HAMAR Darbhanga

HAMAR Darbhanga Darbhanga district occupies an area of 2,279 square kilometres (880 sq mi),[2] comparatively equivalent to Indonesia's Yapen Island.

09/12/2021

सिंगर राममोहन मिश्रा एवं सिंगर रोहित झा के शु मधुर स्वर में गाये🙏🙏

14/11/2021
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03/08/2020

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दरभंगा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार के दरभंगा और मधुबनी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रत्याशी और समस्तीपुर से...
25/04/2019

दरभंगा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार के दरभंगा और मधुबनी से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रत्याशी और समस्तीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एयर स्ट्राइक और आतंकवाद का भी जिक्र किया. अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने मैथिली में की. उन्होंने कहा कि ये लहर नए भारत की ललकार है. 21वीं सदी में जो बेटा-बेटी पहली बार दिल्ली की सरकार चुनने जा रहे हैं वो चुनाव का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्हें जाति, मत, पंथ और मजहब के पुराने चुनावी समीकरण समझ नहीं आती है. देश के युवा मतदाताओं को एनडीए गठबंधन पर भरोसा है.

पीएम ने कहा मजबूत देश के लिए मजबूत प्रधानमंत्री की आवश्यक्ता है. 8, 10 और 40 सीट लड़ने वाले भी प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं. प्रधानमंत्री ने सामने मौजूद भीड़ से पूछा कि पीएम की लाइन में जितने भी चेहरे हैं उनमें आतंकवाद को कौन खत्म कर सकता है? भीड़ ने मोदी का नाम लेना शुरू कर दिया. इसके बाद उन्होंने कहा कि आतंकवाद को खत्म मोदी नहीं, बल्कि आपका एक वोट कर सकता है. आतंकवाद को खत्म करने के लिए मजबूत प्रधानमंत्री जरूरी है.

25/04/2019

दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग ने इसरो द्वारा संचालित रिमोट सेंसिग व जीआइएस तकनीक पर आधारित आधुनिक पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। यह विभाग का एक अनोखा व अभिनव प्रयास है जिसमें विद्यार्थियों को इंटरनेट के माध्यम से आइआइआरएस (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिग) इसरो देहरादून के वैज्ञानिकों द्वारा सीधा प्रसारण कर शिक्षा दी जा रही है। कुलपति प्रो. एसके सिंह के मार्गदर्शन में 22 अप्रैल को 44वें इसरो आइआइआरएस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही लनामिविवि का भूगोल विभाग सूबे में आइआइआरएस आउटरीच डिस्टेंस लर्निंग की सुविधा देने वाला पहला विभाग बन चुका है। 26 अप्रैल तक चलने वाला कार्यक्रम भूस्खलन व भूकंप के क्षेत्रीकरण, मापन एवं भविष्य रूपरेखा पर केंद्रित है। कार्यक्रम में छात्रों को सुदूर संवेदन की तकनीक द्वारा भूस्खलन व भूकंप को मापने एवं भविष्य में संभावित घटनाक्रमों की शिक्षा दी जा रही है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनु राज शर्मा ने बताया कि रिमोट सेंसिग व जीआईएस एक अनोखी तकनीक है, जिसमें उपग्रह व रडार के माध्यम से सुदूर वस्तु के विषय में जानकारी एकत्रित की जा सकती है। इस तकनीक का प्रयोग बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, वन संसाधनों, जल प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए किया जाता है। दरभंगा जैसे शहर के लिए इस तकनीक का प्रयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, बढ़ती उष्णता व जल वनस्पति के अध्ययन के लिए किया जा सकता है। कुलपति प्रो. सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम मिथिलांचल के विद्यार्थियों के लिए एक अनोखा अवसर है, जिसमें वह वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों द्वारा भूस्खलन या भूकंप पर ज्ञान हासिल कर सकते हैं। विभाग के शिक्षक डॉ. गौरव सिक्का ने कहा कि लनामिविवि के पीजी भूगोल विभाग ने ई-लर्निंग के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने के नए आयाम खोले हैं। पांच दिनों तक चलने वाला यह कोर्स पूर्णत: निशुल्क है। कार्यक्रम में अभी 50 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है।

07/04/2019

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