04/09/2026
श्री कृष्ण जन्माष्टमी और पर्यावरण संरक्षण के महान प्रणेता, बिश्नोई पंथ के संस्थापक गुरु जम्भेश्वर भगवान (जाम्भो जी) के पावन अवतरण दिवस की आप सभी को अनंत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी का यह परम पवित्र दिन हम सभी के लिए दोहरी आध्यात्मिक खुशी और गहन आत्म-चिंतन का एक अद्भुत अवसर लेकर आता है। एक ओर जहाँ संपूर्ण विश्व सृष्टि के पालनहार, योगेश्वर श्री कृष्ण का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाता है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति से अगाध प्रेम और जीव दया का शाश्वत संदेश देने वाले हमारे आराध्य गुरु जाम्भो जी का भी आज ही के दिन पीपासर की पावन मरुधरा पर अवतरण हुआ था। यह मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि परमात्मा की एक विशेष व्यवस्था है जहाँ धर्म की स्थापना और प्रकृति के संरक्षण का संदेश एक ही शुभ तिथि पर प्रवाहित हुआ।
जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता के माध्यम से मानवता को निष्काम कर्म और धर्म का मार्ग दिखाया, ठीक उसी प्रकार गुरु जाम्भो जी ने अपने २९ नियमों के माध्यम से हमें प्रकृति के साथ पूर्ण तालमेल बिठाकर एक आदर्श, सात्विक और संयमित जीवन जीने की जीवन-दृष्टि प्रदान की। हरे वृक्षों की प्राण-पण से रक्षा करना और मूक वन्य जीवों के प्रति असीम करुणा का भाव रखना, उनके द्वारा दी गई शब्दवाणी और शिक्षाओं का मूल सार है। आज जब संपूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और गंभीर पर्यावरण संकट से जूझ रहा है, तब गुरु जाम्भो जी की दूरदर्शी शिक्षाएं संपूर्ण मानवता के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक के रूप में और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं।
"सिर सांटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण" की हमारी वह गौरवशाली परंपरा हमें निरंतर यह याद दिलाती है कि प्रकृति का संरक्षण ही हमारे अस्तित्व और भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है। गुरु जाम्भो जी ने सदियों पहले यह भांप लिया था कि मनुष्य और प्रकृति का सह-अस्तित्व ही इस ब्रह्मांड का संतुलन बनाए रख सकता है।
आइए, इस पुनीत और मंगलकारी अवसर पर हम सब मिलकर हृदय से यह संकल्प लें कि भगवान श्री कृष्ण के सत्य एवं कर्म योग के सिद्धांत और गुरु जाम्भो जी के पर्यावरण संरक्षण के अमर संदेश को अपने दैनिक जीवन और आचरण में पूर्णतः उतारेंगे। हम सब अधिक से अधिक पेड़ लगाने, वन्य जीवों की निस्वार्थ भाव से रक्षा करने और एक स्वस्थ, हरित एवं शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देने का दृढ़ प्रण लें। हमें यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि प्रकृति की निस्वार्थ सेवा ही परमात्मा की सबसे सच्ची और श्रेष्ठ सेवा है।
आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और प्रकृति का आशीर्वाद सदैव बना रहे। जय श्री कृष्ण! जय गुरु जम्भेश्वर!🙏🙏🎂🌹💐।