Khangarots of Rajputana - History "खंगारोत ऑफ राजपुताना - हिस्ट्री"

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Khangarots of Rajputana - History "खंगारोत ऑफ राजपुताना - हिस्ट्री" This page is all about the khangarot clan of kachwaha dynasty, which was the most important clan of Jaipur state with most No. Of Tajmi Thikanas in Jaipur

Thirty Decisive Battles Of Jaipur (Book)By Rao Bahadur Rawal Narendra Singh Ji Jobner Is again Relaunched by Rawal Sangr...
13/08/2022

Thirty Decisive Battles Of Jaipur (Book)
By Rao Bahadur Rawal Narendra Singh Ji Jobner
Is again Relaunched by Rawal Sangram Singh Ji Jobner on 13th August 2022
Book is available on Flipkart and Amazon.

जयपुर के तीस निर्णायक युद्ध (पुस्तक)
राव बहादुर रावल नरेंद्र सिंह जी जोबनेर द्वारा 1939 में लिखी गयी।
आज 13 अगस्त 2022 को रावल संग्राम सिंह जी जोबनेर द्वारा फिर से लॉन्च कि गयी है।
किताब फ्लिपकार्ट और ऐमज़ान पर उपलब्ध है।

राम नवमी की हार्दिक शुभकामनायें! 🙏🙏
21/04/2021

राम नवमी की हार्दिक शुभकामनायें! 🙏🙏

महाराव खंगार जी :  ( जयंती विशेषांक - चैत्र बदी अष्ठमी , संवत् 1581 )497 वीं जयंती पर कोटिश: नमन !आमेर के कछवाहों राजपूत...
05/04/2021

महाराव खंगार जी : ( जयंती विशेषांक - चैत्र बदी अष्ठमी , संवत् 1581 )

497 वीं जयंती पर कोटिश: नमन !

आमेर के कछवाहों राजपूतों की खंगारोत शाखा के प्रवर्तक राव खंगार जी जगमाल जी कच्छवाहा के ज्येष्ठ पुत्र और आमेर नरेश राजा पृथ्वीराज सिंह जी ( राणा सांगा के साथ खानवा युद्ध में भाग लेने वाले ) के पौत्र थे जो संवत् 1632 में नारायणा की गद्दी पर बैठे।

राव खंगार बहुत वीर और पराक्रमी हुए। इनका जीवन निरंतर युद्धों व संघर्षों में बीता। अकबर के गुजरात अभियान से लेकर इब्राहिम हुसैन की बगावत को रौंदने और हल्दीघाटी युद्ध में अहम भूमिका निभाने तक इनका सफर काफी कठिनाइयों से भरा रहा।

हल्दीघाटी युद्ध में भूमिका ( 1576 ):

In 1576 Prince Khangar ( RAO KHANGAR JI ) was sent with Man Singh of Amer against Maharana Pratap. Rao Bagha, a popular poet has said -

*कलहणि करिथाट कलल उकलतै सिखर पाव सजिसार।*
*वोवड़ि राणा प्रताप ऊपरा, खीमियो खांडा धार खंगार ।।1*

*ऊतर अकल अचल घण उरड, हूंकल कल बिजूजल हाम।*
*माथै लोह निहसी मेवाड़ै , बूठौ जगड़ तणौ वीरयाम।।2*

*किरमिर सैन कूंतत कलपूरा, मेह छेह अरि ऊर सिरमौर।*
*कलहणि रहवि किया नछवा है, खल डल पल चीखल खमणौर ।।3*

Rao khangar was counted among the prominent mansabdars during Akbar's reign.
He played a prominent role in the battle of Haldighati ( 1576 ) with Mansingh of Amer , Raja Jagannath Khangarot of Toda Bhim and Madhav Singh ( brother of Man singh ) against Maharana Pratap. He helped the Mughal army to gain victory over the powerful ruler of Mewar. It is said that Maharana Pratap came within attacking distance of Rao Khangar and Raja Jagannath But as the proverb goes blood being thicker than water, they did not take him. they allowed him to escape to Gogunda under the protection of Rana Bida of Badi Sadri ( Delwara
Thus they helped the Maharana to save his life.

When Akbar came to know of this he reduced the Mansabs Bhagwandas and his son Man Singh considerably. They were also asked not to enter the the Mughal court for some time.

अकबर के शासनकाल के दौरान राव खंगार जी की गणना प्रमुख मनसबदारों में की जाती थी । उन्होंने अकबर की शाही सेना में रहते हुए गुजरात अभियान , कांगड़ा अभियान में शौर्य का प्रदर्शन किया। साथ ही इब्राहिम हुसैन के दिल्ली आक्रमण को निष्फल कर दिया ।

राजपूताना के प्रसिद्ध युद्ध हल्दीघाटी युद्ध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आमेर के मानसिंह, टोडा भीम के राजा जगन्नाथ खंगारोत और माधव सिंह (मान सिंह के भाई) के साथ महाराणा प्रताप के खिलाफ हल्दीघाटी (1576) की लड़ाई में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने मेवाड़ के शक्तिशाली शासक पर विजय पाने के लिए भरसक प्रयास किया ।

ऐसा कहा जाता है कि युद्ध के दौरान एक घड़ी महाराणा प्रताप राव खंगार और राजा जगन्नाथ पर हमला करने काफी नजदीक आ गए थे, लेकिन जैसा कि कहावत है कि - पानी की तुलना में खून गाढ़ा होता है, उन्होंने राणा प्रताप पर हमला नहीं किया। महाराणा प्रताप इस समय काफी घायल अवस्था में थे इसलिए उन्होंने उनको युद्ध स्थल से बाहर निकलते समय उनका पीछा नहीं किया। बल्कि उन्होंने उन्हें बड़ी सादड़ी (देलवाड़ा) के राणा बीदा के संरक्षण में गोगुन्दा की पहाड़ियों की और निकलने दिया। इस प्रकार महाराणा जी का जीवन बचाने में महत्त्वपूर्ण फ़र्ज़ अदा किया और मेवाड़ी सूर्य को बुझने नहीं दिया ।

जब अकबर को इस घटना का पता चला तो उसने भगवानदास और उनके पुत्र मान सिंह का मनसब कम कर दिया और कुछ समय के लिए मुगल दरबार में प्रवेश न करने के लिए कह उन पर प्रतिबंध लगा दिया।

Compilation : Bh. Devendra Singh Rahlana ( Member Of Khangana Sangh )

Sources :
1. The Jaipur album | Jagirs and Jagirdars, page 34

2. Rawal Narendra Singh | Thirty decisive battles of Jaipur, page 4-10

3. Thikana records Jobner by Rawal Narendra Singh ji

4 ( i )Akbarnama by H. Beveridge Vol - III, Page 274 - 275

( ii ) . OJHA G.S.| Udaipur Rajya ka itihaas Vol. -I page - 447

Today 30th November is the Birth Anniversary of one of the prominent Thakur of Jobner. Successor of late Rao Bahadur Raw...
30/11/2020

Today 30th November is the Birth Anniversary of one of the prominent Thakur of Jobner.
Successor of late Rao Bahadur Rawal Narendra Singh ji as his adopted son.
Late Rawal Ajit Singh Ji Khangarot (Jobner)
30/11/1933
Sadar Naman 🙏🙏

आज 30 नवंबर को जोबनेर के प्रमुख ठाकुरो में से एक की जयंती है।
स्वर्गीय राव बहादुर रावल नरेन्द्र सिंह जी के उत्तराधिकारी उनके दत्तक पुत्र के रूप में।
स्वर्गीय रावल अजीत सिंह जी खंगारोत (जोबनेर)
30/11/1933
नमन पेज ऐड्मिन द्वारा ओर खंगाणा संघ द्वारा 🙏🙏🙏

स्व. ठा. शिवनाथ सिंह जी खंगारोत ठिकाना - दुदु जयपुर के खंगारोत राजपूतों के 22 ताज़मी ठिकानो में से एक दूदू है।खंगारौतों ...
24/11/2020

स्व. ठा. शिवनाथ सिंह जी खंगारोत
ठिकाना - दुदु
जयपुर के खंगारोत राजपूतों के 22 ताज़मी ठिकानो में से एक दूदू है।
खंगारौतों के कुछ हाथी बन्ध ठिकानो में दुदु भी एक हाथी बन्ध ठिकाना है।

Late Thakur Shivnath Singh Ji Khangarot
Thikana - Dudu
Dudu is one among the 22 tazmi thikanas of khangarot rajputs of Jaipur.
Dudu is also one among the few hathi bandh thikanas of khangarots.

Late Thakur Bheru Singh Ji Khangarot Tazmi Sardar of Jaipur State (Bhakarsinghot) Thikana - Marwaस्व. ठा. भेरू सिंह जी ख...
10/11/2020

Late Thakur Bheru Singh Ji Khangarot
Tazmi Sardar of Jaipur State
(Bhakarsinghot)
Thikana - Marwa
स्व. ठा. भेरू सिंह जी खंगारोत
ताज़मी सरदार जयपुर स्टेट।
ठि. मरवा।
🚩

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Late Thakur Sher Singh Ji Khangarot Tazmi Sardar of Jaipur State (Bhakarsinghot) Thikana - Tordiस्व. ठा. शेर सिंह जी खंग...
07/11/2020

Late Thakur Sher Singh Ji Khangarot
Tazmi Sardar of Jaipur State
(Bhakarsinghot)
Thikana - Tordi
स्व. ठा. शेर सिंह जी खंगारोत
ताज़मी सरदार जयपुर स्टेट।
ठि. टोरडी।


Late Thakur Sangram Singh Ji Khangarot Tazmi Sardar of Jaipur State (Bhakarsinghot) Thikana - Diggi स्व. ठा. संग्राम सिं...
05/11/2020

Late Thakur Sangram Singh Ji Khangarot
Tazmi Sardar of Jaipur State
(Bhakarsinghot)
Thikana - Diggi
स्व. ठा. संग्राम सिंह जी खंगारोत
ताज़मी सरदार जयपुर स्टेट।
ठि. डिग्गी।
Diggi is one among the Tazmi Thikanas of Khangarots. In some historical books it is claimed that Diggi is main seat of Khangarot Kachwaha Rajputs, which is completely wrong. Diggi was never the main seat of Khangarots it was Naraina. Diggi was ruled by descendants of Bhakar Singh ji who was son of Maha Rao Khangar and who got Gaddi of Sakhun Akoda. His son Rao Dwarka Das Ji Khangarot later got Diggi.

डिग्गी खंगारोतों के ताज़मी ठिकानो में से एक है। कुछ ऐतिहासिक पुस्तकों में यह दावा किया गया है कि डिग्गी खंगारोत कछवाहा राजपूतों की मुख्य सीट है, जो पूरी तरह से गलत है। डिग्गी कभी भी खंगारोतो की मुख्य सीट नहीं थी, वह नरैना थी। राव भाकरसिंह जी के वंशजों का डिग्गी में शासन था, भाकरसिंह जी जो महा राव खंगार के पुत्र थे और जिन्हें साख़ून आकोदा की गद्दी मिली थी। उनके पुत्र राव द्वारका दास जी खंगारोत को बाद में डिग्गी मिली।

#खंगारोत

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राव बहादुर रावल नरेन्द्र सिंह जी खंगारोत जोबनेर। (इतिहास रतन)उनकी 127 वीं जयंती पर जोबनेर के महान शासक को याद करते हुए(य...
27/10/2020

राव बहादुर रावल नरेन्द्र सिंह जी खंगारोत जोबनेर। (इतिहास रतन)
उनकी 127 वीं जयंती पर जोबनेर के महान शासक को याद करते हुए

(यदि राजस्थान के सभी सामंती राजा रावल नरेन्द्र सिंह साहब की तरह होते, तो सामंती व्यवस्था के उन्मूलन की कोई आवश्यकता नहीं होती)
वनस्थली में डॉ। राजेंद्र प्रसाद ने कहा।

शिक्षा प्रेमी व दानवीर ठाकुर साहब रावल नरेंद्र सिंह जी खंगारोत का जन्म 27 अक्टूबर 1893 दीपावली पर्व पर हुआ था।

जीवन संग्राम के हर क्षेत्र कि यह अजय सेनानी 27 जनवरी 1967 को अपना पार्थिव शरीर त्याग कर स्वर्गवासी हो गए।

सभी की नीति रावल साहब जैसी होती तो प्रजा राजा भोज के समय को याद नहीं करती। धन्य है, ऐसे भामाशाह, दूरदृष्टा व सच्चे शिक्षा प्रेमी को सत सत नमन 🙏


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रावल नरेंद्र सिंह जी खंगारोत वर्ष 1922 में जयपुर रियासत के किलेजात ऑफिसर नियुक्त हुए।

वह वर्ष 1922 में ही जयपुर महाराजा मानसिंह जी के अभिभावक नियुक्त हुए तथा 3 मार्च 1923 को राजपूताना के महकमा काश के सदस्य नियुक्त हुए।

जयपुर महाराजा ने उनके कार्य से प्रभावित होकर इन को 1925 में राव बहादुर के खिताब से सम्मानित किया।

1926 में नरेंद्र सिंह जी जयपुर रियासत में शिक्षा मंत्री के पद पर आसीन हुए।

शिक्षा मंत्री पद के पद पर आसीन होकर अपने ज्ञान का दीपक प्रज्वलित किया तथा अधिक से अधिक विद्यालय गांव में स्थापित करने पर जोर दिया। रावल नरेंद्र सिंह जी खंगारोत ने निरंतर 18 वर्ष तक शिक्षा की सेवा की जो सेवा सदैव अमर रहेगी। वर्ष 1942 में रावल साहब को जयगढ़ किले का किलेदार नियुक्त किया गया।

वर्ष 1944 में इन्होंने इंटर कॉलेज की स्थापना की उनके अथक प्रयास से जोबनेर में जुलाई 1947 में राजस्थान के प्रथम कृषि महाविद्यालय की स्थापना हुई। उन्होंने अपने स्वयं के खर्चे से 1947 से लेकर 1956 तक कृषि महाविद्यालय को चलाया इस हेतु रावल नरेंद्र सिंह जी खंगारोत ने 750 हेक्टेयर जमीन दान दी।
रावल नरेंद्र सिंह जी खंगारोत 1957 में दूदू क्षेत्र से विधायक चुने गए तथा विपक्ष के उपनेता पद पर आसीन हुए। आप 1957 में राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य भी रहे।
आप संपूर्ण अस्तित्व ज्वाला मैया के परम भक्त थे। रावल नरेंद्र सिंह जी खंगारोत एक न्याय प्रिय शासक, जनसेवी, शिक्षाविद, प्रख्यात इतिहासकार, अच्छे कवि और लेखक भी थे।
डिंगल भाषा में आपकी स्फुट रचनाऐ समय-समय पर प्रकाशित होती रहती थी। इनके द्वारा प्रकाशित रचनाओं में वीर पूजा सतसई, क्षत्रिय गौरव गरिमा इत्यादि प्रमुख है।


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