Th. Dhagariya-PratapGarh

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 #सत्य_परेशान_हो_सकता_है_पराजित_नहीं✌️
15/11/2024

#सत्य_परेशान_हो_सकता_है_पराजित_नहीं✌️

27/08/2024
     👑हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगाकाल के कपाल पर लिखता मिटाता हूंगीत नया गाता हूं।
12/05/2024



👑
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं।

समाज के भामाशाह आदरणीय महिपत सिंह हाड़ा बून्दी, जो की समाज के लिए हमेशा तत्पर रहते है।समाज को जब भी जरूरत पड़ी तो वह हमेश...
07/05/2024

समाज के भामाशाह आदरणीय महिपत सिंह हाड़ा बून्दी, जो की समाज के लिए हमेशा तत्पर रहते है।
समाज को जब भी जरूरत पड़ी तो वह हमेशा आगे रहे है जो हर साल राजपूत समाज की कन्या का निःशुल्क विवाह करना व कन्या छात्रावास के लिए बून्दी में करोड़ो की जमीन निःशुल्क समाज को देना ऐसे कही नेक कार्य किये आज हमारे ऐसे भामाशाह को राजनीतिक दबाव के कारण उन पर जबरन झूठे मुकदमे लगाना और उनकी छवि को खराब करना उस को राजपूत समाज बिल्कुल भी बर्दास्त नही करेगा । पूरा हाड़ौती का राजपूत समाज उनके साथ खड़ा है अगर जरूरत पड़ी तो संपूर्ण राजपूत समाज सड़को पर उतरकर इस कृत्य के खिलाफ प्रदर्शन करेगा

धन्यवाद🙏

03/12/2023

बूंदी विधानसभा की तीनों सीटो से भाजपा का सूपड़ा साफ।

साथ ही चुने गए सभी उम्मीदवारो को हार्दिक बधाई।।
Ashok Chandna CL Premi

क्या इसमे पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष हाड़ा साहब का भाजपा का समर्थन ना करना ओर भाजपा द्वारा उनका अवहेलना करना एक बड़ा कारण रहा??

यहां पुरानी कहावत सही बैठती है "हाड़ो ले डुबयो गणगौर(भाजपा)"।।

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ!
19/09/2023

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ!

अधिक से अधिक संख्या में पधारे!
21/05/2023

अधिक से अधिक संख्या में पधारे!

 #ढ़गारिया_जाग़ीर के #संस्थापक_कुँवर_रणछोड़_सिंह_हाड़ा, ढ़गारिया #सुपुत्र_महाराजा_साहब_इन्द्रसाल_सिंह_हाड़ा, इन्द्रगढ़
14/11/2022

#ढ़गारिया_जाग़ीर के
#संस्थापक_कुँवर_रणछोड़_सिंह_हाड़ा, ढ़गारिया
#सुपुत्र_महाराजा_साहब_इन्द्रसाल_सिंह_हाड़ा, इन्द्रगढ़

कोटरियात- कोटरियात शब्द कोटरी का बहुवचन है।जिसका अर्थ है कोटरियो का समूह।राज्यों से विशेष अधिकार प्राप्त जागीरों को कोटर...
14/11/2022

कोटरियात- कोटरियात शब्द कोटरी का बहुवचन है।जिसका अर्थ है कोटरियो का समूह।
राज्यों से विशेष अधिकार प्राप्त जागीरों को कोटरी कहा जाता था इनके अधिकार अन्य जागीरो से अधिक होते थे इन्हें अलग राजचिन्ह,न्याय,सेना,पुलिस,वन,आबकारी के अधिकार प्राप्त थे।

कोटरियात- इन्द्रगढ़,खातोली,बलवन,आन्तरदा,ढिपरी,पुसोद,पीपल्दा,करवाड़,गैंता,फलोदी,करवर,आवा दूनी आदि।

जब रावराजा सुर्जन हाड़ा ने रणथम्भौर पर अधिकार किया तब यह क्षेत्र बून्दी के अधिकार में आया।
1569 में अकबर से संधि दौरान रणथम्भौर दुर्ग अकबर को दे दिया गया। बाद में राव राजा रतन सिंह जी ने जहांगीर से रणथम्भौर के क्षेत्र में से भी अपने पुत्रों को जागीरें दिलवाई।

इस क्षेत्र की आय से ही रणथंभौर दुर्ग की मरम्मत व अन्य कार्य सम्पन्न होते थे।पूर्व में ये राज्य रणथम्भौर के किलेदार को खिराज देते थे।

1736ई के बाद इस क्षेत्र पर मराठों की लूट बढ़ने लगी। राजपूताना में प्रवेश करते समय व लौटते समय दोहरी लूटपाट।

सभी कोटरियातो के शासकों ने बून्दी नरेश उम्मेद सिंह जी से सहायता मांगी परन्तु परिस्थितिवश वे मदद करने में असमर्थ थे।
फिर किलेदार (मुगल) से सहायता मांगी तो बादशाह अहमदशाह ने रणथम्भौर पूर्ण रूप से 1748 में जयपुर नरेश माधो सिंह को दे दिया।

माधो सिंह जी भी इन राज्यो से खिराज की मांग करने लगे जो पहले किलेदार को दिया जाता था।पहले तो सभी जयपुर के सैनिकों को भगा दिया करते थे।
बाद में जयपुर ने इस क्षेत्र पर चढ़ाई कर दी

तब यहाँ के राजाओं ने कोटा से सहायता मांगी व सैन्य सन्धि की ,कि दोनों पक्ष एक दूसरे युद्धों में सैन्य सहायता देंगे।
1761 में भटवाड़ा के मैदान में जयपुर vs कोटा+ कोटरियात की सेनाओं के मध्य युद्ध हुआ।
इस युद्ध मे जयपुर की सेना को बुरी तरह परास्त होकर भागना पड़ा।
अपने झंडे ,निशान भी छोड़ने पड़े।
1761 से 1782 तक जयपुर ने इस क्षेत्र पर लगातार आक्रमण किये परन्तु हर बार उन्हें परास्त कर दिया गया।

1754 से 1817 तक इन राज्यो ने किसी भी राज्य को खिराज नही दिया व स्वतंत्र शासन किया।

1817 में कोटा दीवान झाला जालिम सिंह ने 1758 के समझौते का उल्लंघन करते हुए कूटनीति पूर्वक अंग्रेजों से सन्धि कर इन्हें कोटा के साथ सम्बद्ध कर दिया।

बून्दी नरेश विष्णु सिंह जी व कोटरियातो के राजाओं ने अपना दावा प्रस्तुत किया परन्तु कोई हल नही निकला। कर्नल टॉड ने अपनी पुस्तक में इस घटना की निंदा की है।

अब ये कोटरियाते अपना खिराज ब्रिटिश सरकार के पास देवली में जमा करवाने लगे।इन्हें महाराजा के स्थान पर कोटरी सरदार कहा जाने लगा जबकि खुद बादशाह ने इन्हें महाराजा की पदवी प्रदान की थी ।इनके राज्य का दर्जा घटाकर कोटरी(पिंसिपेलिटी) कर दिया गया।
परन्तु ये राज्य स्वयं को स्वतंत्र ही मानते थे।

इन्द्रगढ़ व बलवन के महाराजाओ को कोटरी सरदार कहने से चिढ़ थी अतः उनका कोटा से व्यवहार खराब होने लगा था तब महाराव उम्मेद सिंह द्वितीय ने उनसे सम्बन्ध मधुर बनाये व महाराजा से सम्बोधित करने लगे।

इन्द्रगढ़,खातोली,बलवन,आन्तरदा का बून्दी में आना जाना अधिक रहता था जबकि पीपल्दा,करवाड़,गेता,पुसोद के सरदारों का कोटा में आगमन अधिक था।

कोटा व बून्दी के साथ कोटरियातो के राजाओं के सम्बंध एक से थे।हर उत्सव में इन्हें आमंत्रित किया जाता था।

Happy birthday 🎈 Bhanwar Keshav Singh
05/11/2022

Happy birthday 🎈
Bhanwar Keshav Singh

राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर महा. गजराज सिंह जी हाड़ा को हार्दिक शुभकामनाएं ।हम सभी आपके उज्जवल भविष्य की कामना करत...
01/11/2022

राजकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर महा. गजराज सिंह जी हाड़ा को हार्दिक शुभकामनाएं ।
हम सभी आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते है।

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