05/12/2022
Speaking Tigers के रवि की याद आ रही है। यह किताब उनकी कल्पना है। संपादक सत्यानंद के साथ आए थे। मुझे तो यक़ीन ही नहीं हुआ कि मेरी किताब अंग्रेज़ी में कौन पढ़ेगा। हिन्दी में लिखी किताब पहले अंग्रेज़ी में आई। फिर हिन्दी में। अंग्रेज़ी की किताब
हज़ारों पाठकों के पास पहुँची। रवि सिंह जी आपका बहुत शुक्रिया। अनुराग और चित्रा का भी।