National Human Rights & Crime Control Bureau North Chhotanagpur Jharkhand

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22/07/2025
कुछ घंटों में बदला देश का उपराष्ट्रपति: अचानक इस्तीफे के पीछे की असली कहानी क्या है?21 जुलाई 2025 को भारत की राजनीति में...
22/07/2025

कुछ घंटों में बदला देश का उपराष्ट्रपति: अचानक इस्तीफे के पीछे की असली कहानी क्या है?

21 जुलाई 2025 को भारत की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने न केवल संवैधानिक पदों की स्थिरता पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सब कुछ वाकई 'स्वास्थ्य कारणों' तक सीमित था, या इसके पीछे कोई और बड़ा राजनीतिक खेल चल रहा था।

पहला दृश्य: दोपहर 3:53 बजे की खबर

21 जुलाई की दोपहर, भारत सरकार के उपराष्ट्रपति सचिवालय द्वारा PIB दिल्ली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है। इसमें साफ-साफ बताया जाता है कि भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ 23 जुलाई को राजस्थान की राजधानी जयपुर जाएंगे। इस एक दिवसीय दौरे में वे रियल एस्टेट डेवलपर्स संघ (CREDAI) राजस्थान की नव-निर्वाचित समिति से संवाद करेंगे।

इस प्रेस रिलीज़ में कहीं भी उनके स्वास्थ्य को लेकर कोई चिंता नहीं झलकती। न कोई संकेत, न कोई अफवाह। यानी कि वे पूरी तरह सक्रिय, स्वस्थ और अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लगे हुए थे।

दूसरा दृश्य: उसी दिन शाम को इस्तीफा

लेकिन कुछ ही घंटों बाद, देर शाम को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की एक औपचारिक चिट्ठी सामने आती है, जो उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए लिखी है। उसमें उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की घोषणा की।

इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद और सांसदों का आभार जताया और अपने कार्यकाल को "सम्मान की बात" कहा। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह फैसला बिलकुल अचानक लिया गया। न कोई पूर्व घोषणा, न कोई स्वास्थ्य बुलेटिन।

तो क्या यह केवल 'स्वास्थ्य' का मामला था?

सवाल उठना लाजमी है –

जब दोपहर तक उपराष्ट्रपति पूरी तरह सक्रिय थे और सरकारी दौरे पर जाने वाले थे, तो शाम होते-होते ऐसा क्या हुआ कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा?

क्या ये राजनीतिक दबाव, संसदीय असहमति या नई नियुक्ति की तैयारी का संकेत है?

संवैधानिक पृष्ठभूमि: उपराष्ट्रपति का पद और राज्यसभा की भूमिका

भारत के उपराष्ट्रपति न केवल देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पदाधिकारी होते हैं, बल्कि राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। संसद के वर्तमान मानसून सत्र के दौरान यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस, विधेयकों की जल्दबाज़ी में पारित करने की कोशिश, और प्रक्रियात्मक विवाद चलते रहते हैं।

ऐसे में उपराष्ट्रपति की निष्पक्षता, संवैधानिक निष्ठा और कार्यवाही संचालित करने की शैली सरकार की प्राथमिकता बन जाती है।

क्या सरकार को चाहिए था “अपना” उपराष्ट्रपति?

ऐसा नहीं कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ किसी अन्य दल से आए थे। वे स्वयं भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थन प्राप्त व्यक्ति थे। लेकिन पिछले कुछ सत्रों में उन्होंने कई बार ऐसे रुख अपनाए, जिनमें उन्होंने विपक्ष की बातों को सुनने और संसदीय प्रक्रिया को बनाए रखने पर ज़ोर दिया।

क्या यह सरकार के “त्वरित कानून पास करने” के एजेंडे में बाधा बन रहा था?

क्या कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए था जो राज्यसभा में विपक्ष की आवाज़ को अनसुना करने में अधिक 'सहयोगी' साबित हो?

सत्ता की रणनीति या संवैधानिक विवशता?

अगर यह एक राजनीतिक रणनीति है तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है। एक संवैधानिक पदाधिकारी, जिसे स्वतंत्र होकर काम करने का अधिकार है, अगर वह अचानक इस्तीफा देने को मजबूर होता है — और उसके पीछे की असल वजह छिपा ली जाती है — तो यह लोकतंत्र की नींव पर हमला है।

अब आगे क्या?

अब जब उपराष्ट्रपति का पद खाली हो गया है, तो निश्चित रूप से जल्द ही नया नाम सामने आएगा। सवाल यह नहीं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा — सवाल यह है कि वह कैसा होगा:

क्या वह निष्पक्ष रहेगा?

क्या वह राज्यसभा की गरिमा बनाए रखेगा?

या फिर वह सत्ता की कठपुतली बनकर केवल बहुमत की मुहर लगाएगा?

निष्कर्ष: देश को चाहिए जवाब, न कि औपचारिक चुप्पी

जब देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोग अचानक हटते हैं, और सरकार कोई स्पष्ट कारण नहीं देती — तो जनता को सवाल उठाना ही चाहिए।

क्या उपराष्ट्रपति को मजबूर किया गया?

क्या उन्होंने किसी नीति या विधेयक का विरोध किया था?

क्या उनकी संवैधानिक निष्ठा सत्ता को रास नहीं आ रही थी?

देश को जवाब चाहिए। जवाबदारी चाहिए। और सबसे बढ़कर – लोकतंत्र की रक्षा चाहिए।

राहुल चौरसिया
उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल अध्यक्ष (झारखंड)
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो
नई दिल्ली ,भारत

*बच्चों की  शिक्षा को सुलभ बनाने हेतु मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा की गई अच्छी पहल*  राहुल चौरसियाकक्षाओं की पुस्तकों का ...
15/04/2025

*बच्चों की शिक्षा को सुलभ बनाने हेतु मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा की गई अच्छी पहल* राहुल चौरसिया

कक्षाओं की पुस्तकों का मूल्य निर्धारण पूरे देश में लागू होने से गरीब परिवार के बच्चों को बेहतर शिक्षा में मदद मिलेगी।
चूँकि शिक्षा, समवर्ती सूची के विषय में आती है,इसलिए केंद्र सरकार के साथ साथ प्रत्येक राज्य के सरकारों को इस विषय को ठोस मानते हुए ऐसी पहल करनी चाहिए,जिससे गरीब परिवार के बच्चे भी निजी स्कूलों में नामांकन करा सके।हालांकि इससे पूर्व शिक्षा राज्य सूची के विषय मे आती थी,लेकिन 42 वें संविधान संशोधन के बाद इसे समवर्ती सूची में लाया गया,
इस सूची में शामिल होने के बाद, केंद्र और राज्य दोनों ही शिक्षा से जुड़े कानून बना सकते हैं। इससे अखिल भारतीय स्तर पर शिक्षा से जुड़ी नीतियां बनाई जा सकती हैं।

साथ ही निजी स्कूलों के द्वारा प्रत्येक वर्ष री एडमिशन के नाम पर एक मुश्त राशि जो ली जाती है,उस पर भी अमल कर जनहित के लिए गाइडलाइन जारी करनी की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो
उत्तरी छोटानागपुर संभाग अध्यक्ष
राहुल चौरसिया

••चिंतनीय~निंदनीय •••दहेज नहीं तो तलाक पर Alimony क्यों ?• साथ रहना नहीं तो गुजारा भत्ता क्यों ?• क्या आजकल की शादियां स...
14/01/2025

••चिंतनीय~निंदनीय ••

•दहेज नहीं तो तलाक पर Alimony क्यों ?

• साथ रहना नहीं तो गुजारा भत्ता क्यों ?

• क्या आजकल की शादियां सिर्फ तन का व्यापार हैं या पश्चिमी सभ्यता को अपनाने का यह परिणाम हैं ?

•क्या संस्कारों का अभाव हैं या खुली आजादी देने का परिणाम हैं या विसंगति का परिणाम है?

आज के समय की स्थिति और तलाक की बढ़ती संख्याओं को देखकर देश में तलाक के कानूनों में संशोधन की आवश्यकता हैं कानून की आड़ में घिनौने व्यापार का कारोबार और अत्याचार बंद हों यही समय की मांग हैं।

(दहेज लेना और दहेज देना एवं दहेज लेनदेन में सहयोग करना कानूनन अपराध है। संदर्भ दहेज निषेध अधिनियम, 1961)
लेख प्रेषक : राहुल चौरसिया
उत्तरी छोटानागपुर संभाग अध्यक्ष (झारखंड)
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो
(नई दिल्ली)

Team Assam..Good_One🤗
17/07/2024

Team Assam..Good_One🤗

08/07/2024

राष्ट्रीय ब्यूरो/ नई दिल्ली : आज एन एच आर सी सी बी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में माननीय राष्

सुबह~सवेरेआज दिनांक 05.07.2024 को चतरा जिला के टंडवा प्रखंड के राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रखंड कॉलोनी में निरीक...
05/07/2024

सुबह~सवेरे
आज दिनांक 05.07.2024 को चतरा जिला के टंडवा प्रखंड के राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रखंड कॉलोनी में निरीक्षण करने को गया,अध्ययनरत लगभग सभी कक्षा के छात्र छात्राओं से मिला,उनसे पढ़ाई एवं उन्हें मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त किया,सभी जानकारी संतोषजनक मिले। कक्षा आठ के बच्चों को कुछ विशेष विषय में जानकारी भी दी।
उन्हें आग,ब्लड,व्यंजन,गणित,देश विदेश,मानवाधिकार संरक्षण के विषय पर जानकारी दी।
उन्हें लंच के समय मिल रही भोजन से संबंधित सभी जानकारियां ली,एवं भोजन वितरण के समय खाना की गुणवत्ता की भी जांच की।

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।

RAHUL CHOURASIYA
NORTH CHHOTANAGPUR DIVISION CHAIRMAN
(NHRCCB)

13/05/2022

NHRCCB ASSAM TEAM ACTIVITY

राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो की तिनसुकिया शाखा द्वारा बुधवार को असम सरकार द्वारा संचालित तिनसुकिया बांगिया विद्यालय का दौरा कर वहां के हालात की जानकारी ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्यूरो के प्रदेशाध्यक्ष निशांत थर्ड की अगुवाई में उनकी टीम द्वारा वहां निरीक्षण किया गया। जिसमें बहुत सारी खामियां पाई गयी। ज्ञात हो असम सरकार द्वारा 2005 से पूरे राज्य में विद्यार्थियों को मध्यांतर भोजन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। मगर कई स्कूलों में इसकी हालत बद से बदतर देखी जा रही है यही नजारा बुधवार को तिनसुकिया बांगिया विद्यालय में देखा गया। बच्चों को दाल के नाम पर सिर्फ गर्म पानी दिया जा रहा है। सप्ताह में दिन के हिसाब से भोजन का मेन्यू रहता है बुधवार के मेन्यू में अंडा परोसा जाना था। मगर भोजन से अंडा गायब था। बच्चों के भोजन का पैसा किसकी जेब में जा रहा है यह भी एक जांच का विषय है। दूसरी तरफ सरकार द्वारा बच्चों को विद्यालय की पोशाक दी जाती है बच्चों से बात करने पर पता चला की उन्हें विद्यालय की ओर से कोई भी पोशाक नहीं मिली और तो और सरकार की तरफ से बच्चों को पढ़ने के लिए जो किताबें दी जाती है उसका वितरण तक नहीं हुआ किताबें रखी रखी पुरानी हो गई और पाठ्यक्रम नया आ गया ज्ञानवर्धक किताबें रद्दी का ढेर बनकर स्टोर में पड़ी है। बच्चों की शिक्षा के लिए दस कंप्यूटर रखे गए हैं जिसमें से सात खराब पड़े हैं। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी जिनको दी गई है उन्होंने छह महीने से स्कूल वालों से कोई मुलाकात तक नहीं की। स्कूल की छत काफी जर्जर अवस्था में है जो किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक से बात करने पर पता चला की सरकार की तरफ से उन्हें विद्यालय के लिए वार्षिक अनुदान पचहत्तर हजार रुपए मिलता है। जो कि काफी कम है। साढ हजार रुपए (वार्षिक) तो बिजली खर्च में ही चला जाता है और विद्यालय में शिक्षकों की कमी होने के कारण हमें बाहर से शिक्षक नियुक्त करना पड़ता हैं ।‌ जिसका लगभग एक लाख बासठ हजार रुपए (वार्षिक) हमें भुगतान करना पड़ता है। अब यहां सवाल यह उठता है कि यह रुपए आते कहां से हैं..?
विद्यालय द्वारा कोई समिति भी नहीं बनाई गई। विद्यालय प्रशासन सरकार की खामियां गिना रहा है मगर इस बात को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता की विद्यालय अपना काम बड़ी लापरवाही से कर रहा है। यहां तिनसुकिया नगर पालिका के ऊपर भी सवाल उठता है कि उसने ठीक विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने एक बड़ा कुङादान बना रखा है जिसकी दुर्गंध की वजह से बच्चों को आने जाने में काफी परेशानियां होती है। ब्यूरो के प्रदेशाध्यक्ष द्वारा विद्यालय एवं सरकार के इस रवैये की कठोर निंदा की गयी।और इस मुद्दे को लेकर संबंधित विभाग से बात करने की बात कही गयी।

05/05/2022
25 april 2022,नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1968  पर एक दिवसीय वेबिनर सम्पन्न।राष्ट्रीय मानवधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के ...
26/04/2022

25 april 2022,
नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1968 पर एक दिवसीय वेबिनर सम्पन्न।

राष्ट्रीय मानवधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के द्वारा नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1968 पर एकदिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार सम्पन्न हुवा। वेबिनार की अध्यक्षता माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष #डॉ_रणधीर_कुमार ने की, मुख्य अतिथि ब्यूरो के प्रदेश अध्यक्ष म. प्र. #राहुल_सिंह_चौहान जी और मुख्य वक्ता #उम्मीद_सिंह_राठौर जी (प्रदेश जनरल सचिव राजस्थान ) रहे।

वेबिनार के माध्यम से बताया गया कि नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1968 की धारा 4 के तहत राज्य सरकार स्थानीय प्रशासन की मदद करने हेतु नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों से कार्य ले सकती है।
नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक ज़िला मजिस्ट्रेट/ज़िला कलेक्टर या उपायुक्त के अधीन कार्य करते हैं।

मुख्य वक्ता उम्मीद सिंह राठौर जी ने बताया कि इस अधिनियम का उद्देश्य लोगों की रक्षा करना, आपदा के दौरान संपत्ति को नुकसान होने से बचाना, उत्पादन की निरंतरता बनाए रखना, लोगों का मनोबल ऊँचा रखना इत्यादि।
युद्ध और आपातकालीन स्थितियों के दौरान आतंरिक क्षेत्रों की रक्षा करना, सशस्त्र बलों की सहायता करना, नागरिकों को लामबंद करना और प्रशासन की मदद करना।
परमाणु हथियार, जैविक और रासायनिक युद्ध तथा प्राकृतिक/मानव निर्मित आपदाओं के दौरान लोगों की रक्षा करना है।

साथ ही वेबनार के माध्यम से यह बताया गया कि इस अधिनियम के तहत स्वयंसेवक प्रवासी श्रमिकों/अन्य व्यक्तियों के लिये सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) और आश्रयों की स्थापना करने ,व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protection Equipment- PPE), मास्क, सैनिटाइज़र का वितरण करने,किसी महामारी आदि के समय स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं की मदद तथा सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) और स्वच्छता संबंधी मुद्दे के बारे में लोगों को जागरूक करने के साथ राशन वितरण, दवा, चिकित्सा उपकरण इत्यादि की आपूर्ति में मदद आदि महत्वपूर्ण कार्य करने में योगदान दे सकते हैं।

:-राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर
प्रभात मिश्र
Www(dot)Nhrccb(dot)org

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