29/12/2024
सफलता की कहानी
केले का पौधा समृद्धि का प्रतीक है पूजा-पाठ में भी इस पौधें की अहम भूमिका है। यह बुरहानपुर जिले के विकास और खुशहाली की पहचान है। किसानों के साथ-साथ महिलाओं के जीवन में भी यह केले की फसल बदलाव ला रही है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की महत्वपूर्ण योजना एक जिला-एक उत्पाद लायी गई है। इसी के तहत बुरहानपुर जिले की मुख्य फसल केला को चयनित किया गया है।
मध्यप्रदेश राज्य सरकार, महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध है। महिलाओं को आर्थिक मजबूती एवं संबल देने के लिए अनेकों योजनायें धरातल पर अवतरित की गई है। आजीविका मिशन महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। छोटे-छोटे समूह के माध्यम से महिलायें अपने कौशल में निखार ला पा रही है।
वेस्ट से बेस्ट
नवाचारों की कोशिशों में जिला प्रशासन ने ‘‘वेस्ट से बेस्ट‘‘ बनाने का फार्मूला अपनाया। लेख है कि केला फसल का जिले में बम्पर उत्पादन होता है। केले के पौधें से फल निकालने के बाद बचे अवशेष को फेंकने की बजाय इसका बखूबी इस्तेमाल तरह-तरह के उत्पाद बनाने के लिए किया जा रहा है। इन उत्पादों को तैयार करने में जिले की समूह की महिलाओं की अग्रणी भूमिका है।
प्रशासन द्वारा विषय-विशेषज्ञों के अलावा अन्य राज्यों में भ्रमण कराकर एवं प्रशिक्षण से महिलाओं को केले के तने से रेशे निकालकर उत्पाद बनाने के तौर-तरीके बताये गये। इन तरीकों को अपनाकर महिलायें झूमर, टोकरी, टोपी, तोरण, पेन स्टैण्ड, फाइल फोल्डर, झाडू, चटाई, सजावटी सामान, की-रिंग, राखियाँ, पर्स, घड़िया इत्यादि उत्पाद बना रही है।
46,646 महिलायें जुड़ी है समूह से
आजीविका मिशन महिलाओं के जीवन में एक रोशनी की किरण है, जिसने उन्हें घर से बाहर निकलने की प्रेरणा दी है। अपने घरेलू दायित्वों के साथ-साथ महिलायें अब अपने परिवार के खर्चे में सहयोग दे पा रही है। यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि, जिले में महिला समूह आत्मनिर्भरता की ओर अपने कदम बढ़ा रही है। बुरहानपुर जिले में स्व सहायता समूह के 8 संकुल, 4,447 समूह एवं 46,646 महिलायें समूह से जुड़ी है।
मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक श्रीमती संतमति खलखो ने बताया कि, जिले में केले फाईबर से तैयार किये जा रहे उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है। यह उत्पाद आजीविका मेले में भी विक्रय किये जाते है।
परियोजना प्रबंधक श्रीमती खलखो ने जानकारी दी कि, अनुसुईया दीदी को आईआईटी इंदौर द्वारा 5 किलो केले के रेशे का आर्डर दिया गया था। जिसकी आपूर्ति के लिए समूह की दीदी इंदौर गई थी। वे अपने साथ केले के रेशे से बनी टोपी भी लेकर गई थी। इस दौरान आईआईटी इंदौर में प्रोजेक्ट के लिए आये साउथ अफ्रीका के व्यक्ति को यह टोपी बहुत पसंद आई और उन्होंने 10 टोपी का आर्डर भी दिया है।
CM Madhya Pradesh
Dr Mohan Yadav
Ministry of Rural Development, Government of India
Department of Horticulture, Madhya Pradesh
Department of Agriculture, Madhya Pradesh
Panchayat, Rural Development and Social Welfare Department of Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
Zila Panchayat Burhanpur
िला_एक_उत्पाद
#बुरहानपुर