युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश

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युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश अबुआ देशोंन अबुआ राज

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युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश ____  भाइयों बहनों! युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश सामाजिक विचारधारा पर आधारित ऐसा समूह...
18/01/2023

युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश

____ भाइयों बहनों! युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश सामाजिक विचारधारा पर आधारित ऐसा समूह है जिसका उदय 22 दिसम्बर 2019 दिन रविवार को एक छोटे से गाँव रामुढाना ब्लाक सौसर जिला छिंदवाड़ा में हुआ।
साथियों! कहते हैं जब दो या दो से अधिक लोगों के विचार एक साथ मिल जाते हैं तो वहां एक विचारधारा बन जाती है। युवा शक्ति कुरकू सेना का उदय भी विचारधारा से ही हुआ है। वह विचारधारा जो समाज को संगठित कर संघर्ष की प्रेरणा देती है, जीवन जीने की नई कला दिखाती हैं।
हम एक दूसरे को अपनी भाषा में "कुरकू" बोलते हैं। कोई दूसरे समुदाय का भी है तो भी हम "कुरकू" शब्द से संबोधित करते हैं। जैसे- "ननकू अबुआ कुरकू होय " ये हमारे कोरकू है। "हनकू अबुआ कुरकू बा होय"। वह हमारे कोरकू नहीं है।
हम मानव जाति के इतिहास में जन्मे पहली पीढ़ी हैं तो हमारी परंपरा भी सही और सबसे पुरानी है। बीच बीच में हमारे लोगों ने गैरो के बहकावे में आकर अपनी परंपरा का सत्यानाश कर दिया।
हमारे क्षेत्र विशेष में जबतक हमारा अपना शासन चलता रहा, सब कुछ अच्छा चलता रहा। परिवर्तन समय की मांग है। धीरे धीरे वक्त बदलता गया। हमारे साम्राज्य में घुसपैठिये आते गये। बाहरी दुनिया से हमें क्या लेना। हम तो ठहरे भगवान भोलेनाथ के भक्त, भोले-भाले सीधे-साधे। हमें इतना भी सीधा नहीं बनना चाहिए क्योंकि जंगल में जो लकड़ी सीधी होती है उसे पहले ही काट दिया जाता है तहड़ी लकड़ी को कोई भी नहीं छेड़ता।
एक कहावत है "दूर के ढोल सुहावने लगते हैं "।मतलब दूर की हर चीज अच्छी लगती हैं। जो हमारे पास है वो हमे अच्छी नही लगती।
मतलब हम अपनी संस्कृति से नफरत करने लगे। हमारी यही गलती हमें आज भुगतनी पड़ रही हैं। अपना अपना होता है पराया पराया होता हैं। महंगाई के दौर में हमारी अपनी संस्कृति ही हमें गरीबी के जंजाल से मुक्त कर सकती है, गैरो की संस्कृति अपनाए रहोगे तो हम कभी गरीबी से मुक्ति नहीं हो उपायेगे, अपनी पहचान नहीं बना पाएंगे।
उदाहरण के तौर पर जंगल के कानून में एक जानवर जीने के लिए दूसरे जानवर का शिकार करता है, समंदर में बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है ठीक इसी प्रकार मानव समाज में भी जीने के लिए, तरक्की करने के लिए, सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए हमें भ्रमित किया जा रहा है। आदिवासियों में जो समुदाय बलवान है, बुद्धिमान है, जिसकी सत्ता में पकड़ है, वही समुदाय सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा है और ऐसा हो रहा है।
हम अपने लोगों को घर की मुर्गी दाल बराबर समझते हैं हमारा कोई भाई कितना ही भी अच्छा विचार हमें बताएं हम उसके विचारों को तवज्जो नहीं देते और दूसरों की हां में हां मिलाते हैं। सरनेम, रिती-रिवाज आदि अन्य चीजे गैरों का इस्तेमाल करेंगे तो हम कहां से बढ़ेंगे और हम भ्रमित हो रहे हैं। हमें इस भ्रम से दूर निकलना होगा।
यदि हम सोचेंगे की सोलवीं सदी जैसा हरियागढ का वीर योद्धा कोरकू जाड़वा राजा और 18 वीं सदी जैसा पचमढी का राजा भभूतसिंह कोरकू एवं वीर क्रांतिकारी रेंगा कोरकू महान, वीर बिरसा मुंडा जैसा आज के दौर में भी कोई वीर क्रांतिकारी वीर योद्धा आएगा और हमें इस दलदल से बाहर करेगा, यह असंभव है। ऐसे ऐतिहासिक वीर महापुरुषों से प्रेरणा लेकर हमें स्वयं संघर्ष करना पड़ेगा। घर-घर रेंगा कोरकू जगाना पड़ेगा। आज का दौर संगठित होकर लड़ने का दौर है। सरकार एक हाथ से देती है और दोनों हाथ से वसूली होती है ऐसे में हम कहां से आगे बढ़ेंगे। जो जल जंगल जमीन हमारी थी उसे सरकार ने संरक्षण के नाम पर अभ्यारण के नाम पर अपने कब्जे में ले लिया है और हमें वहां से बेदखल कर दिया है भारत में जितनी सरकारी जमीन है वह हमारे आजा पुरखों की संपत्ति है। संविधान देश चलाने के लिए बनाया गया है समाज चलाने के लिए नहीं। हमारा समाज हमारी रूढ़ी प्रथा, हमारी कस्टमरी लाॅ से चलता है जिसका हमारे लोगों को जरा सा भी ज्ञान नहीं है।
कोरकू समुदाय को संगठित करने की, सामाजिक जन जागरूकता की जो लहर वर्तमान समय में देखने को मिल रही है यह पुनः कोरकु साम्राज्य के पुनर्स्थापना की ओर इशारा कर रहा है। इसलिए प्रदेश की वीर कोरकु सेनानियों से अपील की जाती है, जो विचारधारा युवाओं के मन में हिलोरें ले रही है, उसे एक नई शक्ति का रूप देना है और वह है युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश। यह संगठन एक विचारधारा है, वह विचारधारा जो एक निश्चित उद्देश्य के तहत समाज को नई पहचान दिलाने के लिए अन्य आदिवासी समुदाय की तुलना में स्वयं की पहचान के लिए, विकसित समाज के रूप में गिने जाने के लिए संघर्षरत है। आओ मेरे युवा साथियों हम सभी के मन में समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून है। जो कार्य वर्षों से हमारे वरिष्ठ जनों ने प्रयास करने के बावजूद नहीं कर पाए उस लक्ष्य को हमें पूरा करना है, हमें आवश्यकता थी एक ऐसी क्रांति की जो समाज को एक नई दिशा दे सके।
हम प्रकृति पुत्र हैं। चंद्रमा और सूर्य देवता प्रकृति से अलग नहीं है।
भारत देश के प्रथम ध्वज से कोई भी वाकिफ नहीं है जब 1902 में पहली बार गुलाम भारत की राजधानी कलकत्ता में देश के क्रांतिकारियों ने फहराया था वह ध्वज भी मध्य भारत के आदिवासियों से प्रेरित होकर ही बनाया गया था, RRR फिल्म में भारत के प्रथम ध्वज का कुछ अंश दिखाया गया है जिसमें सबसे नीचे के लाल पट्टी में चांद और सूरज बना हुआ था। आज वही ध्वज हमें पुनः समाज को संगठित करने की ओर प्रेरित कर रहा है, एक दैवीय शक्ति हमें संगठित होने की ओर इशारा कर रही है, जो सदैव हमारे साथ रहती है किंतु हम उसे पहचान नहीं पा रहे हैं। कोरकु समुदाय में जन्मे हमारे पूर्वज दिव्य शक्तियों से सुसज्जित और वीर हुआ करते थे उनका आशीर्वाद आज हमारे साथ है हम वीर महापुरुषों की संताने हैं हमारे आजा पुरखा दादा एक जमाने में वीर और महान हुआ करते थे तब इस स्थिति में आज के दौर में हम भी उन्हीं पूर्वजों से शिक्षा लेकर उन्हीं की राह पर चलते हुए समाज को नई दिशा देंगे।
वक्त है बदलाव का बदल दो इतिहास को।
याद रहे साथियों! अभी नहीं, तो कभी नहीं ।
वीर बिरसा मुंडा की आवाज- "अबुआ देशोंन अबुआ राज"।
इतिहास उधर मुड़ जाता है जिधर जवानी चलती है।
समाज का विकास कब? हमारा युवा जागगा तब।

✍युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश🚩🚩

13/07/2022

भीड़ मे निकल पड़ा हूँ मैं,
कोरकू साम्राज्य पुनर्स्थापना में।

अपनो को जगाने,
नई पहचान बनाने ।

'कोरकू' भीड़ में चलता है
यही तो हमें खलता है ।

भीड़ में चलूॅ चलता रहूॅ,
मगर मैं इस भीड़ का हिस्सा नहीं।

धंधली-सी दिख रही है मंजिल
पर मेरा इरादा कच्चा नहीं।

वक्त को मुठ्ठी मे किए बंद
बढ़ता जा रहा हूँ कदम-दर-कदम

वक्त जैसे रेत, फिसल रहा इन हाथों से,
नही इसे ज़रा-सा भी सबर।

भीड़ मे निकल पड़ा हूँ मै,
मगर इस भीड़ का मैं हिस्सा नही।

अलग पहचान है बनानी,
करना है कुछ अलग काम

दिन को सूरज,रात को चाँद
इन्हीं को साथी मानकर

वीर बिरसा मुंडा की आवाज
अबुआ देशोंन अबुआ राज

मै हिस्सा नही भील प्रदेश का
न रहूँगा गोंडवाना राज्य में।

धूल खाती इतिहास के पन्नों को साफ कर
ला दूंगा जागरूकता कोरकू साम्राज्य पर।

चल पड़ा हूँ पूरा करने अपने ख़्वाब
भीड़ में चलू,चलता रहूँ
मगर मैं भीड़ का हिस्सा नहीं।

_______युवाशक्ति ________

08/07/2022

जाने अपने हक और अधिकार के बारे में

🙏👉मेरे सोए हुए युवा साथियों के लिए👉अपमान सह रहा है, मगर बोलता नहीं। कैसा लहू है साथियों,जो कभी खौलता नहीं।।👉सोया है समुद...
10/04/2022

🙏👉मेरे सोए हुए युवा साथियों के लिए

👉अपमान सह रहा है, मगर बोलता नहीं।
कैसा लहू है साथियों,जो कभी खौलता नहीं।।

👉सोया है समुदाय सारा, बेसुध पड़े हैं सब।
क्या पाँव कट गये हैं, कोई दौड़ता नहीं।।

👉हम थे गुलाम पहले, क्या अब भी गुलाम हो।
क्यों भाग्य का भय , तुम्हें छोड़ता नहीं।।

👉कब तक झुके रहोगे, करके निगाह नीची।
क्यों स्वाभिमान तुम्हारा, तुम्हें झंझौड़ता नहीं।।

👉है वक्त का तकाजा, कर लो मिशन पूरा।
फिर न कभी ये कहना,कोई हमें "जोड़ता" नही।।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

आओ मेरे युवा साथियों कब तक हम दूसरों की गुलामी करते रहेंगे हमें स्वयं की पहचान बनानी होगी गैर समुदाय का सरनेम, रीति-रिवाज,पूजा-पद्धति,गैर समुदाय की संस्कृति अपनाकर हम गैरों को ही बढ़ावा दे रहे हैं। इस कारण हमारे ऊपर अत्याचार बढ़ रहा है।
ग्रामीण इलाकों में हमारे कुछ लोग ईसाई बन रहे हैं कुछ लोग मुस्लिम बन रहे हैं कुछ लोग हिंदू संस्कृति को अपना रहे हैं और अपने अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं।
अब अपने समुदाय के अस्तित्व को बचाने का एकमात्र विकल्प है युवा शक्ति का जागृत होना। युवा शक्ति का संगठित होना। अपने समुदाय की बहन बेटियों और हमारी संस्कृति की रक्षा के लिए आओ हम मिलकर संघर्ष करेंगे।

✊✊🏹🏹अबुआ देशोंन अबुआ राज 🏹🏹✊✊

तस्वीर में आप एक टमाटर के पौधे को देख रहे होंगे, शायद किसी यात्री ने टमाटर के बीज को ट्रेन से फेंक दिया होगा। ये पौधा मि...
05/04/2022

तस्वीर में आप एक टमाटर के पौधे को देख रहे होंगे, शायद किसी यात्री ने टमाटर के बीज को ट्रेन से फेंक दिया होगा। ये पौधा मिट्टी की छाती फाड़कर नही बल्कि पत्थरों को चीरकर बाहर आया है।
जब ये और भी नन्हा सा होगा, तब शताब्दी और राजधानी जैसे तूफान से भी तेज दौड़ती ट्रेनों के बिल्कुल पास से गुजरते हुए भी इसने सिर्फ बढ़ना सीखा और बढ़ते बढ़ते आखिरकर इसने एक टमाटर को जन्म दे ही दिया।

इस पौधे के न हाथ है, न पांव, न ही दिमाग है, और तो और इसको जीवित रहने के लिए कम से कम मिट्टी और पानी तो मिलना चाहिए ही था, जो इसका हक भी था।
लेकिन इस पौधे ने बिना जल, बिना मिट्टी के, बिना किसी सुविधा के अपने आपको बड़ा किया और फला फूला, और जो इस पौधे के जीवन का उद्देश्य एक और फल को देना था, वो उद्देश्य इसने पूरा किया।
हम इंसानों के पास तो हाथ है, पांव है, दिमाग है, उसके बाद भी यदि हम जीवन मे अपने आपको कमजोर मानकर, जीवन को सही प्रकार से, जो हमारे जीवन का उद्देश्य है, इस प्रकार से नही जीते है तो इस जीवन मे आने का कोई औचित्य बचता ही नही है।

जिन लोगो को लगता है कि जीवन मे हम तो असफल हो गए, हम तो जीवन मे कुछ कर ही नही सकते, हम तो बस अब बरबाद हो ही चुके है, तो उन्हें इस टमाटर के पौधे से कुछ सीख लेनी चाहिए। असली जीवन का नाम ही लगातार संघर्षों की कहानी है ।

11/03/2022

🚩विचार विशेष 🙏
🚩अंतर्जातीय विवाह आदिवासियों के लिए घाटे का सौदा।
👉क्या करें?
जब आदिवासी लड़की गैर आदिवासी लड़के से विवाह कर लेती है।
यदि आदिवासी लड़की बालिग हो, लड़की की गवाही लड़के के पक्ष में हो, दोनों की राजी खुशी हो तो हमें क्या करना चाहिए? क्योंकि कानून भी लड़का लड़की को बालिग होने के नाते विवाह करने की अनुमति देता है। तब मां-बाप कुछ नहीं कर पाते हैं। समाज चुप हो जाता है। संगठन को बड़ा अफसोस होता है कि हमारे ही लोगों की गलती की वजह से गैर समाज के लोग आदिवासी लड़की से विवाह उपरांत उसके नाम पर आदिवासियों की जमीनें खरीदते हैं। सभी के दिमाग में एक बात उभरकर आती है कि हम हमारी आदिवासियों की जमीन कैसे बचाएं? जबकि सरकार ने भी अंतरजातीय विवाह को मान्यता देकर रखा है। कई आदिवासी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगे की रख दी है कि जो आदिवासी लड़की गैर आदिवासी लड़के से विवाह करती हैं उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द होना चाहिए। लेकिन सरकार और कोर्ट यह कहकर आवेदन खारिज कर देती है कि विवाहित आदिवासी लड़की एसटी, एससी एक्ट के अपने अधिकारों का प्रयोग करके प्रताड़ित होने से बच सकती है। यह सरकार का दोहरा रवैया है। एक तरफ एसटी एससी एक्ट के तहत हमें बचा रही है दूसरी तरफ अंतर्जातीय विवाह को मान्यता देकर आदिवासियों की जमीने हड़पने का षड्यंत्र चल रहा है। इस संड़यंत्र से हमें कैसे निपटना है? यह सबसे बड़ा विषय है।
संविधान में बाबा साहब अंबेडकर ने आदिवासियों की रक्षा के लिए, जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए पांचवी अनुसूची जैसे मजबूत खंबे गाड़के रखे हैं और भी ऐसे कई कानून है जो हमारी जल जंगल जमीन की रक्षा करती है। "आदिवासी शब्द" जब तक हमसे जुड़ा रहेगा, गैर आदिवासियों से हम स्वयं की रक्षा कर सकते हैं। जल जंगल जमीन की रक्षा कर सकते हैं। जिस दिन हमसे "आदिवासी शब्द" छीन लिया जाएगा अर्थात शासन के द्वारा आदिवासी कैटेगरी से हमें ओबीसी कॉलम में शामिल कर लिया जाएगा, उस दिन हम पूरी तरह गुलाम बन जाएंगे।
इसका एक ही हल है और वह यह कि जो आदिवासी लड़की किसी गैर लड़के से प्रेम प्रसंग या अन्य कारणों के चलते विवाह करती है, लड़की से स्टांप पेपर पर यह लिखवाया जाए कि गैर समुदाय में जाकर वह "आदिवासी "( जाति प्रमाण पत्र) का इस्तेमाल जमीन खरीदने और इलेक्शन लड़ने के लिए नहीं करेगी। ग्राम सभा के माध्यम से प्रस्ताव पास करवाकर थाने और तहसील में इसकी कॉपी जमा कर करके रिसीव ले लिया जाए ताकि भविष्य में गैर समाज में विवाहित आदिवासी लड़की के नाम पर जमीन खरीदी जाती है तो सामाजिक संगठन लिखित दस्तावेज के आधार पर लड़की और उसके गैर आदिवासी पति पर केस दर्ज करवा सके।
सरकार हमारी कोई भी मांगे शीघ्र नहीं मानती हमें भी संविधान में निहित प्रावधानों का सहारा लेकर लड़ाई लड़नी पड़ेगी इसके लिए प्रत्येक ग्राम की गतिविधियों की जानकारी जिला और प्रदेश संगठन तक पहुंचे, इसके लिए ग्राम/ब्लाक/जिला समिति का होना आवश्यक है।
अतः युवा साथियों से आह्वान किया जाता है की ग्राम समिति, ब्लॉक समिति और जिला समिति गठन की प्रक्रिया युवा शक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश के तहत प्रारंभ कर दें।
याद रहे, कोरकू समाज हमारा घर है घर को सुधारने के लिए हमें किसी नंबर की आवश्यकता नहीं होती। नंबर की आवश्यकता तब होती है जब हम सहायता के लिए शासन के समक्ष झोली फैलाएं। हमारे समाज में ही बहुत कुछ है, हमारा समाज मेहनती है, मेहनत और बुद्धि के सहयोग से नई शक्ति प्राप्त की जा सकती है, धन्यवाद।

✍अबुआ देशोंन अबुआ राज
👉युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश🙏

28/02/2022

🚩 विचार विशेष🚩केवल एक बार अवश्य पढ़े।
🚩मिशन कोरकू समाज जनजागरूकता यात्रा।
🚩"जागो जगाओ समाज सुधार अभियान"।
🙏मध्य प्रदेश🙏
जय जोहार, जय मुठवा, हर हर महादेव।
साथियों! मिशन कोरकू समाज जन जागरूकता यात्रा, मतलब मिशन केवल सेना के द्वारा चलाया जाता है और मिशन हमेशा कामयाब होता है।
जिला छिंदवाड़ा की धरा से संचालित युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश का असल मकसद अपनी विचारधारा के साथ-साथ इस बात का आकलन करना था कि हमारे वरिष्ठ जन जो 90 के दशक से समाज सुधार में लगे हैं, आखिर ऐसी क्या कमी है जो समाज को संगठित नहीं कर पाए?
ऐसी कौन सी वजह है जो समाज को संगठित नहीं होने दे रही है। हम मेहनत करते हैं किंतु सफलता हमें ना के बराबर मिलती है। आखिर ऐसा क्यों? यह जानना बहुत जरूरी था और आज युवा शक्ति सेना के मुट्ठी भर सैनिक 4 जिलों की जानकारी जुटाकर अपने किले में भविष्य की योजना को बनाने में जुट गये हैं। युवाशक्ति के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश भ्रमण के दौरान यह पाया कि हमारे समाज के लोग, समाज के संगठन, राजनीति रूपी सत्ता सुंदरी का वरण करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। नतीजा यह है कि हम राजनीति की कुर्सी तक पहुंचने के लिए हमारे अपनों को ही कुचल रहे हैं। जैसे समंदर में बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है।
"जंगल के कटने का किस्सा ना होता, यदि कुल्हाड़ी के आगे लकड़ी का हिस्सा ना होता"।" घर का भेदी लंका ढाए, भाई चिल्लाए हाय हाय"। हम यह क्या कर रहे हैं?
सत्य का वास गरीबों के यहां है। चटनी रोटी खाते हैं और सुकून से सोते हैं। गरीब कभी भी अपने नसीब का रोना नहीं रोता। वह सोचता है-हे ऊपर वाले तूने भी क्या लीला रची है। इस दुनिया में जीने के लिए समंदर और जंगल का कानून लागू होता है।
साथियों! हम अच्छी तरह वाकिफ हैं समाज में क्या-क्या परेशानी है? क्या कमियां है?
हम सब जानते हैं समाज की बीमारी को। हम समझ रहे हैं और अंजाम क्या होगा यह भी अच्छी तरह जानते हैं। किंतु बात यह है कि समाज में लगा हुआ यह रोग किस जड़ी बूटी से ठीक होगा। जिस तरह जड़ी-बूटी के जानकार विरले ही होते हैं ठीक उसी तरह समाज में परिवर्तन लाने वाले भी विरले ही होते हैं। मिशन जन जागरूकता यात्रा के आकलन करने के पश्चात, हम यह बात डंके की चोट पर कह सकते हैं, जो वैचारिक क्रांति युवा नेतृत्व के माध्यम से लाई जा रही है, इस वैचारिक क्रांति से अपने समाज के छोट्भैया नेता और स्वार्थ की भावना से ओतप्रोत संगठन को चलाने वाले लोगों के पसीने छूटने वाले है।
परिवर्तन लाना है तो केवल चार अंगुल के मस्तिष्क को हमें परिवर्तित करना होगा।
एक महानुभाव के वह शब्द "जिस संगठन में कोरकु शब्द जुड़ा हो, उस संगठन की बैठक में अवश्य जाना चाहिए"। सत्य है कोरकू समुदाय को वही संगठन बदल सकता है जो कोरकु शब्द, कोरकू परंपरा को मानता हो। गैर समुदाय के लोग हमें नचा रहे हैं और हम बिंदास मदमस्त हाथी की तरह नाच रहे हैं घूम रहे हैं। उनके द्वारा बनाए हुए गानों में नाच रहे हैं। उनके बनाए हुए नीति नियम के अनुसार चल रहे हैं। वह जो पहना रहे हैं वह हम पहन रहे हैं। जैसे हमारे लोग अभी पीलिया रंग से पीड़ित है।
मध्यप्रदेश में आदिवासी बोले तो कोरकु बिल्कुल भी नहीं। क्योंकि हमने अपनी पहचान खो दी है। इतिहास का अता-पता ही नहीं। सरनेम गैरों का। संस्कृति गैरों की। कपड़े गैरों के इच्छा अनुसार। हमारी धनसंपदा गैरों को। बहन बेटियां भी गैरों को दे रहे हैं। बहुत बड़े दानी हैं हमारे लोग। लानत है ऐसी दानीगिरी पर जो अपनी कौम को ही बर्बाद कर दें।
पिछले सालों में एक नारा चलता था "21वी सदी उज्जवल भविष्य" यह किसी और के लिए नहीं वरन् हमारे कोरकू समुदाय के लिए ही था। प्रकृति पुत्र होने के नाते प्रकृति के द्वारा प्रदत संदेश हम तक शीघ्र पहुंचता है। वर्तमान का दौर भी हमें यही संदेश दे रहा है।
कोरकू सेना रूपी ट्रेन का ड्राइवर प्रकृति के द्वारा प्रदत्त चांद सूरज से युक्त शक्ति संपन्न लाल ध्वज को हाथ में लेकर ट्रेन चला रहा है। और जिस ट्रेन के ड्राइवर के पास लाल ध्वज होता है, जो शक्ति, साहस का प्रतीक है, उस ट्रेन के सामने कोई नहीं आता। ड्राइवर कहता है- कोरकू साम्राज्य की ट्रेन आ रही है पटरी से हटो, "हटो नहीं तो कटो"।
वक्त बदलाव का है यदि हम नहीं बदलेंगे तो प्रकृति हमें स्वयं बदल देगी। और हम सब जानते हैं प्रकृति अपने पुत्रों को बदलने के लिए तांडव भी मचा देती है और जब तांडव मचता है तो चारों और खलबली पैदा हो जाती है और यह खलबली हमें अभी से दिखाई दे रहा है। स्वार्थ की भावना से ओतप्रोत संगठनों के बीच उत्तल पुथल जारी है।कौन आ गया, यह कौन आ गया है, अरे देखो देखो शेर आ गया है। वह सोच रहे हैं कि जिस समुदाय को हम वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते थे, उनके मन मस्तिष्क को भ्रमित करके गुलाम बना के रखे थे आज उसी कोरकु समुदाय के नौजवान एक सेना के तौर पर संगठित होने लगे है। हम कोरकु नौजवानों से आव्हान करते हैं, आओ हम संगठित होकर समाज को नई दिशा देते हैं।
कम समय में इतिहास केवल युवा ही बनाते हैं यह हमारे लिए सुनहरा अवसर है इस अवसर को हाथ से मत जाने दो यारो। सभी वरिष्ठजनों से निवेदन है कि वे अपने अंदर मौजूद जवानी रूपी पौरूष शक्ति को पहचाने। परिवर्तन की इस बेला में समय दान, श्रमदान, अंशदान का विशेष महत्व है।
आओ हम सब मिलकर एक नई विचारधारा के साथ हमारी अपनी संस्कृति को पुनः स्थापित करें।

✍✍"अबुआ देशोंन अबुआ राज"
युवाशक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश🚩

युवा शक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश
17/02/2022

युवा शक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश

👉शिक्षा क्यों जरूरी है?👉क्योंकि-जो मेहनत से पढ़ता है,उसका कद भी खूब बढ़ता है।ज्ञान से जो मूरत गढ़ी जाती है,वो पूरे दुनिया म...
17/02/2022

👉शिक्षा क्यों जरूरी है?

👉क्योंकि-

जो मेहनत से पढ़ता है,
उसका कद भी खूब बढ़ता है।
ज्ञान से जो मूरत गढ़ी जाती है,
वो पूरे दुनिया में पूजी जाती है।

अशिक्षित को शिक्षा दो, अज्ञानी को ज्ञान,
शिक्षा से ही बन सकता हैं,हमारा समाज महान।

शिक्षा का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बड़ा ही महत्व हैं। शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान होता हैं।एक शिक्षित इंसान ही समाज को बदल सकता हैं, इसलिए शिक्षा के महत्व को जरूर समझे।
हम जानते हैं पिछले 2 वर्षों के अंतराल कोरोना काल में हमारे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। आज हमारी आय का स्रोत जो भी हो, हर घर में एंड्राइड मोबाइल, जरूरी के अनुसार हम अपना शौक भी पूरा करते हैं, किंतु क्या हमने कभी सोचा है पिछले 2 वर्षों से प्रशासन की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में कोरोना काल के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उल्टा ऑनलाइन शिक्षा को महंगा कर दिया गया है अब आप ही बताएं महंगाई के इस दौर में एक गरीब भला अपने बच्चे को कैसे पड़ा सकेगा। तो क्या सामाजिक संस्थाएं और समाज के जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता इस पर कोई विचार मंथन नहीं करते। सामाजिक कार्यकर्ताओं के मन में शिक्षा के प्रति उच्च विचार अवश्य उठते होंगे किंतु सामर्थ नहीं है साहस नहीं है कि वह कुछ कर पाए।
आज मैं आप सभी का ध्यान शिक्षा के क्षेत्र में आकर्षित करना चाहता हूं। शहरी क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो देहात क्षेत्र में शिक्षा का दीया ना के बराबर उजाला दे रहा है। अर्थात महामारी के दौर में गांव में स्कूल बंद होते है, कभी चालू होते हैं।
महामारी के नाम पर ना जाने कितने नियम कानून आम जनता पर लाद दिए है। जिसका बोझ गरीब परिवार उठाने में असमर्थ हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। क्यों ना हम गांव-गांव में शिक्षा का उजियारा फैलाएं।
सामाजिक पंजीकृत संस्थाएं, अपंजीकृत संस्थाएं, व्यक्ति विशेष जागरूक समाजसेवी कार्यकर्ता समय, श्रम और धनदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़े-लिखे नौजवानों को मिनिमम शुल्क के साथ हम अपने गांव में ही बच्चों की पढ़ाई करवाएं। क्योंकि आज हम पढ़े लिखे हैं इसलिए संविधान की बात करते हैं, जागरूकता की बात करते हैं। किंतु आने वाला भविष्य यदि शिक्षा से वंचित रह गया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। आज के दौर में शिक्षा और धन में कंपटीशन चल रहा है दोनों को अर्जित करने की शक्ति चार अंगुल की मस्तिष्क में छुपी हुई है। आजकल शिक्षा को भी बेचा जा रहा है। कलेक्टर, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर आदि बनने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है।
काले अक्षरों को पढ़ लेने से कोई शिक्षित नहीं हो जाता। अक्षरों में छुपी हुई भाषा समझने के लिए शिक्षा के रहस्य को जानना आवश्यक है। इसलिए शिक्षा पर संतुष्टि अधूरा ज्ञान है। गुलामी रूपी जंजीर को शिक्षा की तलवार से काटा जा सकता है।
किसी ने कहा है-
"जरूरी नहीं रोशनी चिरागो से हो,
शिक्षा से भी घर रोशन होते है।
शिक्षित बनो संगठित रहो।

✍ दिलीप बन दर्शमा
🚩युवा शक्ति कोरकू समाज मध्यप्रदेश
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