29/05/2026
"कर कै खाले ले कै देदे उसतै कोण जबर हो सै..." 🔥
क्या गजब की बात लिखी है हरियाणा के सूर्यकवि दादा लखमीचंद जी ने! 🙏 इस एक रागनी में जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई, गरीबी-अमीरी का खेल और इंसान के कर्मों की कीमत को बहुत ही गहराई से समझाया गया है। जो अपनी मेहनत का खाता है और अपने वादे का पक्का होता है, दुनिया में उससे बड़ा कोई धनवान नहीं।