23/06/2025
_*तमाम आ़शिक़ाने सह़ाबा, अहले बैत, और ग़ुलामाने मुस्तफा ﷺ को 26 ज़ुल हिज्जा, यौमे शहादत, ख़लीफा-ए सानी, अमीरुल-मु-निनीन फातह़े रूमो-फारस, सय्यिदुना उ़मर बिन ख़त्ताब फारूक़े आज़म रदियल्लाहु अ़न्हु मुबारक हो।*_
_*वो जलीलुल-क़द्र सह़ाबी, जिनके बारे में ह़ुज़ूर नबी-ए करीम ﷺ ने फ़रमाया : अगर मेरे बाद कोई नबी होता तो वो उ़मर होता!*_
_*जिनके इस्लाम लाने पर मुसलमानों को ताक़त मिली, जिनकी ज़बान पर जो बात आती, क़ुरआन में वह़ी की सूरत नाज़िल होती, जिनके अ़द्ल (इन्साफ) से ज़मीन लरज़ती, जिनके ख़ौफ से शैतान भी रास्ता बदल लेता।*_
_*जिन्होंने 22 लाख मुरब्बा मील पर इस्लामी परचम लहराया — वो अज़ीमुल-मर्तबत, नूर-ए-अ़द्ल, सय्यिदुना उ़मर फारूक़ रदियल्लाहु तआ़ला अन्हु आज भी हमारे दिलों के हुक्मरान हैं।*_
_*यह दिन हमें याद दिलाता है कि : अ़द्लो-इन्साफ़ को ज़िंदगी का उसूल बनाएं*_
_*दीन पर ग़ैर मुतज़ल-ज़िल (अटल) इस्तिक़ामत इख़्तियार करें*_
_*सच्चाई, दयानत और अमानतदारी को शिआ़र बनाएं*_
_*बातिल के ख़िलाफ़ बेख़ौफ़ होकर आवाज़ बुलंद करें*_
_*सय्यिदुना उ़मर रदियल्लाहु अ़न्हु की बसीरत और हिकमत से रहनुमाई लें*_
_*सय्यिदुना फारूक़-ए-आज़म रदियल्लाहु अ़न्हु ने हमें सिखाया कि ह़क़ के लिए खड़े हो जाओ, चाहे पूरी दुनिया मुख़ालिफ़ करे। उनकी शहादत मस्जिद-ए-नबवी ﷺ में नमाज़ की हालत में हुई — यह शहादत भी उनकी अ़ज़मत की दलील है।*_
_*उ़र्स के इस मौक़े पर दुनियाभर के उ़लमा और ख़ुतबा से गुज़ारिश है कि सय्यिदुना उ़मर रदियल्लाहु अ़न्हु की ज़िन्दगी के इन्क़लाबी पहलू उम्मत को बयान करें, ताकि नौजवानों में जुरअत, तक़्वा और सच्चाई की रूह़ बेदार हो।*_
_*ऐ अल्लाह! हमें सय्यिदुना उ़मर फारूक़ रदियल्लाहु अ़न्हु की सीरत पर चलने वाला बना, उनके दुश्मनों से बेज़ार बना, और उनकी मोहब्बत में सच्चा बना दे। उनके सदक़े में हमें दीन पर इस्तिक़ामत, अमन, ह़लाल रिज़्क़ और दुश्मनों पर फ़तह अता फ़रमा।*_
*اللّٰهم اجعلنا من أحباب سيدنا عمر، واحشرنا في زمرته، وارضَ عنا برضاه، واجعلنا من الذابّين عن صحابة رسول الله ﷺ*
_*वो उ़मर जिसके आ'दा पे शैदा सक़र, उस ख़ुदा दोस्त हज़रत पे लाखों सलाम।*_
_*फारिक़े ह़क़ व बातिल इमामुल-हुदा, तेग़े मसलूले शिद्दत पे लाखों सलाम।*_
_*तरजुमाने नबी हमज़ुबाने नबी, जाने शाने अदालत पे लाखों सलाम।*_
_*— फ़क़ीर मुह़म्मद अ़सजद रज़ा ख़ान कादरी, ग़ुफिरा लहू 26 ज़ुल्हिज्जा अल-हराम 1446 हिजरी मरकज़े अहले सुन्नत, बरेली शरीफ़*_