31/05/2026
"आख़िर तुम तो बस एक कांस्टेबल ही हो..." — यही वो शब्द थे, जो उदय कृष्णा रेड्डी की ज़िंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गए।
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम ज़िले के छोटे से गांव उल्लिपालेम में पले-बढ़े उदय कृष्णा रेड्डी ने 2012 में बतौर कांस्टेबल पुलिस में नौकरी शुरू की। लेकिन 2018 में, जब एक सीनियर अफसर ने उन्हें सबके सामने अपमानित किया, तो उन्होंने उसी दिन अपनी वर्दी उतार दी — और UPSC की तैयारी में लग गए।
बचपन में माता-पिता का साया खो दिया, दादी की छाया में पले, सरकारी तेलुगु मीडियम स्कूल से पढ़ाई की। आर्थिक और शैक्षणिक संघर्षों के बावजूद उनका सपना था — IAS बनना और सिस्टम का हिस्सा बनकर उसे बेहतर बनाना।
एक वक्त था जब उनके अफसर ने उनकी पढ़ाई का मज़ाक उड़ाया, ड्यूटी का बहाना बनाकर उन्हें परेशान किया, और काबिलियत पर सवाल उठाए। लेकिन रेड्डी ने हार नहीं मानी — बल्कि उसी अपमान को अपना ईंधन बना लिया।
उन्होंने 6 साल तक मेहनत की, चार बार UPSC की परीक्षा दी और पहली बार इंटरव्यू तक पहुंचे हालांकि वे दो बार प्रीलिम्स में असफल रहे लेकिन आखिरकार 2023 में चौथे प्रयास में UPSC CSE में उन्होंने 780वीं रैंक हासिल की। लेकिन दिल में IPS पहनने का सपना ज़िंदा रहा। प्रशिक्षण के दौरान फिर से परीक्षा दी और इस बार 2024 में सीधे 350वीं रैंक हासिल की!
वे कहते हैं, “मैंने पढ़ाई के घंटे नहीं गिने — मैंने गुणवत्ता पर ध्यान दिया। रोज़ जिम जाता था, अपने तीन बिल्लियों के साथ समय बिताता था — ताकि शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन बना रहे।”
अब उदयकृष्णा '109' नाम से पशु बचाव के लिए एक राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू करना चाहते हैं।
ये सिर्फ एक कांस्टेबल की सफलता नहीं — ये उस हर इंसान की जीत है जो हालातों से नहीं, अपने हौसले से चलता है।