Saho, Chamba, Himachal Pradesh

Saho, Chamba, Himachal Pradesh Saho is a picturesque town/village in Chamba district, Himachal Pradesh, India, located about 18 km from Chamba town on the right bank of the Sal River.

It’s known for scenic beauty and the historic Chandrashekhar Shiva temple.

*माता चिन्तपूर्णी मंदिर*🛕 🚩👏हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है। सोला सिंगी धार पर्...
11/09/2026

*माता चिन्तपूर्णी मंदिर*🛕 🚩👏

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है। सोला सिंगी धार पर्वत श्रृंखला पर बसा यह मंदिर माता चिंतपूर्णी (देवी छिन्नमस्तिका) को समर्पित है। धार्मिक महत्व के अनुसार, यह पवित्र धाम हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

ऐसी मान्यता है कि यहाँ आने वाले भक्तों की सभी चिंताएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं, इसलिए माता को *'चिंता दूर करने वाली'* देवी के रूप में पूजा जाता है।

मणिमहेश यात्रा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित भगवान शिव के पवित्र धाम मणिमहेश (कैलाश) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क...
31/08/2026

मणिमहेश यात्रा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित भगवान शिव के पवित्र धाम मणिमहेश (कैलाश) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कठिन तीर्थयात्रा है।
​मुख्य बातें और रूट की जानकारी:
​दूरी और मुख्य पड़ाव: यह यात्रा मुख्य रूप से भरमौर से शुरू होती है। भरमौर से आगे हड़सर (Hadsar) तक वाहन जाते हैं, जहाँ से आगे की पैदल यात्रा शुरू होती है। हड़सर से आगे सुंदर व दुर्गम रास्तों से होते हुए धनछो (Dhanchho) पहला मुख्य ठहराव स्थल है। धनछो में रात्रि विश्राम और खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था मिलती है।
​गौरी कुंड और शिव के दर्शन: धनछो से आगे चढ़ाई चढ़ने पर गौरी कुंड आता है, जिसे माता पार्वती का स्नान स्थल माना जाता है। यहाँ महिलाएँ स्नान करती हैं। इसके बाद करीब और आगे चलने पर मणिमहेश झील और पवित्र मणिमहेश कैलाश चोटी के दर्शन होते हैं। झील के पास ही बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखला और भगवान शिव का शिवलिंग रूपी पत्थर स्थित है।
​यात्रा का मौसम और तैयारी:
​यह यात्रा अगस्त और सितंबर के महीनों में होती है जब मौसम साफ रहता है, लेकिन पहाड़ पर अचानक बारिश या ठंड बढ़ सकती है।
​यात्रा के लिए गर्म कपड़े, रेनकोट, मजबूत ट्रैकिंग जूते, और छड़ी (Walking Stick) ज़रूर साथ रखें।
​अधिक ऊँचाई (High Altitude) होने के कारण कई बार सांस लेने में दिक्कत या चक्कर आ सकते हैं, इसलिए रास्ते में पर्याप्त पानी और ग्लूकोज या ड्राई फ्रूट्स अपने पास रखें।
हर हर महादेव 🛕🚩👏

*चांजू की पवित्र खुंडी मराली डल झील में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूरों ने निभाई डल तोड़ने की परंपरा*चुराह,चम्बा। उपमंडल चुर...
19/08/2026

*चांजू की पवित्र खुंडी मराली डल झील में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूरों ने निभाई डल तोड़ने की परंपरा*

चुराह,चम्बा। उपमंडल चुराह के चांजू क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खुंडी मराली डल झील में मंगलवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ऐतिहासिक खुंडी मराली जातर के अवसर पर चुराह सहित चंबा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर पवित्र डल झील के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा खुंडी मराली क्षेत्र मां काली के जयकारों से गूंज उठा।

खुंडी मराली डल झील मां काली को समर्पित पवित्र धार्मिक स्थल है। यहां होने वाली जातर चुराह की प्राचीन देव परंपरा और लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

जातर की प्रमुख धार्मिक परंपरा के तहत मां काली के गूरों और चेलों ने विधि-विधान के साथ पवित्र डल तोड़ने की रस्म निभाई। डल तोड़ने की इस पारंपरिक रस्म के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और मां काली का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

*चांजू से 18 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर*

खुंडी मराली तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चांजू क्षेत्र से कई किलोमीटर का दुर्गम पैदल सफर तय करना पड़ता है। रास्ते में कठिन चढ़ाई, नदी-नालों और ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र को पार करना पड़ता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था उनके कदम नहीं रोक पाती और हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस धार्मिक यात्रा में शामिल होते हैं।

खुंडी मराली डल समुद्र तल से करीब 3750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बताई जाती है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरी यह झील धार्मिक आस्था के साथ-साथ चुराह की देव संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

*देव परंपरा का अनूठा संगम*

खुंडी मराली की जातर के दौरान स्थानीय देव परंपराओं के अनुसार विभिन्न धार्मिक रस्में निभाई जाती हैं। गूरों और चेलों की अगुवाई में होने वाली परंपराएं इस यात्रा को विशेष बनाती हैं। श्रद्धालु इन धार्मिक रस्मों के साक्षी बनने और मां काली का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।

*तीन देवियों के मिलन की भी है परंपरा*

खुंडी मराली की जातर के दौरान चांजू वाली काली माता और लिल्ह क्षेत्र से देवियों के चिह्न खुंडी माता के दरबार तक लाए जाने की परंपरा भी जुड़ी हुई है। श्रद्धालु इस पवित्र मिलन के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह यात्रा बेहद पवित्र मानी जाती है और श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति की आस्था के साथ जातर में शामिल होते हैं।

*आस्था के साथ प्राकृतिक सौंदर्य भी आकर्षण*

खुंडी मराली की यात्रा धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रखती है। ऊंचे पहाड़ों, हरे-भरे मैदानों, हिमखंडों और प्राकृतिक नजारों के बीच से होकर गुजरने वाला यह मार्ग श्रद्धालुओं को रोमांचित करता है। क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने और खुंडी मराली तक बेहतर रास्ता उपलब्ध करवाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

खुंडी मराली की जातर ने एक बार फिर चुराह की प्राचीन देव परंपरा, लोक संस्कृति और लोगों की अटूट आस्था को जीवंत कर दिया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हजारों श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना इस पवित्र स्थल के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है।
Pc @यज्ञदत शर्मा
जोगिन्द्र ठाकुर

ये तस्वीर खुण्डी माता डल यात्रा के दौरान आने वाले बर्फीले ग्लेशियर "चोहबू रा हेइंठ" की है। जिसके आगे का सफर , मान्यता  अ...
04/08/2026

ये तस्वीर खुण्डी माता डल यात्रा के दौरान आने वाले बर्फीले ग्लेशियर "चोहबू रा हेइंठ" की है।
जिसके आगे का सफर , मान्यता अनुसार चाँजू इलाके के भक्तजन नंगे पांव ही खुण्डी डल तक अपनी यात्रा पूरी करते हैं। अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार कई भक्तजन इस पूरी यात्रा को ही नंगे पांव ही तय करते हैं।
इस ग्लेशियर को भी लोग नंगे पांव ही पार करते है।
इस बार खुण्डी माता डल यात्रा अगस्त माह को होनी है।
नाले के दोनों ओर से रास्ता है इसलिए कुछ लोग पंक्ति के अलावा, ग्लेशियर पर नीचे से ऊपर की तरफ चढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
🚩जय माता दी🚩

18/02/2026

Bharmouri

17/02/2026
13/02/2026
चार धाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है, जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धा...
13/02/2026

चार धाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में से एक है, जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं। यह यात्रा हिमालय की गोद में आस्था, तपस्या और मोक्ष की भावना से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि चार धाम के दर्शन से जीवन के पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। 🙏 जय बद्री–केदार | जय चार धाम 🕉️

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