25/04/2019
दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग ने इसरो द्वारा संचालित रिमोट सेंसिग व जीआइएस तकनीक पर आधारित आधुनिक पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। यह विभाग का एक अनोखा व अभिनव प्रयास है जिसमें विद्यार्थियों को इंटरनेट के माध्यम से आइआइआरएस (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिग) इसरो देहरादून के वैज्ञानिकों द्वारा सीधा प्रसारण कर शिक्षा दी जा रही है। कुलपति प्रो. एसके सिंह के मार्गदर्शन में 22 अप्रैल को 44वें इसरो आइआइआरएस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही लनामिविवि का भूगोल विभाग सूबे में आइआइआरएस आउटरीच डिस्टेंस लर्निंग की सुविधा देने वाला पहला विभाग बन चुका है। 26 अप्रैल तक चलने वाला कार्यक्रम भूस्खलन व भूकंप के क्षेत्रीकरण, मापन एवं भविष्य रूपरेखा पर केंद्रित है। कार्यक्रम में छात्रों को सुदूर संवेदन की तकनीक द्वारा भूस्खलन व भूकंप को मापने एवं भविष्य में संभावित घटनाक्रमों की शिक्षा दी जा रही है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनु राज शर्मा ने बताया कि रिमोट सेंसिग व जीआईएस एक अनोखी तकनीक है, जिसमें उपग्रह व रडार के माध्यम से सुदूर वस्तु के विषय में जानकारी एकत्रित की जा सकती है। इस तकनीक का प्रयोग बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, वन संसाधनों, जल प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए किया जाता है। दरभंगा जैसे शहर के लिए इस तकनीक का प्रयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, बढ़ती उष्णता व जल वनस्पति के अध्ययन के लिए किया जा सकता है। कुलपति प्रो. सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम मिथिलांचल के विद्यार्थियों के लिए एक अनोखा अवसर है, जिसमें वह वैश्विक स्तर के वैज्ञानिकों द्वारा भूस्खलन या भूकंप पर ज्ञान हासिल कर सकते हैं। विभाग के शिक्षक डॉ. गौरव सिक्का ने कहा कि लनामिविवि के पीजी भूगोल विभाग ने ई-लर्निंग के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने के नए आयाम खोले हैं। पांच दिनों तक चलने वाला यह कोर्स पूर्णत: निशुल्क है। कार्यक्रम में अभी 50 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है।