मौलाना बकरी ए हिन्द

मौलाना बकरी ए हिन्द हेल्लो दोस्तों,
मैं हूँ भारत के इकलौता मूर्तद मौलाना बकरी ए हिन्द उल मुसल्लम

26/02/2026

देख रहे हो #अब्दुल ?
पहले मैं सोचता था कि कोई किसी बच्ची (आयशा) से बलात्कार करने वाले 55 साल के बूढ़े (मुहम्मद) को अपना आइडियल कैसे मान सकता है?

कोई आदमी अपनी बहन, मामी, मौसी, चाची और सौतेली मां से शादी कैसे कर सकता है?
कोई आदमी किसी भी कुकर्म को जायज कैसे मान सकता है?

और फाइनल लोग इन मुसलमानों को सुवर क्यों कहते हैं?

और अभी हाल ही में इन भोपाली खातूनों के कारण यह बात पता चली कि
कोई भी महिला पहले नशेड़ी बनती है...

और फिर उसका बलात्कार होता है...

उसके बाद ही वह मुस्लिम औरत बनती है....

और यह जानकर अब तुम मुल्लों की हरकतों पर गुस्सा नहीं आता क्योंकि.....
असल में तुम्हारी हरकतों में तुम्हारा कोई कसूर नहीं है क्योंकि सारा कसूर तुम्हारी पैदाइश का ही है।
क्योंकि तुम्हारा आइडियल नमूना मुहम्मद भी अपने बाप अब्दुल्ला के मरने के 4 साल बाद पैदा हुआ था।

मुहम्मद रसूल या काफ़िर ?मुसलमान कहते हैं कि अल्लाह ने स्रष्टि से लेकर मुहम्मद के समय तक एक लाख से अधिक नबी और रसूल दुनिया...
23/02/2026

मुहम्मद रसूल या काफ़िर ?

मुसलमान कहते हैं कि अल्लाह ने स्रष्टि से लेकर मुहम्मद के समय तक एक लाख से अधिक नबी और रसूल दुनिया में भेजे हैं और कई रसूल ऐसे भी थे जिनको अल्लाह ने किताबें भी दी थी और मुहम्मद अल्लाह का आखिरी रसूल और कुरान अल्लाह की आखिरी किताब है। इसके बाद सिलसिला बंद हो गया इसका अर्थ है कि कुरआन अटल है ।
जो कुरान के आदेशों का उल्लंघन करेगा वह काफिर हो जाएगा और दोजख में जायेगा । हरेक के लिए कुरान का आदेश मानना जरूरी है, चाहे वह कोई भी हो । कुरआन के आदेश अल्लाह के आदेश हैं ।

लेकिन खुद को अल्लाह का आखिरी रसूल बताने वाले मुहम्मद ने अपने जीवन में कुरान में दिए गए अल्लाह के आदेशों का कई बार खुल्लमखुल्ला उल्लंघन किया था । इससे पहले किसी नबी या रसूल ने ऐसा करने की हिम्मत नहीं कि थी।

थोड़े से उदाहरण दिए जा रहे है, लोग फैसला करें कि मुहम्मद को काफिर क्यों नहीं माने ?

पहले कुरआन के आदेश दिए गए हैं, फिर उल्लंघन का हवाला हदीसों से दिया गया है सभी हदीसें प्रमाणिक हैं .

1 -रोजे की हालत में सेक्स किया
आदेश - "तुम्हारे लिए रोजे की रातों में अपनी स्त्रियों के पास जाना हराम है"
सूरा ए बकरा 2 :187

उल्लंघन -रसूल ने रोजे कि हालत में अपनी पत्नी उम्मे सलाम को चूमा और शारीरिक सम्बन्ध बनाया। उस समय उम्मे सलमा अपनी माहवारी से थी।
सहीह बुखारी -जिल्द 1 किताब 6 हदीस 319

"उम्मे सलमा ने कहा कि - रसूल रोजे से थे और मेरा महीना चल रहा था। रसूल ने मुझे एक ऊनी लिहाफ में लिटा लिया और फिर मेरे कपडे उतारवा दिए और अपने कपडे उतार दिए। फिर हमने मिल कर एक मिट्टी के बड़े से बर्तन Jambaa में नहाए और रसूल मुझे चूमते रहे।
सहीह बुखारी -जिल्द 3 किताब 31 हदीस 149

"आयशा ने कहा कि रसूल रोजे की हालत में भी अपनी औरतों आलिंगन में लेकर उनको चुमते थे .और वे रोजे हालत में मेरी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसते थे.
सुन्नन अबू दौउद -किताब 13 हदीस 2380

2 - शादी में मेहर नहीं दिया
आदेश -"और तुम अपनी औरतों को शादी के समय उनका मेहर हैसियत के मुताबिक़ दो"
सूरा अन निसा 4 :4

उल्लंघन -"रसूल ने साफिया बिन्त हुयेय्य नामकी औरत से शादी की ,जिसे खैबर के युद्ध में पकड़ा गया था ,रसूल पाहिले उसके साथ तीन दिनों तक सम्भोग किया था
सहीह बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 523

"अनस बिन मालिक ने कहा कि ,खैबर से लौटते समय रसूल ने रस्ते में ही साफिया को अपनी पत्नी घोषित कर दिया था और उसपर एक चादर डाल दी थी। फिर तीन दिनों तक उसके साथ सम्भोग किया
सहीह बुखारी -जिल्द 5 किताब 59 हदीस 524

"अनस बिन मालिक ने कहा कि खिबर से लौटते समय रसूल रास्ते में तीन दिन रुके ,और साफिया से मुसलमान बनाने को कहा। फिर लोगों से कहा कि आज से यह ईमान वालों की माँ (उम्मुल मोमिनीन )है। फिर रसूल के गुलाम बिलाल ने खजूर की चटाई बिछाई और रसूल ने साफिया पर चादर डाल कर उस से सबके सामने सम्भोग किया।
अबू दाउद-जिल्द 2 किताब 11 हदीस 2118

"अनस ने बिन मालिक ने कहा की ,जब रसूल साफिया के साथ सम्भोग की तैयारी कर रहे थे तो, उस्मान ने कहा कि साफिया कुंवारी नहीं है। उसकी शादी हो चुकी है रिवाज के अनुसार उसकी इद्दत पूरी नहीं हुई है लेकिन रसूल नहीं माने।
मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3326

3 - विधवा से शादी के समय इद्दत का नियम तोड़ा
आदेश - "और तलाक पायी गयी औरतें अपनी तीन माहवारी तक अपने को प्रतीक्षा में रखें"
सूरा बकरा -2 :228

आदेश - "विधवा औरतें अपने अप को तीन महीने और दस दिनों तक परत्त्क्षा में रखें ,फिर उसके बाद उनकी सामान्य नियमों के अनुसार शादी की जा सकती है .
सूरा -बकरा 2 :234

उल्लंघन - अनस बिन मालिक ने कहा कि जब रसूल ने साफिया के पति को क़त्ल करवा दिया तो, वह विधवा हो गयी थी। साफिया काफी सुन्दर थी और रसूल कि नजर उस पड़ी तो रसूल ने साफिया को पकड़ कर अपने साथ ऊंट पर बिठा लिया और जब खैबर से मदीना जाने लगे तो रास्ते मे ऊंट को रोका और लोगों से बोले यह मेरी पत्नी है"
बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 143

4 -अनुमति से अधिक औरतें रखीं
आदेश - "और इतनी औरतों के बाद अतिरिक्त औरतें रखना तुम्हारे लिए हराम है और यह जायज नहीं है कि तुम अपनी पत्नियों को बदल कर दूसरी औरतें ले आओ चाहे उनकी सुन्दरता तुम्हें कितनी भी भाये "सूरा -अहजाब 33 :52

उल्लंघन -इतिहास से सिद्ध है कि कुरान के इस आदेश पर लात मार कर मुहम्मद ने 43 औरतें रखी थीं।

5 -अपने दोस्त की सजा माफ़ कर दी
आदेश -व्यभिचार करने वाले पुरुष और स्त्री दोनों में से हरेक को सौ कोड़े मारो और अल्लाह के कानून के मामले में किसी को उन पर तरस नहीं आना चाहिए।
सूरा -अन नूर 24 :2

उल्लंघन - अनस बिन मालिक ने कहा की मैं रसूल के पास बैठा था तभी लोग एक आदमी को रसूल के सामने लाये उस पर व्यभिचार का आरोप था रसूल उसको जानते थे, वह रसूल के साथ नमाज पढ़ता था उसने रसूल से पूछा की आप मुझे क्या सजा देंगे तो रसूल ने उस से कहा जाओ मैंने तेरा अपराध माफ़ कर दिया
सहीह बुखारी -जिल्द 8 किताब 82 हदीस 812

6 - औरतों पर बुरी नजर रखी
आदेश -हे ईमान वालो अपनी निगाहें नीची रखो और पवित्रता की रक्षा करो और पवित्र बातें करो।
सूरा -नूर 24 :30

उल्लंघन -मुहम्मद अपनी चचेरी बहिन उम्मे हानी बिन अबू तालिब पर बुरी नजर रखता था। उम्मे हानी की शादी हिबैरा नामके व्यक्ति से हो चुकी थी। जब हिबैरा बाहर होता था तो मुहम्मद उम्मे हानी के साथ सोता था जब यह बात लोगों को पता चली तो हिबैरा पत्नी के साथ नजरान चला गया। इस घटना से नाराज होकर कई लोगों ने इस्लाम छोड़ दिया था।
तिबरी -जिल्द 8 हदीस 186

ठरकी अल्लाह और हवसी रसगुल्ला सिर्फ दो ही जगह की जमानत कबूलता है एक दोनों टांगों के बीच वाली जगह (शर्मगाह) की, और दूसरी द...
17/02/2026

ठरकी अल्लाह और हवसी रसगुल्ला सिर्फ दो ही जगह की जमानत कबूलता है एक दोनों टांगों के बीच वाली जगह (शर्मगाह) की, और दूसरी दोनों जबड़ों के बीच वाली जुबान की।

16/02/2026

एक ही बाप की दो औलाद
एक #मुस्लिम दूसरा #ईसाई

16/02/2026

UGC और बाकी सारी लाग लपेट का खेल मैं बताता हूँ।
राजनीति में रणनीति होती है अपने पत्ते सेट करने की। जिसमें लोग विवश होते हैं और अंत में जनता वही सच समझती है जो उन्हें दिखाया जाता है।

आजकल भाजपा जो भी कर रही है वो सब की जगह किसी और के लिए फीिल्डिंग सेट की जा रही है।
हिन्दू एकता, बटोगे तो कटोगे, एक हैं तो सेफ़ है जैसे नारे लगाने वाले ऐसे निर्णय कैसे ले सकते है?
और यदि सोच समझ कर निर्णय लिया है तो पप्पू गांधी को ही इनसे समझदार समझो।
अब कहोगे कि इन निर्णयों से होगा क्या?
तो सुनो.....
इनके ऐसे निर्णयों से असंतुष्ट हिन्दू इधर उधर वोट डालेगा जिससे स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा।
भाजपा कमजोर होगी तो मिलीजुली सरकार बनानी होगी। और मिलीजुली सरकार में "समर्थन की हाँ" की कीमत होती है जिसे खरीदा जाता है। अंत में खेल यह होगा कि इस खरीद बेच के खेल में पैसे का मोह न रखने वाला संन्यासी हार जाएगा और अवसरवादी जीत जाएंगे।

राजनीति का खेल है, रोता है क्या।
आगे आगे देखो, होता है क्या?

इसी बात पर अर्ज किया है..कोयल कभी न बनाती अपना घोंसला।अल्लाह, मुहम्मद और इस्लाम की माँ का bhoxda.क्योंकि कोयल की तरह ही ...
11/02/2026

इसी बात पर अर्ज किया है..

कोयल कभी न बनाती अपना घोंसला।
अल्लाह, मुहम्मद और इस्लाम की माँ का bhoxda.

क्योंकि कोयल की तरह ही मुसलमान दूसरों के घर, संपत्ति और औरतों की इच्छा रखते हैं।

09/02/2026
16/01/2026

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