21/03/2016
""वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं"" - श्री मैथिलीशरण गुप्त।
पर्व चाहे किसी भी धर्म का हो, किसी भी जाति का हो उसको हर्षोल्लास के साथ मनाने का मन तब ही करता है जब देश व समाज में सुख, शान्ति व समृद्वि व्याप्त हो ।
इसलिए होली की शुभकामनाओ से पहले सभी को आने वाले ""शहीद दिवस"" (23 मार्च 1931) की हार्दिक शुभकामनाए ।
23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की देश-भक्ति को अपराध की संज्ञा देकर फाँसी पर लटका दिया गया। कहा जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह तय की गई थी लेकिन किसी बड़े जनाक्रोश की आशंका से डरी हुई अँग्रेज़ सरकार ने 23 मार्च की रात्रि को ही इन क्रांति-वीरों की जीवनलीला समाप्त कर दी। रात के अँधेरे में ही "सतलज " नदी के किनारे इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। 'लाहौर षड़यंत्र' के मुक़दमे में भगतसिंह को फाँसी की सज़ा दी गई थी तथा केवल 24 वर्ष की आयु में ही, 23 मार्च 1931 की रात में उन्होंने हँसते-हँसते,
"'इनक़लाब ज़िदाबाद'" के नारे लगाते हुए फाँसी के फंदे को चूम लिया।
जब हम लोग एडवांस में ""वेलेंटाइन डे ",,,,हग डे,,,,किस डे ""मना सकते है तो """"शहीद दिवस """"क्यों नही मना सकते, क्यों अपने शहीदो के बलिदान का स्मरण नही कर सकते।