06/04/2020
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बिजयनगर में 35,000 लोगों की जांच, सिर्फ 200 को साधारण सर्दी,जुकाम, बाकी 34,800 के शरीर में कढ़ी-कचोरी, कलाकंद, आलू-बड़ा और गुलाबजामुन की कमी पाई गई, चिकित्सा विभाग में हड़कम्प, विधायक को बुलानी पड़ी आपातकालीन मीटिंग 😜😁🤣
वैसे तो बिजयनगर के चटोरो को कढ़ी-कचौरी खाने का कोई reason नहीं चाहिए होता पर lockdown के चलते सभी बिजयनगर वासियों को यह नसीब नहीं हो पा रहा और उसी के साथ craving बड़ी ज़बर्दस्त हो रही होगी!
कढ़ी के साथ पालक वाले पकौड़ा, कचौड़ी, समोसा, कोफता खाने का स्वाद लाजवाब होता है। मिर्चीबड़ा, दही बड़ा, दाल-पकवान, छोले-भटूरे, चने के साथ आलू की टिक्किया खाने के लिए जी ललचा जाता है। पता नहीं, #बिजयनगर के हवा पानी की तासीर में कुछ ऐसी विशेषता है कि चाट खाने का आनंद आ जाता है।
पिपली चौराहा, रेलवे फाटक, सथाना बाजार यहां तक कि बिजयनगर के सभी बाजारों में चाट-पकौड़ा की दुकानें जरूर मिलेगी। #पीपली चौराहा में #ओम चाट भंडार और #अग्रवाल के यहां मनपसंद नाश्ता करने का अवसर कौन छोड़कर जायेगा। #सब्ज़ी मंडी में मशहूर दुकानें हैं जहां हर समय खाने के शौकीन लोगों की भीड़ लगी रहती है।
आलू प्याज की #कचौड़ी धनिया पत्ती की चटनी के साथ लेकिन मूंग मोगर दाल की कचौड़ी स्वाद कढ़ी के साथ निराला होता है।
अरोड़ा जी का खमण ढोकला जब जीरा, चाट मसाला और चटनी के साथ सामने परोसा जाता है तो दूसरी बार फिर खाने का मन हो जाता है।
मिर्चीबड़ा या कोफता दही या पोदीना चटनी के साथ खाने में स्वादिष्ट जायकेदार लगता है। वैसे ही खाओ तो और ज्यादा अच्छा लगता है।
दाल पकवान सिर्फ समाज के कारीगरों का कमाल है। पकवान के ऊपर मोगर चने की मिक्स दाल, बारीक कटा हुआ प्याज, लाल मिर्च पाउडर की चटनी तली हुई हरी मिर्च, गरम मसाला के साथ खाने का टेस्ट मजेदार होता है। यह भी सब्ज़ी मंडी में अरोड़ा जी के लाजवाब मिलता है , और सथाना बाजार में भी।
बहुत सालों से सथाना बाजार में लगने वाली चौपाटी में तिवाड़ी जी के ठेले पर आलू की टिक्किया छोला चटनी खाने का स्वाद पूरे देश में घूमने के बाद भी कहीं नहीं मिला। और शर्मा जी की नवरत्न टिकिया के तो कहने ही क्या
पांच बत्ती के नुक्कड़ पर दोपहर को बद्री जी गोपाल जी तिवाड़ी की आलू टिकिया का ठेला दस बजे तक सारा माल खत्म करने के बाद वापस लौट आता है । हर रोज़ मिलने वाली इस चाट का एक ही स्वाद एक ही रंग होता था और कोई फर्क नहीं।
आजकल सथाना बाजार में अग्रवाल जी का फ़ूड कार्नर भी बहुत फेमस हो रहा है ।
और रेलवे फाटक पर मिलने वाले कचोरे का स्वाद तो नसीराबाद के कचोरे को भी फेल कर देता है ।
कालूराम बस्तीराम की दही कचोरी और बर्फ कलाकंद तो मुंह मे पानी ला ही देता है , साथ ही विश्वप्रसिद्ध गुलाबजामुन तो मुंह मे जाते ही घुल जाते हैं।
बजरंगी चौराहे पर और स्टेशन के बाहर मिलने वाले
आलू के कोफ्ते शाम का एक परफेक्ट स्नैक होता है , 7 बजे तक समापन समारोह हो जाता है ।
दिन में दो-तीन बार ऐसा नाश्ता करने के बाद दिन का खाना नहीं खा पाता हूँ और यहां तक कि शाम को अगर खा लिया तो रात को हल्का-फुल्का डिनर करने पर मजबूर हो जाता हूँ। क्या करूँ, चाट खाने की बचपन की आदत हैऔर चटोरापन छूटता नहीं है। जो खाने के शौकीन होते हैं वो तो खायेंगे ही।🤤😬👌🙆♂️
#कढ़ीकचोरी #कचौरा , #गुलाबजामुन, #दालपकवान
#कलाकंद #दहीकचोरी #आलूबड़ा