Johar Pahuna Foundation

Johar Pahuna Foundation "Empowering rural India, one life at a time. Join us in our mission

Johar Pahuna Foundation is a non-profit organization dedicated to providing quality education, healthcare, and livelihood opportunities to marginalized communities in rural India.

22/03/2026

जोहार पहुना फाउंडेशन द्वारा मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर क्षेत्र में आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपरा को सहेजने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है। 🌿
पारंपरिक गहने और आभूषण, जो आज विलुप्त होने की कगार पर हैं, उन्हें संरक्षित और संवर्धित करने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह पहल न केवल सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का प्रयास है, बल्कि स्थानीय आजीविका को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक कदम है।
आज हमारे इस प्रयास में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से आए विदेशी पर्यटकों ने भी सहभागिता निभाई, जो इस पहल की वैश्विक सराहना को दर्शाता है। 🙏
वीडियो में देखें यह प्रेरणादायक पहल।
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20/03/2026

*गौरैया दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🐦🌿*

*आइए, हम सब मिलकर इस नन्ही चिड़िया की रक्षा और संरक्षण का संकल्प लें।*

*Johar Pahuna Foundation के साथ प्रकृति और जैव विविधता को बचाने की इस मुहिम में जुड़ें।*

JoharPahunaFoundation SaveBirds EcoFriendly GoGreen Chhattisgarh

A proud moment for organization —its Director Kishanlal Puri has set a new benchmark through innovation.                ...
19/03/2026

A proud moment for organization —its Director Kishanlal Puri has set a new benchmark through innovation.




CM Madhya Pradesh Madhya Pradesh Tourism Collector Balaghat Startup India PMO India Kishan

18/03/2026

जोहार पहुना फाउंडेशन के साथ…
हम ला रहे हैं परंपरा और प्रकृति का संगम 🌿
मिट्टी के घर केवल एक घर नहीं,
बल्कि ठंडक, सुकून और हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं।
छपाई मिट्टी से बने ये घर पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ जीवन का संदेश देते हैं।
आओ, अपनी जड़ों की ओर लौटें 🌏
– जोहार पहुना फाउंडेशन
हैशटैग: #जोहारपहुना #मिट्टीकेघर GreenVillage TraditionalHomes MudHouse DesiLife AatmanirbharBharat TribalLifestyle VillageDevelopment NatureConnect LocalToGlobal ChhattisgarhCulture 🌱

15/03/2026

*छत्तीसगढ़ में हाथियों की सुरक्षा को लेकर चल रहे अभियानों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।*

*मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले 6 वर्षों में 70 हाथियों की मौत हुई है, जिनमें से लगभग 30 हाथियों की मौत करंट लगने से हुई।* यह स्थिति केवल वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को ही नहीं दिखाती, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष और असुरक्षित बिजली लाइनों जैसी समस्याओं को भी उजागर करती है।
हाथी केवल एक वन्य जीव नहीं, बल्कि हमारे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। उनकी लगातार हो रही मौतें बताती हैं कि ज़मीनी स्तर पर संरक्षण उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

*जरूरत है कि*
• जंगल क्षेत्रों में बिजली लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो
• मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाए
• संरक्षण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो
जोहार पहुना फाउंडेशन भी जंगल, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।

*👉 आप भी जुड़ें – जोहार पहुना फाउंडेशन के जागरूकता कार्यक्रम से और प्रकृति व वन्यजीवों की रक्षा के इस अभियान का हिस्सा बनें।*

वन और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

12/03/2026

रात में चमकने वाला पेड़
वीडियो- दंतेवाड़ा जिला प्रशासन द्वारा।

On the occasion of International Women’s Day, women from the Baiga tribe have taken a pledge to strengthen their livelih...
08/03/2026

On the occasion of International Women’s Day, women from the Baiga tribe have taken a pledge to strengthen their livelihoods by connecting them with their traditional knowledge and culture. By making tribal jewellery and traditional handicrafts, they are taking strong steps toward becoming self-reliant.
This initiative will not only improve their economic condition but will also play an important role in preserving their rich tribal culture and identity.
This effort is also supported by Johar Pahuna Foundation, which is helping Baiga women gain better livelihood opportunities through skill development and community support.





SelfReliance
JoharPahunaFoundation
VocalForLocal
AatmanirbharWomen

02/03/2026

होली की शुभकामनाएं और बधाई

02/03/2026
बैगा महिलाओं की पारंपरिक कला को मिल रही नई पहचान ..कान्हा नेशनल पार्क के आसपास निवासरत विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की महिला...
25/02/2026

बैगा महिलाओं की पारंपरिक कला को मिल रही नई पहचान ..

कान्हा नेशनल पार्क के आसपास निवासरत विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की महिला स्व-सहायता समूहों को पारंपरिक ट्राइबल ज्वैलरी निर्माण के माध्यम से आजीविका से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया जा रहा है। इस पहल में जोहार पहुना फाउंडेशन का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है, जो स्थानीय महिलाओं को कौशल विकास एवं स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

आज महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित पारंपरिक आभूषणों को विदेशी पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों द्वारा उत्साहपूर्वक खरीदा गया। यह उनके लिए गर्व और सम्मान का क्षण रहा, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उनकी पारंपरिक कला को नई पहचान मिली।

यह पहल न केवल बैगा महिलाओं की आजीविका को सशक्त बना रही है, बल्कि उनकी समृद्ध संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

✨ स्थानीय कला – स्थानीय आजीविका – आत्मनिर्भर समुदाय ✨

VocalForLocal

20/02/2026

मेरा गहना मेरी पहचान, Mera Gahna Meri Pahchaan Johar Pahuna Foundation

🌿✨ परंपरा से आजीविका तक – कान्हा क्षेत्र की बैगा महिलाओं की आत्मनिर्भरता की सशक्त कहानी ✨🌿भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल...
19/02/2026

🌿✨ परंपरा से आजीविका तक – कान्हा क्षेत्र की बैगा महिलाओं की आत्मनिर्भरता की सशक्त कहानी ✨🌿
भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल इतिहास की पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी हमारे आदिवासी समाज की जीवनशैली, कला और परंपराओं में जीवित है। लगभग 5000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी कारीगरी परंपरा की उसी सतत धारा को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक आभूषण निर्माण प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।
📍 स्थान – कान्हा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र
📍 पंचायत – समनापुर
📍 ग्राम – बैगाटोला
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 से अधिक बैगा जनजाति की महिलाएं सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। यह प्रशिक्षण उनके लिए केवल हुनर सीखने का अवसर नहीं, बल्कि सम्मानजनक और टिकाऊ आजीविका की दिशा में एक मजबूत कदम है।
प्रशिक्षण के अंतर्गत महिलाओं को प्राकृतिक एवं पारंपरिक सामग्रियों से आभूषण बनाने का व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है। इसमें मिट्टी, टेराकोटा, लकड़ी, बाँस, बीज, सूखे फल, कौड़ी, घोंघे के खोल, पत्थर, मोती, मनके, रंगीन धागे, सूत, तांबा–पीतल जैसे धातु तत्व तथा प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पारंपरिक आभूषण तैयार करना सिखाया जा रहा है।
महिलाएं अपने हाथों से मांग टीका, झुमके, हार, कंगन, कमरबंध एवं बालों के पारंपरिक आभूषण बनाना सीख रही हैं—जो आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और प्रतीकों से गहराई से जुड़े हुए हैं। ये आभूषण स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ शहरी बाजारों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।
कान्हा क्षेत्र की बैगा महिलाएं सदियों से जंगल, प्रकृति और परंपरा के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन यापन करती आई हैं। आज जब पारंपरिक आजीविका के साधन सीमित होते जा रहे हैं, तब इस प्रकार के कौशल-आधारित प्रशिक्षण उनके लिए आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का आधार बन रहे हैं।
यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि—
🌱 आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण,
💪 महिला सशक्तिकरण,
🤝 स्थानीय संसाधनों का सम्मान,
🎨 हुनर को बाजार और पहचान,
और 💼 सामुदायिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक समग्र प्रयास है।
जब बैगाटोला की एक बैगा महिला अपने हाथों से आभूषण गढ़ती है, तो वह केवल एक उत्पाद नहीं बनाती—वह अपनी पहचान, परंपरा और भविष्य को आकार देती है।
📿 परंपरा बचेगी, हुनर निखरेगा और बैगा महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी—यही इस प्रशिक्षण की असली सफलता है।

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