई भारतीय कर्मवादक सिद्धान्त विश्‍वक विद्धान स्वीकार करैत छथि । तकरा सँ छुटकाराक उपाय पूर्वज ऋषि-मुनि सुकर्म (पूजा-पाठ) भक्‍ति आओर ज्ञान सँ सम्वलित भऽ कऽ तदनुसार आचरणक आदेश करैत छथिन्ह ।

हम जे काज नहि केलहुँ ओकरो लेल यदि समाज हमरा दोष दिए, प्रत्यक्ष वा परोक्ष मे हमर निन्दा करय एहि दोष “लोक लाक्षना” क निवारण हेतु भादो शुक्ल पक्षक चतुर्थी चन्द्र के आओर ओहि काल मे गणेशक पूजाक उपदेश अछि ।

हिन्दू समाज मे श्री कृष्ण पूर्णावतार परम ब्रह्म परमेश्‍वर मानल छथि । महर्षि पराशर हुनका चन्द्रसँ अवतीर्ण मानैत छथिन्ह । हुनके सँ सम्बन्धित स्कन्दपुराण मे चन्द्रोपाख्यान शीर्षक सँ कथा वर्णित अछि जे निम्नलिखित अछि ।

नन्दिकेश्‍वर सनत्कुमार सँ कहैत छथिन्ह हे सनत कुमार ! यदि अहाँ अपन शुभक कामना करैत छी तऽ एकाग्रचित सँ चन्द्रोपाख्यान सुनू । पुरुष होथि वा नारी ओ भाद्र शुक्ल चतुर्थीक चन्द्र पूजा करथि । ताहि सँ हुनका मिथ्या कलंक तथा सब प्रकार केँ विघ्नक नाश हेतैन्ह । सनत्कुमार पुछलिन्ह हे ऋषिवर ! ई व्रत कोना पृथ्वी पर आएल से कहु । नन्दकेश्‍वर बजलाह-ई व्रत सर्व प्रथम जगत केर नाथ श्री कृष्ण पृथ्वी पर कैलाह । सनत्कुमार केँ आश्‍चर्य भेलैन्ह षड गुण ऐश्‍वर्य सं सम्पन्‍न सोलहो कला सँ पूर, सृष्टिक कर्त्ता धर्त्ता, ओ केना लोकनिन्दाक पात्र भेलाह । नन्दीकेश्‍वर कहैत छथिन्ह-हे सनत्कुमार । बलराम आओर कृष्ण वसुदेव क पुत्र भऽ पृथ्वी पर वास केलाह । ओ जरासन्धक भय सँ द्वारिका गेलाह ओतऽ विश्‍वकर्मा द्वारा अपन स्त्रीक लेल सोलह हजार तथा यादव सब केँ लेल छप्पन करोड़ घर केँ निर्माण कऽ वास केलाह । ओहि द्वारिका मे उग्र नाम केर यादव केँ दूटा बेटा छलैन्ह सतजित आओर प्रसेन । सतजित समुद्र तट पर जा अनन्य भक्‍ति सँ सूर्यक घोर तपस्या कऽ हुनका प्रसन्‍न केलाह । प्रसन्‍न सूर्य प्रगट भऽ वरदान माँगूऽ कहलथिन्ह सतजित हुनका सँ स्यमन्तक मणिक याचना कयलन्हि । सूर्य मणि दैत कहलथिन्ह हे सतजित ! एकरा पवित्रता पूर्वक धारण करव, अन्यथा अनिष्ट होएत । सतजित ओ मणि लऽ नगर मे प्रवेश करैत विचारऽ लगलाह ई मणि देखि कृष्ण मांगि नहि लेथि । ओ ई मणि अपन भाई प्रसेन के देलथिन्ह । एक दिन प्रंसेन श्री कृष्ण के संग शिकार खेलऽ लेल जंगल गेलाह । जंगल मे ओ पछुआ गेलाह । सिंह हुनका मारि मणि लऽ क चलल तऽ ओकरा जाम्बवान्‌ भालू मारि देलथिन्ह । जाम्बवाओ लऽ अपना वील मे प्रवेश कऽ खेलऽ लेल अपना पुत्र केऽ देलथिन्ह ।

एम्हर कृष्ण अपना संगी साथीक संग द्वारिका ऐलाह । ओहि समूहक लोक सब प्रसेन केँ नहि देखि बाजय लगलाह जे ई पापी कृष्ण मणिक लोभ सँ प्रसेन केँ मारि देलाह । एहि मिथ्या कलंक सँ कृष्ण व्यथित भऽ चुप्पहि प्रसेनक खोज मे जंगल गेलाह । ओतऽ देखलाह प्रदेन मरल छथि । आगू गेलाह तऽ देखलाह एकटा सिंह मरल अछि आगू गेलाह उत्तर एकटा वील देखलाह । ओहि वील मे प्रवेश केलाह । ओ वील अन्धकारमय छलैक । ओकर दूरी १०० योजन यानि ४०० मील छल । कृष्ण अपना तेज सँ अन्धकार के नाश कऽ जखन अंतिम स्थान पर पहुँचलाह तऽ देखैत छथि खूब मजबूत नीक खूब सुन्दर भवन अछि । ओहि मे खूब सुन्दर पालना पर एकटा बच्चा के दायि झुला रहल छैक बच्चा क आँखिक सामने ओ मणि लटकल छैक दायि गवैत छैक-

सिंहः प्रसेन भयधीत, सिंहो जाम्बवता हतः ।

सुकुमारक ! मा रोदीहि, तब ह्‌येषः स्यमन्तकः ॥

अर्थात्‌ सिंह प्रसेन केँ मारलाह, सिंह जाम्बवान्‌ सँ मारल गेल, ओ बौआ ! जूनि कानू अहींक ई स्यमन्तक मणि अछि । तखनेहि एक अपूर्व सुन्दरी विधाताक अनुपम सृष्टि युवती ओतऽ ऐलीह । ओ कृष्ण केँ देखि काम-ज्वर सँ व्याकुल भऽ गेलीह । ओ बजलीह-हे कमल नेत्र ! ई मणि अहाँ लियऽ आओर तुरत भागि जाउ । जा धरि हमर पिता जाम्बवान्‌ सुतल छथि । श्री कृष्ण प्रसन्‍न भऽ शंख बजा देलथिन्ह । जाम्बवान्‌ उठैत्मात्र युद्ध कर लगलाह । हुनका दुनुक भयंकर बाहु युद्ध २१ दिन तक चलैत रहलन्हि । एम्हर द्वारिका वासी सात दिन धरि कृष्णक प्रतीक्षा कऽ हुनक प्रेतक्रिया सेहो देलथिन्ह । बाइसम दिन जाम्बवान्‌ ई निश्‍चित कऽ कि ई मानव नहि भऽ सकैत छथि । ई अवश्य परमेश्‍वर छथि । ओ युद्ध छोरि हुनक प्रार्थना केलथिन्ह अ अपन कन्या जाम्बवती के अर्पण कऽ देलथिन्ह । भगवान श्री कृश्न मणि लऽ कऽ जाम्ब्वतीक स्म्ग सभा भवन मे आइव जनताक समक्ष सत्जीत के सादर समर्पित कैलाह । सतजीत प्रसन्‍न भऽ अपन पुत्री सत्यभामा कृष्ण केँ सेवा लेल अर्पण कऽ देलथिन्ह ।

किछुए दिन मे दुरात्मा शतधन्बा नामक एकटा यादव सत्ताजित केँ मारि ओ मणि लऽ लेलक । सत्यभामा सँ ई समाचार सूनि कृष्ण बलराम केँ कहलथिन्ह-हे भ्राता श्री ! ई मणि हमर योग्य अछि । एकर शतधन्वान लेऽ लेलक । ओकरा पकरु । शतधन्वा ई सूनि ओ मणि अक्रूर कें दऽ देलथिन्ह आओर रथ पर चढ़ि दक्षिण दिशा मे भऽ गेलाह । कृष्ण-बलराम १०० योजन धरि ओकर पांछा मारलाह । ओकरा संग मे मणि नहि देखि बलराम कृष्ण केँ फटकारऽ लगलाह, “हे कपटी कृष्ण ! अहाँ लोभी छी ।” कृष्ण केँ लाखों शपथ खेलोपरान्त ओ शान्त नहि भेलाह तथा विदर्भ देश चलि गेलाह । कृष्ण धूरि केँ जहन द्वारिका एलाह तँ लोक सभ फेर कलंक देबऽ लगलैन्ह । ई कृष्ण मणिक लोभ सँ बलराम एहन शुद्ध भाय के फेज छल द्वारिका सँ बाहर कऽ देलाह । अहि मिथ्या कलंक सँ कृष्ण संतप्त रहऽ लगलाह । अहि बीच नारद (ओहि समयक पत्रकार) त्रिभुवन मे घुमैत कृष्ण सँ मिलक लेल ऐलथिन्ह । चिन्तातुर उदास कृष्ण केँ देखि पुछथिन्ह “हे देवेश ! किएक उदास छी ?” कृष्ण कहलथिन्ह, ” हे नारद ! हम वेरि वेरि मिथ्यापवाद सँ पीड़ित भऽ रहल छी ।” नारद कहलथिन्ह, “हे देवेश ! अहाँ निश्‍चिते भादो मासक शुक्ल चतुर्थीक चन्द्र देखने होएव तेँ अपने केँ बेरिबेरि मिथ्या कलंक लगैछ । श्री कृष्ण नारद सँ पूछलथिन्ह, “चन्द्र दर्शन सँ किएक ई दोष लगै छैक ।
नारद जी कहलथिन्ह, “जे अति प्राचीन काल मे चन्द्रमा गणेश जी सँ अभिशप्त भेलाह, अहाँक जे देखताह हुनको मिथ्या कलंक लगतैन्ह । कृष्ण पूछलथिन्ह, “हे मुनिवर ! गणेश जी किऐक चन्द्रमा केँ शाप देलथिन्ह ।” नारद जी कहलथिन्ह, “हे यदुनन्दन ! एक वेरि ब्रह्मा, विष्णु आओर महेश पत्नीक रुप मे अष्ट सिद्धि आओर नवनिधि के गनेश कें अर्पण कऽ प्रार्थना केयथिन्ह । गनेश प्रसन्न भऽ हुनका तीनू कें सृजन, पालन आओर संहार कार्य निर्विघ्न करु ई आशीर्वाद देलथिन्ह । ताहि काल मे सत्य लोक सँ चन्द्रमा धीरे-धीरे नीचाँ आबि अपन सौन्द्र्य मद सँ चूर भऽ गजवदन कें उपहाल केयथिन्ह । गणेश क्रुद्ध भऽ हुनका शाप देलथिन्ह, – “हे चन्द्र ! अहाँ अपन सुन्दरता सँ नितरा रहल छी । आई सँ जे अहाँ केँ देखताह, हुनका मिथ्या कलंक लगतैन्ह । चन्द्रमा कठोर शाप सँ मलीन भऽ जल मे प्रवेश कऽ गेलाह । देवता लोकनि मे हाहाकार भऽ गेल । ओ सब ब्रह्माक पास गेलथिन्ह । ब्रह्मा कहलथिन्ह अहाँ सब गणेशेक जा केँ विनति करु, उएह उपय वतौताह । सव देवता पूछलन्हि-गणेशक दर्शन कोना होयत । ब्रह्मा वजलाह चतुर्थी तिथि केँ गणेश जी के पूजा करु । सब देवता चन्द्रमा सँ कहलथिन्ह । चन्द्रमा चतुर्थीक गणेश पुजा केलाह । गणेश वाल रुप मे प्रकट भऽ दर्शन देलथिन्ह आओर कहलथिन्ह – चन्द्रमा हम प्रसन्‍न छी वरदान माँगू । चन्द्रमा प्रणाम करैत कहलथिन्ह हे सिद्धि विनायक हम शाप मुक्‍त होई, पाप मुक्‍त होई, सभ हमर दर्शन करैथ । गनेश थ बहलाघ हमर शाप व्यर्थ नहि जायत किन्तु शुक्ल पक्ष मे प्रथम उदित अहाँक दर्शन आओर नमन शुभकर रहत तथा भादोक शुक्ल पक्ष मे चतुर्थीक जे अहाँक दर्शन करताह हुनका लोक लान्छना लगतैह । किन्तु यदि ओ सिंहः प्रसेन भवधीत इत्यादि मन्त्र केँ पढ़ि दर्शन करताह तथा हमर पूजा करताह हुनका ओ दोष नहि लगतैन्ह । श्री कृष्ण नारद सँ प्रेरित भऽ एहिव्रतकेँ अनुष्ठान केलाह । तहन ओ लोक कलंक सँ मुक्‍त भेलाह ।

एहि चौठ तिथि आओर चौठ चन्द्र केँ जनमानस पर एहन प्रभाव पड़ल जे आइयो लोक चौठ तिथि केँ किछु नहि करऽ चाहैत छथि । कवि समाजो अपना काव्य मे चौठक चन्द्रमा नीक रुप मे वर्णन नहि करैत छथि । कवि शिरोमणि तुलसी मानसक सुन्दर काण्ड मे मन्दोदरी-रावण संवाद मे मन्दोदरीक मुख सँ अपन उदगार व्यक्‍त करैत छथि – “तजऊ चौथि के चन्द कि नाई” हे रावण । अहाँ सीता केँ चौठक चन्द्र जकाँ त्याग कऽ दियहु । नहि तो लोक निंदा करवैत अहाँक नाश कऽ देतीह ।

एतऽ ध्यान देवऽक बात इ अछि जे जाहि चन्द्र केँ हम सब आकाश मे घटैत बढ़ैत देखति छी ओ पुरुष रुप मे एक उत्तम दर्शन भाव लेने अछि । जे एहि लेखक विषय नहि अछि । हमर ऋषि मुनि आओर सभ्य समाजक ई ध्येय अछि, मानव जीवन सुखमय हो आओर हर्ष उल्लास मे हुनक जीवन व्यतीत होन्हि । एहि हेतु अनेक लोक पावनि अपनौलन्हि, जाहि मे आवाल वृद्ध प्रसन्‍न भवऽ केँ परिवार समाज राष्ट्र आओर विश्‍व एक आनन्द रुपी सूत्र मे पीरो अब फल जेकाँ रहथि ।

जय मिथिला जय जानकी जय रामभद्रपुर

13/09/2026

सूचना

श्री श्री 108 दुर्गा पूजनोत्सव रामभद्रपुर, शोभेपट्टी एवं शोभनाथपट्टी केर समस्त श्रद्धालु भक्तजन एवं ग्रामवासी सँ निवेदन पूर्वक आग्रह अछि जे अपन अश्विन मासमे आयोजित होमयवला दुर्गा पूजा वर्ष 2026 केर सफल आयोजनक संबंधमे एकटा आम बैठक आयोजित काईल दिनांक 14.09.2026 ( सोम दिन) कएल गेल अछि।

स्थान: दुर्गा मंदिर प्रांगण
समय: अपराह्न 03:30 बजे सँ

अतएव अहाँ सभ सँ विनम्र निवेदन अछि जे निर्धारित समय पर उपस्थित भऽ अपन बहुमूल्य सुझाव एवं सहयोग प्रदान करबाक कृपा करब।

निवेदक:
दुर्गा पूजा आयोजन समिति
रामभद्रपुर, शोभेपट्टी एवं शोभनाथपट्टी

fans

सार्वजनिक आमंत्रण एवं सूचनाश्री श्री 108 श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सवस्थान: महादेव मंदिर रामभद्रपुरसमस्त रामभद्रपुर, शो...
02/09/2026

सार्वजनिक आमंत्रण एवं सूचना

श्री श्री 108 श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
स्थान: महादेव मंदिर रामभद्रपुर

समस्त रामभद्रपुर, शोभेपट्टी , शोभनाथपट्टी ग्रामवासी, अभिभावक, छात्र-छात्राओं एवं श्रद्धालु भक्तों को सादर सूचित किया जाता है कि श्री श्री 108 श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन दिनांक 04, 05 एवं 06 सितम्बर को भव्य रूप से किया जा रहा है। आप सभी सपरिवार उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाएं।

कार्यक्रम की रूपरेखा
04 सितम्बर
संध्या 5 बजे:मूर्ति आगमन एवं स्वागत
रात्रि 11 बजे :-जन्मोत्सव पूजन, आरती एवं प्रसाद वितरण

05 सितम्बर:
दिन में नियमित पूजा एवं आरती
सायं 4:00 बजे: दही-हांडी / मटका फोड़ प्रतियोगिता (दो वर्ग: 16 वर्ष से नीचे एवं 16 वर्ष से ऊपर)
रात्रि में कीर्तन-भजन संध्या 8 बजे से

06 सितम्बर:
प्रातः विसर्जन पूजन एवं आरती
दोपहर 2:00 से 5:00 बजे: सांस्कृतिक प्रतियोगिता एवं प्रतिभा सम्मान समारोह
गीत प्रतियोगिता
नृत्य प्रतियोगिता
मिमिक्री प्रतियोगिता
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता (वर्ग 1 से 8)
मैट्रिक एवं इंटर में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण विद्यार्थियों का सम्मान
सायं 6:00 बजे: मूर्ति विसर्जन

पंजीकरण सूचना
सांस्कृतिक प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी तथा सम्मान हेतु प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण विद्यार्थी अपनी नाम प्रविष्टि एवं मार्कशीट दिनांक 05 सितम्बर सायं 6:00 बजे तक अनिवार्य रूप से जमा/व्हाट्सएप करें।

संपर्क: 8863964953, 7762975460

निवेदक: श्री श्री 108 श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव समिति, रामभद्रपुर, शोभेपट्टी एवं शोभनाथपट्टी

24/08/2026

सार्वजनिक रुद्राभिषेक
जय बाबा बुलनेश्वर नाथ महादेव, रामभद्रपुर

24/08/2026

सार्वजनिक महादेव पूजा 2026
रामभद्रपुर

24/08/2026

सार्वजनिक सवा लाख महादेव पूजनक आमंत्रण

॥ हर हर महादेव ॥

रामभद्रपुर, शोभेपट्टी, शोभनाथपट्टी संग समस्त ग्रामवासी आ श्रद्धालु भक्तजनसँ सादर निवेदन अछि जे गामक ब्रह्मस्थान परिसर में भक्तजन के कल्याणार्थ, सुख, शांति समृद्धि हेतु सार्वजनिक सवा लाख महादेव पूजनक पावन आयोजन होमए जा रहल अछि। भगवान भोलेनाथक असीम कृपासँ एहि दिव्य धार्मिक अनुष्ठानमे अहाँ अपन परिवार सहित उपस्थित भऽ पूजा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन आ प्रसाद ग्रहण कऽ पुण्यक भागी बनू। अहाँक सहभागिता एहि आयोजनक वास्तविक सफलता अछि।
तिथि: 24.08.2026, सोम दिन, समय: प्रातः काल स अपनेक आगमन धरि । आबि जुड़ू, शिवभक्ति केर संग ग्रामक एकता आ आस्थाक उत्सव मनाबू।

हर हर महादेव! जय बाबा भोलेनाथ! जय बाबा बुलनेश्वर नाथ महादेव!
रामभद्रपुर

सावन मासक पहिल सोमवार दर्शनजय बाबा बुलनेश्वर नाथ महादेव, रामभद्रपुर
03/08/2026

सावन मासक पहिल सोमवार दर्शन
जय बाबा बुलनेश्वर नाथ महादेव, रामभद्रपुर

12/05/2026

सर्वजन के सूचना संग आमंत्रण
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जय मां भगवती
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रामभद्रपुर, शोभेपट्टी, शोभनाथपट्टी ग्रामीण सहित सर्वजन के सूचनार्थ जे परसू दिनांक 14.05.2026, बृहस्पति दिन हरेक वर्षक भांति अहि वर्षक दुर्गा पूजा व उपलक्ष्यक संस्कृतिक कार्यक्रम 2026 के सफल आयोजनक वास्ते विचार, चर्चा परिचर्चा हेतु दुर्गा मंदिर पर मीटिंग केर आयोजन संध्या के 5 बजे स राखल गेल अछि। समस्त भक्तगण स सादर निवेदन जे निर्धारित समय पर आबि दुर्गा पूजा व उपलक्ष्यक संस्कृतिक कार्यक्रम 2026 केर सफल आयोजन में अपन सहभागिता दी।
🙏🏻🌺🪷🌸🙏🏻

दिनांक :- 14.05.2026
दिन :- बृहस्पति दिन
स्थान :- भगवती मंदिर प्रांगण, रामभद्रपुर

निवेदक दुर्गा पूजा समिति, रामभद्रपुर शोभेपट्टी, शोभनाथपट्टी

16/03/2026

धरातल पर सभक सहयोग स स्वस्थ आ स्वच्छ समाजक सपना होयत साकार।
fans
चंद्रशेखर झा
#कचड़ा_प्रबंधन

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रामभद्रपुर
Darbhanga
847101

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