लोकसभा चंदौली- 76

लोकसभा  चंदौली- 76 निष्पक्ष, निर्भीक, र्निविवाद

12/04/2026

05/04/2026

जब आप अपना पुराना, टूटा या बेकार हो चुका मोबाइल फोन किसी फेरीवाले को चंद बर्तनों के बदले दे देते हैं, तो आपको लगता है कि आपने कबाड़ का सही सौदा किया। लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जो आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है।

कटिहार का एक मामूली सा मोबाइल दुकानदार इस्तार आलम, इंटरनेशनल साइबर अपराधियों का ‘हथियार सप्लायर’ निकला है। यह गिरोह आपके पुराने फोन के मदरबोर्ड को चीन और बांग्लादेश के साइबर ठगों तक पहुँचा रहा था, ताकि आपका पर्सनल डेटा चोरी कर बैंक खाते साफ किए जा सकें।

क्या है पूरा मामला? कैसे हुई गिरफ्तारी?

इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की लालगंज पुलिस ने 16 मार्च की रात एक ट्रक को पकड़ा। इस ट्रक में 11,605 पुराने मोबाइल फोन भरे हुए थे, जिनकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आँकी गई। पुलिस ने जब ट्रक में सवार 8 लोगों को गिरफ्तार किया, तो उन्होंने बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले इस्तार आलम का नाम उगला।

इसके बाद बिहार STF और यूपी पुलिस ने संयुक्त छापेमारी कर कटिहार के रौतारा इलाके से इस्तार को धर दबोचा। इस्तार कहने को तो एक छोटी सी मोबाइल दुकान चलाता था, लेकिन असल में वह एक इंटरनेशनल सिंडिकेट का सरगना था।

गली का ‘बर्तन वाला’ और पुराना मोबाइल: गिरोह का मॉडल

इस गिरोह के काम करने का तरीका इतना व्यवस्थित और शातिर है कि आम इंसान को इसकी भनक तक नहीं लगती। गिरोह के सरगना इस्तार आलम ने देश के कई बड़े राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, दिल्ली, तमिलनाडु और हैदराबाद में अपना एक बड़ा जाल बिछा रखा था। इस काम के लिए उसने बड़ी संख्या में ‘फेरीवालों’ को काम पर रखा था। ये लोग साधारण कबाड़ वाले बनकर गली-मोहल्लों में घूमते हैं ताकि किसी को शक न हो।

इन फेरीवालों का मुख्य काम लोगों को लालच देना होता है। ये खासतौर पर घरों की महिलाओं को अपना निशाना बनाते हैं और उन्हें नए चमचमाते स्टील के बर्तन या प्लास्टिक के डिब्बों का लालच देते हैं। इसके बदले में वे लोगों से उनके घर में पड़े पुराने, खराब या टूटे हुए स्मार्टफोन माँगते हैं। अधिकतर लोग यह सोचकर अपना पुराना फोन उन्हें दे देते हैं कि ‘यह तो कचरा है, इसके बदले नया बर्तन मिलना फायदे का सौदा है’, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वे अपना कीमती डेटा अपराधियों को सौंप रहे हैं।

जब ये फेरीवाले अलग-अलग शहरों से हजारों की संख्या में मोबाइल इकट्ठा कर लेते हैं, तो इन्हें बड़े ट्रकों में भरकर बिहार के कटिहार भेजा जाता है। कटिहार इस्तार आलम का मुख्य केंद्र है। एक बार में करीब 10 से 20 हजार मोबाइल वहाँ पहुँचते हैं। वहाँ पहुँचने के बाद इस्तार अपनी दुकान में इन सभी फोनों को बेरहमी से तोड़ देता है और उनके अंदर से ‘मदरबोर्ड’ निकाल लेता है।

मदरबोर्ड मोबाइल का वह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिसे फोन का ‘दिमाग’ कहा जाता है। फोन भले ही ऊपर से टूटा हो या बंद हो, लेकिन उसकी याददाश्त यानी सारा पर्सनल डेटा (फोटो, पासवर्ड, बैंक डिटेल्स) इसी मदरबोर्ड में सुरक्षित रहता है। इस्तार का असली मकसद इसी चिप या बोर्ड को निकालकर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों तक पहुँचाना होता है, ताकि वे आपके डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकें।

चीन और बांग्लादेश से कनेक्शन: डेटा की तस्करी

पुलिस की जाँच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस्तार आलम महज एक कबाड़ का कारोबारी नहीं था, बल्कि वह पिछले एक साल से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खतरनाक साइबर अपराधियों के साथ मिलकर काम कर रहा था। वह अपने द्वारा निकाले गए मोबाइल के मदरबोर्ड्स को चीन और बांग्लादेश के उन साइबर ठगों तक पहुँचाता था, जो कंबोडिया, मलेशिया और म्यांमार जैसे देशों में बैठकर बड़े-बड़े ‘साइबर स्कैम कंपाउंड’ यानी ठगी के केंद्र चला रहे हैं। यह एक बहुत बड़ा नेटवर्क है जो दुनियाभर के लोगों को अपना शिकार बनाता है।

इन मदरबोर्ड्स का विदेशी हैकर्स के पास जाने का मतलब है आपकी निजी जानकारी का खतरे में पड़ना। दरअसल, ये विदेशी हैकर्स इतने शातिर होते हैं कि वे आधुनिक सॉफ्टवेयर और मशीनों के जरिए आपके उन पुराने मदरबोर्ड से भी डेटा रिकवर कर लेते हैं। भले ही आपने अपना फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट लिस्ट या बैंक से जुड़ी जानकारी डिलीट कर दी हो, लेकिन ये हैकर्स उन्हें वापस निकालकर आपकी पहचान चोरी कर सकते हैं और आपके बैंक खातों में सेंध लगा सकते हैं।

हैरानी की बात यह भी है कि इस्तार का यह धँधा सिर्फ विदेशों तक ही सीमित नहीं था। उसने भारत के भीतर भी साइबर अपराधियों को यह ‘कच्चा माल’ उपलब्ध कराया। वह इन मदरबोर्ड्स को भारत के सबसे कुख्यात साइबर अपराध केंद्र ‘जामताड़ा’ और बिहार के स्थानीय छोटे-बड़े ठगों को भी बेचता था।

बुजुर्ग हिंदू सवर्ण का कॉलर पकड़ी दिल्ली पुलिस, क्योंकि बुजुर्ग सवर्ण वहां   नियमों का विरोध करने गए थे!यही औकात है सवर्...
09/03/2026

बुजुर्ग हिंदू सवर्ण का कॉलर पकड़ी दिल्ली पुलिस, क्योंकि बुजुर्ग सवर्ण वहां नियमों का विरोध करने गए थे!

यही औकात है सवर्णों की देश में!

शाहीन बाग में महीनों लोगों को आंदोलन करने की इजाजत दी गयी
किसान आंदोलन में एक व्यक्ति को उठाने की हिम्मत नहीं कर पाए!

लेकिन सिर्फ एक दिन के लिए सवर्णों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने से ना सिर्फ रोक दिया, बल्कि सबके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया!

अब सोच लीजिए इतने साल जो आप चुपचाप अपने अधिकारों का बलिदान देते आ रहे थे सामाजिक न्याय के नाम पर, उसका क्या सिला मिला है आपको??


08/03/2026

मेरे तो चक्षु खुल गए।

वरना कुछ भोले भाले सामान्य वर्ग के लोग रामलीला मैदान की तरफ निकल पड़े थे। बेचारे अपने अधिकार और समानता जैसी खतरनाक चीजें मांगने लगे थे। अच्छा हुआ समय रहते उन्हें समझा दिया गया कि लोकतंत्र में अधिकार मांगना भी कभी-कभी अनुशासनहीनता माना जा सकता है।

पुलिस ने बड़ी कृपा करके पहले रामलीला मैदान से हटाया, फिर जंतर मंतर से भी खदेड़ा, और कई लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया। आखिर जनता को भटकने से बचाना भी तो सरकार का ही कर्तव्य है। अगर हर कोई सड़क पर बैठकर सवाल पूछने लगे तो व्यवस्था कैसे चलेगी।

नीलवाद को भी शायद हमने ही बेवजह बदनाम कर दिया। असली सामाजिक न्याय तो शायद वही है जिसमें विरोध करने वाले घरों में बंद कर दिए जाएं और बाकी लोगों को समझाया जाए कि यह सब उनके ही हित में हो रहा है।

कुछ डिग्रीधारियों के बहकावे में आकर सामान्य लोग सरकार से सवाल पूछने लगे थे और #कायर_मोदी #कायर_सरकार न जाने क्या क्या लिख रहे थे। सोचिए कितनी बड़ी भूल थी। आखिर राष्ट्रवाद का असली अर्थ यही तो है कि जो भी फैसला ऊपर से आए उसे प्रसाद समझकर स्वीकार कर लिया जाए।

और यूजीसी के काले कानून भी शायद जनता के कल्याण के लिए ही हैं। जैसे कभी रोहित वेमुला एक्ट आया था और उसका भी विरोध नहीं हुआ। तब भी शायद जनता की भलाई ही छिपी होगी, बस हमें समझ नहीं आया।

सच में, अब समझ आया कि गलती सरकार की नहीं थी। गलती उन लोगों की थी जो यह सोच बैठे कि लोकतंत्र में नागरिक अपनी बात भी रख सकते हैं।

07/03/2026

#सामान्य_वर्ग के सभी प्रमुख चेहरों को जो भी आगामी ार्च के #प्रदर्शन के आगुआ थे उनको #हाउस_अरेस्ट कर लिया गया है सरकार पूर्ण रुपेन कोशिश कर रही है कि यह प्रदर्शन फेल हो

ऐसा इससे पहले सिर्फ धारा 370 हटाने के समय कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के साथ हुआ था

नहीं तो जो कि लगभग सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रैप कर दिया था उसके विरोध में हुए आंदोलन हुए तब भी नहीं हुआ था बल्कि संसद से और कड़ा कानून बना दिया गया।

जबकि भीम आर्मी को सड़क पर उत्पात मचाने की पूरी आजादी है। लक्ष्मण यादव - जितेन्द्र मीना जैसों को कैंपस-कैंपस घूमकर अनारक्षित वर्ग को गाली देने व अनारक्षित वर्ग से आने वाले पत्रकारों पर हमला करवाने की पूरी आजादी है।

दिल्ली दंगों से पहले के विरोध में 100 दिनों से अधिक तक दिल्ली बंद थी उसके बाद दंगे हुए तब जाकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार पर इन्होंने धीरे-धीरे वह बंद खाली कराया
#किसान_आंदोलन जोकि एक वर्ष से अधिक समय तक चला (जून 2020 - दिसंबर 2021) स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक रहा है। उसे समय भी किसी प्रमुख किसान समर्थक नेता या आंदोलन से जुड़े नेता को हाउस अरेस्ट नहीं किया गया था

अब आप खुद समझदार हैं #बीजेपी और सवर्ण समाज के आंदोलन से कितने भयभीत है
हर स्तर पर विरोध करिए जिंदा है तो जिंदा दिखीये। हो रहा था, आरक्षण के नाम पर हर चीज बनती जा रही है फिर भी हमें उससे कोई कष्ट नहीं था हमें पता था हमारे में वह दम है कि हम अपना स्थान किसी भी कठिन परिस्थिति में बना सकते हैं
लेकिन अब बात अपने बच्चों की है, बच्चों के भविष्य की है, ध्यान रखिएगा अपने बच्चों के लिए तो जानवर भी मरने तक लड़ने के लिए तैयार होते हैं आप और हम तो फिर भी इंसान हैं

बीजेपी ने सवर्ण समाज को अपना पिट्ठू समझ लिया था और सवर्ण समाज ने बीजेपी को ही एक मात्र देश और हिंदू हित की पार्टी मन लिया था। लेकिन यह सवर्ण समाज का भ्रम अब टूट रहा है और यह आंदोलन 8 मार्च को दिल्ली में सिर्फ एक आगाज है
हम पहचान उन नेताओं की भी पहचान कर रहे हैं जो savrn समाज का वोट तो चाहते हैं लेकिन सवर्ण समाज के हित में मुंह खोलने से पहले उनके साँसे थम जा रही हैं

ना 2027 दूर है नहीं 2029 दूर होगा।

समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र!
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध !


25/02/2026

#योगी सरकार, #मुस्लिम तुष्टिकरण और #हिंदुओं की #अनदेखी:

एक आम धारणा है कि #मोदी सरकार या #मोहन_यादव की सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण करती हैं,
लेकिन योगी आदित्यनाथ जी अलग हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि योगी सरकार भी उनसे अलग नहीं है।

#मध्य_प्रदेश में जातियों में से ुस्लिम समुदाय हैं। यह बात जानकर कई लोग चौंक गए थे।

लेकिन #उत्तर_प्रदेश की स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर है।
उत्तर प्रदेश में जातियों में से ुस्लिम उप-जातियाँ हैं।
यानी लगभग 48% OBC सूची #मुस्लिम समुदायों से बनी है। लगभग सभी मुस्लिम समूह OBC श्रेणी में शामिल हैं।

की धारा 11 सरकार को यह अधिकार देती है कि यदि कोई समुदाय सामाजिक रूप से पिछड़ा नहीं माना जाता या अब पिछड़ा नहीं रह गया है, तो उसे OBC सूची से हटाया जा सकता है।

इसके लिए किसी नए कानून की आवश्यकता नहीं होती, केवल एक कार्यकारी आदेश पर्याप्त है।
इसके बावजूद, योगी सरकार को उत्तर प्रदेश में सत्ता में आए 9 साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन एक भी मुस्लिम जाति को OBC सूची से नहीं हटाया गया।

28 मई 2024 को हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य मीडिया में अचानक एक खबर आई कि योगी सरकार मुस्लिम समुदायों की OBC स्थिति की समीक्षा करने या उन्हें हटाने पर विचार कर रही है।
लेकिन उस एक खबर के बाद पूरी तरह चुप्पी छा गई। न कोई आगे की कार्रवाई, न कोई समीक्षा।

1 जून 2024 को लोकसभा चुनाव का अंतिम चरण था (जिसमें वाराणसी भी शामिल था)। इसलिए कुछ लोगों का मानना है कि यह खबर चुनाव से ठीक दो दिन पहले रणनीतिक रूप से लाई गई थी, ताकि हिंदू मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा भी खत्म हो गया।

अब सामान्य वर्ग के #हिंदुओं और OBC हिंदुओं को यह समझने की जरूरत है कि कहीं उनके साथ सिर्फ #वोट_की_राजनीति तो नहीं हो रही।

14/02/2026

वर्षों तक देश में घूम-घूम,
भीम की प्रतिमा को चूम-चूम,

कर भीमटों को मजबूत प्रखर,
मोदीजी आए कुछ और निखर !

दुर्भाग्य ना सब दिन सोता है,
देखें स्वर्णों का क्या होता है?

मेरिट का स्कोप बढ़ाने को, सबको कटऑफ पार कराने को,

सवर्णों को धमकाने को, उन्हें यूजीसी की भेंट चढ़ाने को,

महामानव तीसरी बार सत्ता में आए, नीलमानवों का संदेशा लाए....

'दो न्याय अगर तो ज्यादा दो, मगर इसमें भी यदि बाधा हो,

तो दे दो अपनी बहू-बेटी तमाम, भाड़ में गया मान-सम्मान'

हम वही खुशी से भोगेंगे, देश में रहने से ना रोकेंगे....

सवर्ण वह भी दे ना सके, हिन्दू एकता बनाकर रख ना सके,

उल्टे महामानव को थामने चले, जो था असाध्य उसे साधने चले,

जब नाश सवर्ण पर छाता है, पहले भाजपाभक्त मर जाता है...

आईटी सेल ने भीषण हुँकार किया, अपना डिफेंस विस्तार किया

यह देखकर बामन-ठाकुर डोले, महामानव कुपित होकर बोले....

400 दिलाकर साध मुझे, हाँ, हाँ बहुमत दिलाकर बाँध मुझे !

~ रामधारी सिंह 'बिल्डर' की 'भीमरथी' के सौजन्य से

https://x.com/i/status/2022561033215488429

क्या UP Board की 10वीं/12वीं मार्कशीट या सर्टिफिकेट में नाम, जन्मतिथि, पिता/माता का नाम गलत है? अब घबराओ मत! छोटी-मोटी ग...
05/02/2026

क्या UP Board की 10वीं/12वीं मार्कशीट या सर्टिफिकेट में नाम, जन्मतिथि, पिता/माता का नाम गलत है?

अब घबराओ मत! छोटी-मोटी गलती से बड़ा नुकसान हो सकता है (जॉब, कॉलेज एडमिशन, पासपोर्ट में दिक्कत)। घर बैठे मोबाइल से Name/DOB Correction के लिए अप्लाई करो।

(UPMSP Samadhan Portal से आसान प्रोसेस) 👇

स्टेप-बाय-स्टेप गाइड (2026 अपडेटेड):

1. वेबसाइट पर जाएँ: Google में "upmsp samadhan portal" सर्च करें या डायरेक्ट लिंक: samadhan.upmsp.edu.in पर क्लिक करें।

2. रजिस्ट्रेशन/लॉगिन: Mobile No. और Email से Register करें (पहली बार)। Already registered? Login करें।

3. सेवा चुनें: लॉगिन के बाद "संशोधित अंक पत्र जारी करना" या "संशोधित प्रमाण-पत्र / जन्म तिथि में संशोधन" (Revised Marksheet / Certificate with Name/DOB Correction) वाला ऑप्शन चुनें।

4. डिटेल्स भरें: Class (High School/Intermediate), Roll Number, Passing Year, Name (जैसा अभी है), Father's Name, School Code आदि भरें। सुधार वाली डिटेल्स (नया नाम/DOB) स्पष्ट लिखें।

5. जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें:

° आधार कार्ड / Birth Certificate (सही नाम/DOB का प्रूफ)

° Affidavit (नोटरी से नाम बदलाव का)

° पुरानी मार्कशीट/सर्टिफिकेट की कॉपी

° Gazette Notification (अगर बड़ा नाम चेंज है, वैकल्पिक)

° स्कूल से साइन वाला आवेदन (अगर जरूरी)

6. फीस पेमेंट: फीस लगभग ₹500-₹1000 (सुधार के प्रकार पर, ऑनलाइन पेमेंट करें। नाम/माता-पिता नाम सुधार के लिए ₹1000 तक हो सकती है)।

7. सबमिट और ट्रैक: Application Submit करें। Registration ID नोट कर लें। "कार्यवाही की स्थिति" सेक्शन में स्टेटस चेक करें। अप्रूवल के बाद Revised Marksheet/Certificate पोस्ट से आएगा या ऑफिस से कलेक्ट कर सकते हैं (30 कार्य दिवस में)।

और जानकारी coment मे 👇

31/01/2026

माननीय मुख्य न्यायाधीश की सार्थक और उचित टिप्पणी।
👉🏽 जाति की पूरी व्यवस्था आपने ब्राह्मणों पर मढ़ कर समाज में नफरत घोल दी है।

👉🏽 क्या मुस्लिमों और ईसाई की जातियां भी ब्राह्मणों ने बनाई है?

👉🏽 अगर ब्राह्मणों की जातियों से इतनी दिक्कत है तो आज ही अपने नाम से जाती हटा लीजिये।

👉🏽 कौन आपको अपने नाम के आगे जाति लगाने के लिए विवश कर रहा है?

👉🏽 अगर एक समाज खुद को IAS, IPS, CJI, President, PM बनकर भी खुद को शोषित ही रखना चाहता है तो इसमें गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है।

30/01/2026

अगर आपको लगता है कि ,70 साल बाद भी दलित

शोषित और वंचित हैं,

तो इसका जिम्मेदार सरकार है

ना की स्वर्ण समाज।

Address

Chandauli
232104

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