Chamoli Garhwal

Chamoli Garhwal Chamoli district (Hindi: चमोली ज़िला) is the second largest district of Uttarakh The administrative headquarters of the district is Gopeshwar.
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Chamoli district (Hindi: चमोली ज़िला) is the second largest district of Uttarakhand state of India. It is bounded by the Tibet region to the north, and by the Uttarakhand districts of Pithoragarh and Bageshwar to the east, Almora to the south, Garhwal to the southwest, Rudraprayag to the west, and Uttarkashi to the northwest. Chamoli hosts a variety of destinations of pilgrim and tourists' interes

t. Badrinath, Hemkund Sahib, Valley of Flowers and Auli. Chamoli also happened to be a birthplace of "Chipko movement". Chamoli proved itself "the most spectacular in its natural assets; be it maintain scenery, valley aspects, water-edges, floristic varieties, dramatic landform or the climatic cardinalities".

30/05/2026

श्री केदारनाथ धाम यात्रा पैदल मार्ग : सरकार किस चीज का इंतजार कर रही है ?
2027 की तैयारी के चक्कर में श्रद्धालुओं की जान क्यूँ खतरे में डाल रहे हो !
https://uttaranchaltourism.org

28/05/2026

क्या ये लोग हिन्दू हैं ? सनातन धर्म का अपमान क्यूँ कर रहें हों भाई ?
आपको अपने बच्चों को इन प्रतिमाओं से पांडवों की कहानी सुनानी थी और आप बच्चों को यह करवा रहें हो ! अब यहाँ पर सरकार क्या करेगी ?
https://www.amazon.in/Generic-PRTER1232-Shri-Kedarnath-Prasad/dp/B0H1MF97MF

28/05/2026

आजकल एक मुद्दा काफी वायरल है के उत्तराखंड पहाड़ों पे घूमने ना जाओ कुछ दिन में वो लोग भूखे मरने लग जायेंगे... वहां के लोग हरियाणा वालों के साथ सही व्यवहार नहीं करते। पुलिस भी HR no की गाड़ी देखते ही उसका चालान बना देती है। ऐसे वैसे कई तरह की बातें बोली जा रही हैं।
ऐसा है साथियों मेरे हिसाब से कोई किसी के साथ गलत व्यवहार तभी करेगा जब आपकी हरकत गलत होगी। ना तो कोई क्यों करेगा रही बात चालान की तो वो तो बाहरी गाड़ी को देखकर पुलिस सबसे पहले रुकवाती है दिल्ली में जाकर देख लो बाहर की गाड़ियों को ज्यादा रुकवाते हैं।
आजकल क्या हो रहा है रोड थोड़े ठीक ठाक बन गए गाड़ी घोड़े लोगों के पास थोड़े बढ़ गए तो होता क्या है थोड़ी सी गर्मी हुई के नहीं चलो पहाड़ों पे घूम आया जाए। चार यार इक्कठे होते हैं बियर की पेटी डाली गाड़ी में और निकल लिए। अब पहाड़ों पे रोड की चौड़ाई तो लिमिटेड ही हो सकती है तो आए दिन सुनते हो कई कई घंटे जाम लग गया।
बाकी हमारे वालों के तो टशन ही निराले हैं इसमें पश्चिमी यूपी और दिल्ली वाले भी शामिल हैं। सब का नहीं कह रहा कई बंदे फोकरा पंथी ज्यादा करते हैं। थोड़ी सी अंदर गई नहीं के गाड़ी से कट मारना तेज चलाना तेज आवाज में म्यूजिक बजाना शोर गुल करना ये करते हैं आप लोग भी गए होंगे तो कई इस तरह के बंदे देखे भी होंगे। गंगा किनारे बैठ के हुक्का शराब के वीडियो आपने भी सोशल मीडिया पे देखे होंगे। तो भाई क्या ये हरकते सही हैं। मुझे लगता है इन लोगों को पहाड़ों की सुंदरता और शांति से कोई लेना देना नहीं होता इनको अपने स्वाद से मतलब है बाकी कोई परेशान हो तो हो। सोचो अगर आपके यहां कोई ऐसा करे तो क्या आप लोगों को गुस्सा नहीं आयेगा आप लोग सहन कर लोगे। नहीं यकीन हो रहा तो किसी दूसरे गांव में जाकर ऐसी हरकत करके देख लो गांव वाले आपका मोर ना बना दें तो कहना।
उत्तराखंड देवों की भूमि है और पहाड़ शांति वाली मनमोहक जगह होती है आप वहां जाइए आराम से पहाड़ों पे योग ध्यान लगाइए पक्षियों झरनों की आवाज सुनिए। आनंद की अनुभूति होगी और आपका वहां जाना सफल होगा।

अब रही बात उत्तराखंड वालों की के कुछ दिन आप वहां घूमने नहीं जायेंगे तो वहां के लोग भूखे मर जाएंगे तो ये ऐसे लोगों की गलत फ़हमी है कोई किसी के सहारे नहीं चल रहा वहां पे आधे से ज्यादा होटल तो बाहर वालों ने खोल रखे हैं। पहाड़ी आदमी बड़े ही शांत स्वभाव और कम खर्च में अपना जीवन यापन करना जानते हैं। वो पैसे की हाय तौबा में नहीं रहते। हां धीरे धीरे टूरिज्म बढ़ा तो समय के हिसाब से कुछ में पैसे कमाने की ललक जरूर बढ़ी होगी और वो लोग भी कुछ फ़ोकरे बंदों की हरकतों से परेशान होकर मारपीट वाली हरकतों पे उतर आए होंगे। बाकी उत्तराखंड वालों को भी ऐसे किसी हरकत को देखते हैं तो उसकी पुलिस कंप्लेन करें पुलिस को मामला हैंडल करने दे आप खुद क्यों हाथापाई करते हैं।

बाकी आप अपना व्यवहार हरकते ठीक रखिए घूमने के मकसद से वहां गए हैं घूमिए फिरए। आपको शराब हुक्के का सेवन भी करना है तो खुले में क्यों अपने होटल के रूम में जाकर करिए कौन आपको रोक रहा है। मगर नहीं आपको तो दिखाना है देखो जी हम आए हैं....
मुझे नहीं पता आप में से कितने लोग जानते हैं जब तक पहाड़ों में ज्यादा बाहरी लोग नहीं जाते थे तब तक वहां के घरों में ताले तक नहीं लगते थे। लेह लद्दाख के पहाड़ी इलाकों में तो आज भी घरों में ताले नहीं लगाते ये मैने खुद देखा है।
मैं तो कई बार उत्तराखंड हिमाचल गया हूं मेरे साथ तो कभी ऐसा कुछ नहीं हुआ। बाकी आप लोग अपनी भी राय दे आजकल जो चल रहा है 🤔
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत

16/05/2026

श्री केदार प्रसाद के लिए संपर्क करें
टीम उत्तरांचल टूरिज्म से : 8800867200
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