Sushil kumar Dimri

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Social Worker working for the upliftment of adolescents urban & rural poor. 25 Years of strong, decisive executive leadership in well known organisations. 38 years of contribution to the party honestly and by sincere services through election campaing etc

08/06/2023
21/06/2022
|| जय बद्री विशाल ||This year, today  5th June 2022  marks the 50th year of the World Environment Day.Time is running ou...
05/06/2022

|| जय बद्री विशाल ||
This year, today 5th June 2022 marks the 50th year of the World Environment Day.

Time is running out, and nature is in emergency mode. To keep global warming below 1.5°C this century, we must halve annual greenhouse gas emissions by 2030. Without action, exposure to air pollution beyond safe guidelines will increase by 50 per cent within the decade and plastic waste flowing into aquatic ecosystems will nearly triple by 2040.

“It is vital we safeguard the health of its atmosphere, the richness and diversity of life on Earth, its ecosystems, and its finite resources."

Lets do our bit to save our planet , Earth and support the World Environment Day 2022 and the campaign.

|| जय बद्री विशाल ||International Nurses Day is celebrated on Florence Nightingale's birth anniversary.Born on May 12, 1...
12/05/2022

|| जय बद्री विशाल ||

International Nurses Day is celebrated on Florence Nightingale's birth anniversary.
Born on May 12, 1820, Florence Nightingale was a British nurse and social reformer and is revered as “The Lady with the Lamp”. She is responsible for giving nursing a favorable reputation after tending to wounded soldiers.

I thank all nurses, for their dedication, and work, and appreciate their extraordinary contribution. They have been crucial COVID warriors, fighting at the forefront of the pandemic since 2020.
They are indispensable in safeguarding public health.

Happy Nurses Day to all the wonderful nurses of the world! The dedication you show towards your job is marvelous and praiseworthy.!

12/05/2022

|| जय बद्री विशाल ||

जिंदगी क्या है ........

-कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!

-पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी!

बार बार रफू करता रहता हूँ,.जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं...,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

-खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है।
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

-ना राज़ है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

-जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!

courtesy: गुलज़ार साहब

03/05/2022

Eid-ul-Fitr greetings to everyone. May everyone be filled with peace, love, joy, good health and prosperity .

|| जय बद्री विशाल ||हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है।धा...
03/05/2022

|| जय बद्री विशाल ||
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यता अनुसार अक्षय तृतीया के दिन त्रेता युग का आरंभ भी माना जाता है। कहते हैं, इस दिन किए गए कार्यों से अक्षयों फलों की प्राप्ति होती है। ‘न क्षय इति अक्षय’, यानि जिसका कभी क्षय न हो, वह अक्षय है।
इस अक्षत किया आपको कुछ विशेष शुभ योग देखने को मिलेंगे।

रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग से मंगल रोहिणी योग बन रहा है। इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में, शनि अपनी स्वराशि कुंभ में और बृहस्पति अपनी स्वराशि मीन में विराजमान होंगे। मंगलवार को तृतीया तिथि होने से सर्वसिद्धि योग बन रहा है।

शुभ मुहूर्त:
अक्षय तृतीया पर पूजा का मुहूर्त शुक्रवार, 3 मई 2022 प्रातः 5 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक।
तृतीया तिथि प्रारम्भ- 3 मई 2021 सुबह 5 बजकर 38 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्त: 4 मई प्रातः 7 बजकर 59 मिनट तक।

पूजा विधि

घर में ही गंगा का स्मरण कर स्नान करें, तो गंगा स्नान का हमें पूण्य लाभ मिलेगा। बस इस श्‍लोक का उच्चारण कर स्नान करें..
गंगेच यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन सन्निधि कुरु।।

इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी जी की मूर्ति को शुद्ध जल से स्नान कराएं रोली, कुमकुम अक्षत, पंचमेवा पंच मिठाई सफेद फूल अर्पित करें भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के मंत्रों
(ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः) का जाप करें। घी का दीपक जलाकर आरती करें।

अक्षय तृतीया का पर्व बेहद शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का बहुत महत्व है।

अक्षय तृतीया के दिन गौदान का संकल्प करें और जब संभव हो, तब गौदान करें। अक्षय तृतीया के अवसर पर वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है अन्न, वस्त्र, गाय को भोजन कराएं, जौ, तिल, भेंट व पित्रों की पसंदीदा वस्तुओं का दान कर सकते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन को अत्यंत शुभ मानने को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी हैं इस दिन के महत्व को और ज्यादा बढ़ा देती हैं। यहां हम अक्षय तृतीया से जुड़ी 5 कथाओं के बारे में जानेंगे-

भगवान परशुराम जन्मदिवस :

भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया को ही हुआ था। इसलिए इस दिन को परशुराम जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। परशुराम महर्षि जमदाग्नि और माता रेनुकादेवी के पुत्र थे। उन्होंने अपने पराक्रम के बल से 21 बार पृथ्वी को छत्रिय विहीन कर पृथ्वी को ब्राह्मणों को दान कर दी थी। यही वजह है कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन भगवान विष्‍णु की उपासना के साथ परशुराम जी की भी पूजा की जाती है।

ब्रह्मर्षि परशुराम के सामर्थ्य के लिए निम्नलिखित श्लोक रचा गया है:-

अग्रतः चतुरो वेदाः, पृष्ठतः सशरः धनुः।
इदं ब्राह्मः, इदं क्षात्रः, शास्त्रादपि शरादपि।।

अर्थात् परशुराम जी के समक्ष चारो वेदों का ज्ञान, पीठ पर वाणों से भरा तरकश विद्यमान था| ब्राह्म और क्षात्र गुण सम्पन्न यह ऋषि शास्त्र से या शस्त्र से हर हालत में विजय पाने में समर्थ थे| इन्होने स्वयं भगवान शंकर से शस्त्र की शिक्षा ली थी और शंकर ने उन्हें अपना एक धनुष उनकी वीरता से प्रसन्न होकर दिया था जिस पर बाण चढ़ाने वाले सिर्फ विष्णु या उनके अवतार ही हो सकते थे। इन्हीं गुणों के कारण इन्हें ब्रह्म क्षत्रिय भी कहते हैं।

देवी अन्नपूर्णा जयंती:

मान्यता है कि भंडार और रसोई की देवी माता अन्नपूर्णा का जन्म भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। अक्षय तृतीया को मां अन्नपूर्णा की भी पूजा की जाती है। मां अन्नपूर्णा के प्रसन्न हो जाने पर कभी भी अन्न के भंडार खाली नहीं रहते। यानी संपन्ना और खुशहाली रहती है।

सुदामा की कृष्ण से मुलाकात :

भगवान कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की कहानी तो जग में विख्यात है। कहा जाता है कि गरीब ब्राह्यमण सुदामा अक्षय तृतीया के दिन भगवान कृष्ण से मुलाकात करने गए थे। भगवान को सुदामा उपहार में सूखे चावल भेंट किए थे जिसके बदले भगवान कृष्ण ने उन्हें दो लोकों का स्वामी बना दिया था। मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु को चावल चढ़ाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

द्रौपदी का अक्षय पात्र:

पौराणिक कथाओं में जिक्र मिलता है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी को भगवान विष्णु की उपासना करने पर आज के दिन ही अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी। इस अक्षय पात्र का भोजन कभी घटता नहीं था।

गंगा का पृथ्वी पर अवतरण-

अक्षय तृतीया से पांचवी कथा है महाराज भगीरथ से प्रसन्न होकर मां गंगा की पृथ्वी पर अवतरण की। कहा जाता है कि हजारों की साल की तपस्या के बाद अक्षय तृतीया के दिन ही मां गंगा पृथ्वी पर आई थीं। महाराज भगीरथ भगवान राम और उनके पिता राजा दशरथ के पूर्वज थे।

अक्षय तृतीया का दिन विवाह, वाहन खरीदने और सोना आदि खरीदने के लिए बहुत ही शुभ माना गया है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु का विवाह इसी दिन हुआ था। यानी अक्षय तृतीया के दिन विवाह करने वाले दंपति माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की जोड़ी की तहर पूरे जीवन पर सुखी और प्रसन्न रहते हैं। अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है।

मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले दान का फल अक्षय होता है यानी कई जन्मों तक इसका लाभ मिलता है। अक्षय तृतीया पर दान करने वाले व्यक्ति को वैकुंठ धाम में जगह मिलती है, इसलिए इसे दान का महापर्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान करके जों एवं
गौ का दान अवश्य करना चाहिए, इससे मनुष्य के सभी पापा नाश हो जाते हैं। अक्षय तृतीया पर कलश का दान व पूजन अक्षय फल प्रदान करता है। इस जल से भरे कलश को मंदिर या किसी जरूरतमंद को दान करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही पितरों को भी अक्षय तृप्ति होती है और नवग्रह की शांति होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन श्रीरामचरित मानस का पाठ करना चाहिए। साथ ही आपको भगवान विष्णु के दसावतार की कथा का पाठ करना चाहिए। इनका पाठ करने पर आपको ऋषियों और महान संतों के दर्शन का फल मिलता है।

अक्षय तृतीया पर तुलसी की जड़ को दूध से सींचे। भगवान विष्णु की पूजा को तुलसी पत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। ऐसा करने पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पौराणिक कथायें ग्रुप एवं श्री गौरी गिरधर गौशाला की और से आप सभी को अक्षय तृतीया की बहुत बहुत बधाई। धन की देवी लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की आप और आप के परिवार पर कृपा बनी रहें। माता अन्नपूर्णा आपका घर धन धान्य से परिपूर्ण रखे।

|| जय बद्री विशाल ||वैशाख शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती के रूप में मनाई जाएगी। वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की ...
03/05/2022

|| जय बद्री विशाल ||

वैशाख शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती के रूप में मनाई जाएगी। वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की रात में पहले प्रहर में भगवान परशुराम का जन्म हुआ था इसलिए यह जयन्ती तृतीया तिथि के प्रथम प्रहर में मनाई जाती है। अक्षय तृतीया को जन्म होने के कारण परशुराम जी की शस्त्रशक्ति भी अक्षय है।

राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका और भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र, परशुराम जी भगवान विष्णु के अवतार है। परशुराम भगवान शिव के अनन्य भक्त है। वह एक परम ज्ञानी तथा महान योद्धा हैं इन्ही के जन्म दिवस को परशुराम जयंंती के रूप में संपूर्ण भारत में बहुत हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। परशुराम जी का जन्म इंदौर में जानापाव जगह पर हुआ था जहां आज भी लोग दर्शन करने जाते हैं।

श्री विष्णु के अवतार परशुराम जी का पूर्व नाम तो राम था परंतु उनको भगवान शिव से प्राप्त अमोघ दिव्य शस्त्र परशु को धारण करने के कारण यह परशुराम कहलाए। भगवान विष्णु के दस अवतारों में से यह छठे अवतार के रूप में अवतरित हुए थे।

परशुराम दो शब्दों से मिल कर बना है परशु और राम। इस की अच्छी और बुरी दोनों व्याख्या हैं शिव संहार के देवता हैं। परशु संहारक है क्योंकि परशु ‘शस्त्र’ है। राम प्रतीक हैं विष्णु के। परशु अर्थात पशु-शिव पशुपतिनाथ, शास्त्र, शस्त्र, फरसा फिर उसमें राम मिल जाएं तो फिर बात ही क्या

परशुराम ने पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करके समाज को दो बात बतानी चाही पहली तो यह की यदि अधर्म को और कोई समाप्त नहीं करेगा तो ब्राह्मण और बुद्ध पुरूषों को शस्त्र उठाना चाहिए अन्याय के खिलाफ दूसरी यह की ब्राह्मण का केवल पूजा ही धर्म नहीं है बल्कि अधर्म के खिलाफ लड़ना भी धर्म है। वह आधे क्षत्रिय और आधे ब्राह्मण रूप मेंं दिखाइ देने के कारण भी परशुराम कहलाए। परशुराम चिरंजीवी होने के कारण आज भी जीवित हैं।

|| जय बद्री विशाल ||हर साल 1 मई को, दुनिया अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाती है जिसे श्रमिकों की उपलब्धियों का जश्न मनाने ...
01/05/2022

|| जय बद्री विशाल ||

हर साल 1 मई को, दुनिया अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाती है जिसे श्रमिकों की उपलब्धियों का जश्न मनाने और श्रमिकों के प्रयासों और काम का प्रतीक होने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

यह दिन श्रमिकों के अधिकारों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी उपलब्धियों को पहचानने के लिए मनाया जाता है।

मजदूर दिवस की उत्पत्ति श्रमिक संघ आंदोलन में हुई है, विशेष रूप से आठ घंटे के दिन के आंदोलन में, जिसने काम के लिए आठ घंटे, मनोरंजन के लिए आठ घंटे और आराम के लिए आठ घंटे की वकालत की।

इस दिन को भारत में कामगार दिवस, कामगार दिन और अंतरराष्ट्रीय श्रमिक
दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के लिए, 1 मई का ऐतिहासिक महत्व है और इसे महाराष्ट्र दिवस और गुजरात दिवस के रूप में मनाया जाता है।

1960 में 1 मई को ही दोनों राज्‍यों की स्‍थापना हुई थी. पश्चिम भारत के गहने के रूप में पहचाना जाने वाला राज्‍य गुजरात और कारोबारी प्रदेश महाराष्‍ट्र 1960 से पहले बांबे स्‍टेट का हिस्‍सा थे. 1 मई, 1960 को आधिकारिक रूप से दोनों को बांबे स्‍टेट से विभाजित करके इनका गठन किया गया था.

गुजरात एवं महाराष्ट्र के स्थापना दिवस पर दोनों राज्यो के नागरिको को हार्दिक शुभकामनाये |

||Our planet is an amazing place, but it needs our help to thrive! That’s why each year on April 22, more than a billion...
22/04/2022

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Our planet is an amazing place, but it needs our help to thrive! That’s why each year on April 22, more than a billion people celebrate Earth Day to protect the planet from things like pollution and deforestation. By taking part in activities like picking up litter and planting trees and things given below , we’re protecting our planet and making our world a happier, healthier place to live :
BE A PLANET HERO!
• BECOME A WASTE WARRIOR
• CLEAN UP PLASTIC IN YOUR NEIGHBORHOOD OR LOCAL PARK
• USE WILDFLOWERS AND NATIVE PLANTS
• PLANT A TREE
• REDUCE, REUSE, RECYCLE IN THE GARDEN
• STOP PESTICIDES AND CHEMICALS IN THE GARDEN
• TURN OFF THE LIGHTS
• LIMIT YOUR WATER USAGE
• START A COLLECTION DRIVE FOR RECYCLABLE ITEMS
• BRING NATIVE BEES AND OTHER POLLINATING CREATURES TO YOUR GARDEN.
• PASS DOWN A LOVE OF NATURE AND PLANTS TO KIDS.

Earth Day is the day of celebration and making promise. Let's make it a happier, healthier and greener planet for generations to come.

|जय बद्री विशाल ||May the spirit of Self Confidence and Fight against oppression be with us in this Ambedkar Jayanti.Amb...
14/04/2022

|जय बद्री विशाल ||
May the spirit of Self Confidence and Fight against oppression be with us in this Ambedkar Jayanti.
Ambedkar Jayanti is celebrated every year on April 14 to mark the birth anniversary of BR Ambedkar. He is Father of the Indian Constitution. He was also a vociferous advocate of women’s rights and equality.
Besides being the first law minister of independent India, he was also a jurist, economist and social reformer, who inspired many with his progressive ideologies.

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