Tirhut Talaab Bachao Abhiyan

Tirhut Talaab Bachao Abhiyan The objective of this page is to build a people’s movement in order to restore and preserve the ponds of Tirhut region of Bihar.

23/03/2025
22/03/2025

िश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में तालाब बचाओ अभियान समिति के तत्वावधान में मारवाड़ी महाविद्यालय से गंगासागर पोखर होकर दोनार म्यूजियम दरभंगा स्टेशन होकर हराही पोखरा तक प्रभात फेरी निकाला गया।मारवाड़ी कॉलेज के एन एस एस इकाई के संयुक्त तत्वावधान मे निकाले गए रैली में प्रभात दास फाउंडेशन सहित शहर के कई गणमान्य नागरिक छात्र नौजवान कतारबद्ध होकर,सभी जल बचाओ जीवन बचाओ, कमला नदी वापस लाओ का नारा के संग हराही पोखरा के पश्चिम भिंडा पहुंचकर डॉ आर बी खेतान के अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना और योग से हुई। सभा को संबोधित करते हुए प्रो प्रेम मोहन मिश्र ने बताया कि भारत में विश्व के 16-17 आबादी रहती है जबकि इसके पास केवल 4%ही पानी का श्रोत है। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि 1950 में प्रति व्यक्ति भूजल 1950 लीटर था जो अब घटकर मात्र पच्चीस लीटर हो गया है जो जो चिंताजनक है। मुख्य अतिथि रवि के पटवा ने संबोधित करते हुए बताया कि शहर के तालाब को भरकर अतिक्रमण करना काफी चिंताजनक है। प्रशासन तालाब माफिया के विरुद्ध करवाई करें, अन्यथा जनता उग्र आंदोलन करेगी। पर्यावरणविद डॉ विद्यानाथ झा ने जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभियान में बड़े संख्या में छात्र नौजवान प्रबुद्ध नागरिक शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नदी एवं जल प्रबंधन के लिए ठोस नीति बनाने की जरूरत है।
अजीत कुमार मिश्र ने अभियान को व्यापक बनाकर जन आंदोलन बनाने की जरूरत पर बल देते हुए राजनीतिक मुद्दा बनाने पर जोर दिया।कथावाचिका भक्ति श्री ने अपने संबोधन में शास्त्र के अनुसार जल, के महत्व को विस्तार से बताते हुए बताई जल नहीं बची तो पृथ्वी नहीं बचेगी। आर के दत्ता ने अपने संबोधन में कहा कि जल संकट का निदान सरकार और समाज के लोगों को मिलकर करने की आवश्यकता है। सभा में तीन प्रस्ताव पारित किया गया। प्रमंडल स्तर पर सभी तरह के जलाशयों का सोशल ऑडिट कराया जाय, जल संकट और इसके समाधान को लेकर चुनावी घोषणा पत्र तैयार किया जाय, जिसे सभी राजनीतिक दलों को उनके अपने घोषणा पत्र में शामिल करने के लिए अनुरोध किया जाय तथा शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक के तालाब तथा जीवन दायिनी नदी कमला की दस धारा जिसे बाढ़ नियंत्रण के नाम पर बंद कर दिया गया है, उसे पुनः अपने पुराने स्वरूप में लाने के लिए जल जन जोरो अभियान के तहत किसान मजदूर पशुपालक जन सामान्य नागरिक को गोलबंद कर, कमला को पुनर्जीवित किया जाए। कार्यक्रम का संयोजन तथा सभा का संचालन अजीत कुमार मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन मो तासीम नवाब ने किया। इस कार्यक्रम में संघर्षशील छात्र नेता दिलीप कुमार जुझारू छात्र नेता अभिषेक कुमार झा जय शंकर प्रसाद गुप्ता विजय सक्सेना इंदिरा कुमारी एन एस एस मारवाड़ी कॉलेज के समन्वयक प्रो सुनीता कुमारी, प्रभात दास फाउंडेशन के मुकेश कुमार झा बिपिन ठाकुर बिकास शर्मा भूषण मिश्र जनार्दन मुखिया राम लोभीत चौधरी सुभाष कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र नौजवान प्रबुद्ध नागरिक सामाजिक संगठन के लोग एक कतारबद्ध होकर जल बचाओ जीवन बचाओ का नारा देकर हराही दिघी और गंगासागर के सौंदर्यीकरण के नाम पर लूट मच रहे सरकारी राशि के विरुद्ध तालाब बचाने के लिए भी संकल्पित हुए।

भवदीय
अजीत कुमार मिश्र

इस विडीओ को देखिए। दरभंगा अलल्ल पट्टी के पास एक तालाब होता था गामी तालाब। उसके लापता होने की कहानी है इस विडीओ में। अपनी...
13/09/2022

इस विडीओ को देखिए।
दरभंगा अलल्ल पट्टी के पास एक तालाब होता था गामी तालाब। उसके लापता होने की कहानी है इस विडीओ में।
अपनी ओर से अपने कार्यक्रमो की सूची में मैं एक और कार्यक्रम जोड़ने का प्रस्ताव देता हूँ। आप लोग गम्भीरता से विचार करें। जिन तालाबों जिनको देखते देखते लैंड- शार्क ने हड़प लिया, तमाम कोशिशों के बावजूद जिन्हें बचाया नही जा सका, उन्हें जब तक वापिस ना ले लिया जाय, तब तक उनकी स्मृति में हर वर्ष एक कार्यक्रम होना चाहिए, ताकि उनके लुप्त होने के घाव हम महसूस करते रहें और लूटेरा यह समझता रहे कि लोग अभी भूले नहीं हैं।

The residents of the mohalla around this pond in Darbhanga are struggling to protect it from encroachment.

13/09/2022

इस विडीओ को देखिए।
दरभंगा अलल्ल पट्टी के पास एक तालाब होता था गामी तालाब। उसके लापता होने की कहानी है इस विडीओ में।
https://www.youtube.com/watch?v=NjKwkhb_MmA&t=3s

अपनी ओर से अपने कार्यक्रमो की सूची में मैं एक और कार्यक्रम जोड़ने का प्रस्ताव देता हूँ। आप लोग गम्भीरता से विचार करें। जिन तालाबों जिनको देखते देखते लैंड- शार्क ने हड़प लिया, तमाम कोशिशों के बावजूद जिन्हें बचाया नही जा सका, उन्हें जब तक वापिस ना ले लिया जाय, तब तक उनकी स्मृति में हर वर्ष एक कार्यक्रम होना चाहिए, ताकि उनके लुप्त होने के घाव हम महसूस करते रहें और लूटेरा यह समझता रहे कि लोग अभी भूले नहीं हैं।

27/08/2022

अगर हम अपने तालाबों और नदियों को यों ही अतिक्रमित करते रहे तो एक दिन क्या होगा, देखिए
https://fb.watch/f9WYY6lq-I/

27/08/2022

[ इस पोस्ट को पढ़कर 'हम फ़िदा-ए-लखनऊ' वाले मित्र कुछ 'कम फ़िदा-ए-लखनऊ' हो सकते हैं - क्यों कि यह तब का क़िस्सा है, जब 'पहले आप-पहले आप' वाला लखनऊ नाम का शहर; दुनिया में आबाद नहीं हुआ था ।_कृक ]

रेगिस्तान की एक राह से दो स्त्रियाँ गुज़रती थीं । गर्मियों के दिन थे और लू चल रही थी । वे दूसरे गाँव से आ रही थीं और अपने गाँव को जा रही थीं । रास्ते में उनको एक पोखर दिखाई पड़ा । पोखर के तल में थोड़ा-सा पानी चिलक रहा था । इतना-भर पानी जिससे एक मनुष्य या एक जानवर की प्यास मिट सकती हो । पोखर के पास एक हिरण और हिरणी मरे पड़े थे । यह दृश्य देखकर एक स्त्री ने दूसरी स्त्री से पूछा -

खड्यो न दीखै पारधी, लग्यो न दीखै बाण ।
म्हैं तनैं पूंछूं हे सखी, किण बिध तजिया प्राण ।।१।।
( कोई शिकारी भी दिखाई नहीं पड़ रहा और कोई बाण भी नज़र नहीं आ रहा । हे सखी, मुझे बताओ कि इन्होंने अपने प्राण कैसे त्यागे ? )

दूसरी स्त्री जवाब देती है -

जळ थोड़ो अ(र) नेह घणो, लग्यो प्रीत रो बाण ।
तू पी तू पी केवतां, दोनूं तजिया प्राण ।।२।।
( पानी कम था और प्रेम अधिक । पहले तुम पियो-पहले तुम पियो कहते हुये दोनों ने अपने प्राण त्याग दिये ! )

#मादरी_ज़ुबान_4. राजस्थानी.

Krishna kalpit

16/08/2022

मित्रो,
‘तालाब पर तिरंगा’ कल हर्षोल्लास के साथ तिरहुत के 7 ज़िलों में मनाया गया। कार्यक्रम की जब परिकल्पना की जा रही थी, तब हम इसकी इतनी बड़ी सफलता का अनुमान नहीं कर पाए थे। लक्ष्य पाँच सौ तालाबों तक अपने संदेश पहुँचाने का था। लग रहा था कि 250 तक पहुँच पाएँगे। लेकिन कल दिन के अंत होते तक हम कोई 700 पंचायतों तक अपने संदेश पहुँचाने में सफल हो गए।
‘तालाब पर तिरंगा’ कार्यक्रम की जो असंख्य तस्वीरें और विडीओज़ आए हैं वे आह्लाद से भर देने वाले हैं। ख़ासकर कार्यक्रम में भाग लेने वाले कुछ बच्चों का और नव-विवाहित स्त्रियों का - जिन्होंने शायद पहली बार घर से बाहर कदम रखा था।
इस कार्यक्रम की सफलता के लिए सारे साथियों व सहयोगियों का ह्रदय से धन्यवाद। आप में से किसी एक के बिना यह काम संभव नहीं था।

किंतु इसके साथ ही हम सबके ऊपर एक बड़ी ज़िम्मेदारी आ गई है कि इन 7 ज़िलों में फैले इन 700 पंचायतों को आपस में कैसे जोड़ें? तालाब और जल संरक्षण के लिए काम कर रहे अपरिचितों को एक दूसरे से जोड़ना हमारे अभियान का मूख्य लक्ष्य है। इसके बारे में गहरा चिंतन करना होगा कि तालाबों को बचाने का संकल्प लेने वाले इन हज़ारों जल सेनानियों के साथ संवाद कैसे बनाएँ रखें। यह काम आसान नहीं है, परंतु इसे करना अनिवार्य है।

कार्यक्रम की सफलता के लिए हम सबको एक बार फिर से ढेरों-ढेर बधाई।किंतु सुझाव भी दें कि आगे कैसे बढ़ना है।
हमने सोचा है कि जब गर्मी थोड़ी कम हो जाय तो किसी बड़े तालाब के ऊपर एक जल-भोज (वनभोज की तर्ज़ पर) का आयोजन करें, और वहीं एक चिंतन शिविर भी आयोजित करें।

इस कार्यक्रम की तैयारी, इसकी सफलता, इसमें रह गई कमियाँ, इसकी चुनौतियाँ और इसमें आए खर्च के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट एक दो दिन में आप सारे लोगों से साझा किया जाएगा।

धन्यवाद।

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Talaab Bachao Abhiyan, Professor Colony, Near Kabristan, Digghi West
Darbhanga
846004

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