Bundi Riyasat

Bundi Riyasat ●Glorious History of Bundi & Hadauti
●City of Stepwells ● Vintage Bundi
●Hada Chauhan Dynasty ● Invincible Hadendra

फूलसागर पैलेस का प्रवेश द्वार वर्तमान स्थिति व 1970 के दशक में।
30/04/2026

फूलसागर पैलेस का प्रवेश द्वार
वर्तमान स्थिति व 1970 के दशक में।

Brigadier Bhupesh Singh, Shaurya Chakra, Vishisht Sewa Medal, Parakram Medal....The warrior who wrote his history in the...
28/04/2026

Brigadier Bhupesh Singh, Shaurya Chakra, Vishisht Sewa Medal, Parakram Medal....

The warrior who wrote his history in the Indian Army with his Blood.

राजतंत्र में टैक्स लेना गलत था, परन्तु लोकतंत्र में खाद्य पदार्थो, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर भी टैक्स ...
27/04/2026

राजतंत्र में टैक्स लेना गलत था, परन्तु लोकतंत्र में खाद्य पदार्थो, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर भी टैक्स लिया जाना जायज़ है, इसी टैक्स से देश चलता है।

राजतंत्र में राजा गरीबों का खून चूसकर महल बनवाते थे, लेकिन लोकतंत्र में सरकारी कार्यालयों, आवासों, चुनावी प्रचार में जनता का लाखों करोड़ों रुपया लगाना सही है।

राजतंत्र में राजा सन्धियाँ कर लेते थे, लोकतंत्र में युद्ध विराम व सन्धियाँ होना जायज़ है, सन्धियाँ न होंगी तो देश उन्नति कैसे करेगा?

राजतंत्र में जातिगत भेदभाव थे, लोकतंत्र में जाति के आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है व जाति के आधार पर न्याय में भेदभाव होना जायज़ है।

राजतंत्र में बहुत अन्याय होते थे, लोकतंत्र में एक आम आदमी का केस दशकों तक चल सकता है और किसी निर्दोष व्यक्ति को 40 वर्ष कैद में रखने के बाद बाइज़्ज़त बरी किया जा सकता है इसमें कोई अन्याय नहीं है, न्याय के बदले आम आदमी का हज़ारों लाखों रुपया व्यय करना जायज़ है।

राजतंत्र में राजा आपस में बहुत लड़ते थे, लोकतंत्र में हर दूसरे घर में जमीनी विवाद होना स्वाभाविक है।

राजतंत्र में शिकार बहुत ज्यादा होते थे, लेकिन लोकतंत्र में भारत ने बीफ एक्सपोर्ट में समस्त विश्व में झंडे लहराकर एक नया कीर्तिमान रचा है।
जिस गोवंश कि रक्षा के लिए राजाओं ने शीश कटाए।

राजतंत्र में विकास नहीं होते थे, वे तो मात्र विशाल झीलें, कुएं, बावड़ियां बनवाते थे, जबकि लोकतंत्र में इन्हीं झीलों को प्रदूषित करके व अरावली जैसी पर्वत श्रृंखलाओं का विध्वंस करके विकास की एक नई परिभाषा रची जा रही है।

बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी राठौड़ और बून्दी के महाराव राजा रघुवीर सिंह जी हाडा।बलहठ बंका देवड़ा, करतब बंका गौड़।हाडा त...
25/04/2026

बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी राठौड़ और बून्दी के महाराव राजा रघुवीर सिंह जी हाडा।

बलहठ बंका देवड़ा, करतब बंका गौड़।
हाडा तो गाढ़ा घणा, रणबंका राठौड़।।

अर्थात बल और हठ में देवड़ा चौहानों का कोई सानी नही है, कर्तव्य निर्वहन में गोड़ राजपूत श्रेष्ठ है।
हाडा चौहान अपने गाढ़ के लिए जाने जाते है। एकबार अड़ गए तो गाडा हट जाए पर हाडा नही हटते, यदि रण में उतर गए तो विजय या वीरगति को ही आलिंगन करते है।
वहीं रण में राठौड़ो का कोई सानी नही है।

जब बून्दी पर सन 1730 में जयपुर के कठपुतली शासक दलेल सिंह हाडा का शासन स्थापित हुआ तब दलेल सिंह के भाई प्रताप सिंह ने मल्...
24/04/2026

जब बून्दी पर सन 1730 में जयपुर के कठपुतली शासक दलेल सिंह हाडा का शासन स्थापित हुआ तब दलेल सिंह के भाई प्रताप सिंह ने मल्हार राव होल्कर को 6 लाख रूपये देकर बून्दी नरेश बुद्ध सिंह जी कि सहायता के लिए आमंत्रित किया था। बुद्ध सिंह के देहांत के पश्चात मल्हारराव कि सहायता से तत्कालीन बून्दी नरेश उम्मेद सिंह जी ने बून्दी पर अपना अधिपत्य स्थापित किया।

जिसके लिए निम्न कहावत है -
सिंहा सिर नीचा करया, जद गाडर करी गलार।
अधिपतियां सिर ओढ़णी, राखी सिर माथे फाग मल्हार।।

सवाई जय सिंह कि वृहत जयपुर (बून्दी व कोटा रियासतों को मिलाकर) बनाने की कुटिल राजनीती के कारण रियासतों के आंतरिक मामलो में मराठा हस्तक्षेप हुआ।

बून्दी और राजस्थान का 19 वीं सदी का इतिहास मराठा लूटपाट से भरा हुआ है।

मराठाओ से निरंतर युद्ध व लूटपाट से प्रजा त्रस्त हो चुकी थी। जिस जसवंत राव होल्कर के पिता को बून्दी नरेश मामा कहकर पुकारते थे उस जसवंत राव के साथ सिंधिया व पिण्डारियों ने बून्दी को तबाह कर दिया।
जसवंतराव होल्कर केशवराय जी महाराज कि एक आँख निकालकर ले गया क्योंकि वह काना था अतः उसे भगवान 2आँखों के साथ अच्छे नही लगे।
राज्यों की संचित आय समाप्त हो रही थी, बून्दी राज्य कि आय 10लाख से घटकर 3लाख ही रह गयी। अंततः प्रजा की खुशहाली व राज्य हित में बून्दी सहित राजपुताना के शासको को अंग्रेजो से सैन्य संधिया करनी पड़ी।

स्त्रोत :-
वंश प्रकाश,
राजपूताने का इतिहास (जगदिश सिंह गहलोत )

चित्र - उम्मेद चित्रशाला में स्थित भित्ति चित्र, जिसमे मल्हारराव होल्कर व महाराव राजा बुद्ध सिंह जी वार्तालाप कर रहे है।
इसे Ai द्वारा रिस्टोर किया गया है।

हरिसिंहोत हाड़ाओ के वंशधर महाराज हरी सिंह जी ने बुरहानपुर में शाहजहाँ को बंदी बनाया तथा उससे चिलमे भरवाई थी।जब शाहजहाँ सत...
22/04/2026

हरिसिंहोत हाड़ाओ के वंशधर महाराज हरी सिंह जी ने बुरहानपुर में शाहजहाँ को बंदी बनाया तथा उससे चिलमे भरवाई थी।

जब शाहजहाँ सत्ता में आया तो खानजहाँ लोदी से परेशान हो गया था अतः उससे लड़ने के लिए बून्दी की सेना गयी। जिसमे हरी सिंह जी के पराक्रम से खानजहाँ लोदी बुरी तरह परास्त हुआ ।
हरी सिंह जी ने शाहजहाँ से हुक्के भरवाए थे परन्तु लड़ने का शौक था इसलिए लड़ने गए और जीत कर लौटे ।

शाहजहाँ ने हरी सिंह जी को गुगोर की जागीर सहित 7 परगने दिए। जागीर का पट्टा लेने हरी सिंह जी को जाना था परन्तु नही गए।

उनका कहना था कि इस तुरकड़े कि दी हुई जागीर मुझे नही चाहिए।
अतः वे बून्दी से मिली पीपल्दा कि जागीर में ही रहे।

जब हरी सिंह जी नही गए तो ये 7 परगने कोटा के माधो सिंह जी को दिए गए।

क्या धैर्य और इच्छाशक्ति होगी उस शासक कि-जिनके अधिकांश सामन्त उनका साथ छोड़ गए हो, भाई विरुद्ध हो गया हो, बून्दी के महलों...
20/04/2026

क्या धैर्य और इच्छाशक्ति होगी उस शासक कि-

जिनके अधिकांश सामन्त उनका साथ छोड़ गए हो, भाई विरुद्ध हो गया हो, बून्दी के महलों के स्वामी को जंगलो में जीवन निकालना पड़ रहा हो। बिना आर्थिक सहायता के सन 1730 से 1750 तक 20 वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, परन्तु हाडा उम्मेद सिंह कर्तव्य पथ से हटे नही।

मराठाओ से सहायता लेकर निरंतर एक के बाद एक युद्ध लड़ते है, परन्तु वह हठी उम्मेद सिंह अपने दृढ संकल्प से विचलित नही हुए।
इस कहावत को चरितार्थ करते हुए कि - गाडा टले, पर हाडा ना टले।।
बून्दी जीतनी ही है, बून्दी से दलेल सिंह का कठपुतली शासन समाप्त करना है।

अंततः बून्दी पर अपनी विजय पताका फहरा कर ही दम लेते है।
चैन से बैठकर शासन भी नही करते व सन्यास ग्रहण कर लेते है। शिकार बुर्ज को अपनी सन्यास स्थली बनाते है और तीर्थ यात्राओं में अपना लगभग 30 वर्षों का शेष जीवन निकाल देते है।

न संघर्ष से घबराये, न विजय से मोहित हुए और जब बून्दी पर विजय मिली तो सन्यास ग्रहण कर अपने पुत्र को गादी पर बिठाकर अपना पिंडदान कर दिया।
अपनी इन्द्रियों पर विजय पाने के कारण उन्हें "श्रीजित" कि उपाधी प्राप्त हुई।
धन्य है ऐसे महापुरुष!
श्री जी हुजूर महाराव राजा उम्मेद सिंह साहब को बारम्बार नमन 🙏

18/04/2026

हाडा चौहान राजवंश कि कुलदेवी माँ आशापुरा के बारे में पंक्तिया -

माँ आशापुरा के जयकारों से, सारा अंबर दहाड़ उठा।
हाड़ाओ कि खड़ग कटारो से, जब नरमुंडो का सैलाब उठा।।

युद्ध के दौरान बून्दी नरेश का हुंजा घोड़ा वीरगति को प्राप्त हो गया था। महाराव राजा उम्मेद सिंह जी, बून्दी राज्य कि जागीर ...
18/04/2026

युद्ध के दौरान बून्दी नरेश का हुंजा घोड़ा वीरगति को प्राप्त हो गया था।
महाराव राजा उम्मेद सिंह जी, बून्दी राज्य कि जागीर इंद्रगढ कि सीमा में थे अतः उन्होंने इंद्रगढ़ के देव सिंह से घोड़े मांगे तो देव सिंह ने यह कहते हुए उन्हें अपनी सीमा से बाहर निकलने को कहा कि अपनी जागीर तो खो दी है अब हमारी भी गंवाना चाहते हो।

ऐसे कठिन समय में जब अपने सामन्त साथ नही दे रहे थे, बड़ाखेड़ा ठिकाने के माजी साहब ने अपने ठिकाने के ज़ेवर प्रदान किये और घोड़ो के होज उम्मेद सिंह जी के लिए खोल दिए तथा 8वर्ष के भारत सिंह जी, उम्मेद सिंह जी कि रक्षार्थ भेज दिए।
जेवरात और घोड़ो से उम्मेद सिंह को सैन्य सहायता प्रदान हुई। यह उसी प्रकार कि सहायता थी जो भामाशाह ने महाराणा प्रताप को दी थी।
बड़ाखेड़ा के जागीरदार उम्मेद सिंह जी कि रक्षार्थ हरदम साथ रहते थे।
जब बून्दी पर विजय प्राप्त हुई तो बड़ाखेड़ा को विशेष ख़िताब मिले सबसे बढ़कर वह अमर स्वामिभक्ति बड़ाखेड़ा के साथ थी जो उन्होंने कठिन समय में दिखाई।

नकली गढ़ दीधो नही, बिना घोर घमसाण।सिर टूट्या बिन किम फिरे, असली गढ़ पर आण।।- अथार्त बून्दी के जिन हाडा राजपूतों ने नकली कि...
17/04/2026

नकली गढ़ दीधो नही, बिना घोर घमसाण।
सिर टूट्या बिन किम फिरे, असली गढ़ पर आण।।

- अथार्त बून्दी के जिन हाडा राजपूतों ने नकली किला बिना घमासान युद्ध के नही दिया था, उन हाड़ाओ से उनके सिर कटे बिना असली किला जीत पाना असम्भव है।

फोटो - नकली बून्दी के किले की रक्षा हेतु अकेले ही मेवाड़ की सेना से घमासान युद्ध करने वाले वीरवर कुम्भा हाडा।

हिण्डोली में स्थित बून्दी के सातवें शासक राव सुभाण्डदेव तथा उनके भाई सोंडदेव जी की छतरियाँ-राव सुभाण्डदेव, बून्दी और कोट...
17/04/2026

हिण्डोली में स्थित बून्दी के सातवें शासक राव सुभाण्डदेव तथा उनके भाई सोंडदेव जी की छतरियाँ-

राव सुभाण्डदेव, बून्दी और कोटा—दोनों राजपरिवारों के पूर्वज थे।

इतिहास:-
बून्दी इतिहास के अनुसार, बून्दी के छठे शासक राव वेरीशाल सिंह जी मांडू के सुल्तान बाजबहादुर से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। इसके पश्चात सुल्तान ने यहाँ के दो राजकुमारों—श्याम सिंह और अमर सिंह—का बाल्यावस्था में अपहरण कर उन्हें मांडू ले गया तथा उन्हें इस्लाम धर्म ग्रहण करवाकर उनके नाम क्रमशः समरकंदी और अमरकंदी रख दिए।
कुछ समय पश्चात मांडू के शासक ने 60,000 सैनिकों की सेना भेजकर बून्दी पर अधिकार कर लिया और समरकंदी एवं अमरकंदी को वहाँ नियुक्त कर दिया। राव सुभाण्डदेव को दबलाना की जागीर सहित 12 गाँव प्रदान किए गए।

इसी दौरान समरकंदी और अमरकंदी ने राव सुभाण्डदेव की हत्या के लिए षड्यंत्रपूर्वक उन्हें हिण्डोली में भोज हेतु आमंत्रित किया। सामन्तों के मना करने के बावजूद राव सुभाण्डदेव और उनके भाई सोंडदेव वहाँ गए।

छलपूर्वक, समरकंदी के संकेत पर बहराम खान और कुतुब खान ने दोनों भाइयों के शीश धड़ से अलग कर दिए। किंवदंती के अनुसार, उनके धड़ बिना सिर के ही अपने शत्रु सैनिकों से युद्ध करते हुए 36 शत्रुओं का संहार करते हुए पहाड़ी के नीचे तक पहुँच गए।

इस युद्ध में शत्रु पक्ष के 36 तथा बून्दी पक्ष के 17 योद्धाओं ने वीरगति प्राप्त की। सूर्यमल्ल मिश्रण कृत वंश भास्कर के अनुसार, संवत 1544 (1487 ईस्वी) में दोनों भ्राताओं ने वीरगति प्राप्त की।

इस प्रसंग पर महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने यह दोहा लिखा—
“बिन माथे भाड़े दला, पोढ़े कर्ज उतार।
तिण सूराँ रो नाम ले, भड़ बांधे तलवार।। ”
अर्थात, जिन शूरवीरों ने बिना सिर के भी शत्रुओं का संहार कर मातृभूमि का ऋण चुकाया और देवलोक गमन किया, उन वीरों का नाम लेकर बून्दी के योद्धा तलवार धारण करते हैं।

बून्दी के पराक्रमी शासक राव सुभाण्डदेव और उनके भाई सोंडदेव की छतरियाँ हिण्डोली में ही निर्मित की गईं। इनके साथ वीरगति को प्राप्त अन्य योद्धाओं की देवलियाँ भी वहाँ स्थित हैं।
कुछ वर्षों पश्चात उनके पराक्रमी पुत्र राव नारायणदास ने पुनः हाड़ाओं की शक्ति को संगठित कर समरकंदी और अमरकंदी का वध कर बून्दी पर अपना आधिपत्य स्थापित किया तथा राज्य की सीमाओं का विस्तार किया। राव नारायणदास ने राणा सांगा के साथ मिलकर इब्राहिम लोदी और बाबर की सेनाओं के विरुद्ध भी युद्ध किए।

16/04/2026

The history of Bundi is made of Blood.

"By the sword they won their Land, And by the sword they hold it still."

-WALTER SCOTT-The Lay of the Last Minstrel.

Address

तारागढ़ बूंदी
Bundi
323001

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