27/05/2026
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग, मध्यप्रदेश शासन के तत्वावधान में आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में एसडीएम और तहसीलदार स्तर के मैदानी राजस्व अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देवस्थान प्रशासन, देवस्थान भूमि प्रबंधन, लोक न्यास प्रबंधन तथा विभागीय योजनाओं से संबंधित विषयों पर विस्तृत सत्र संचालित किए गए।
कार्यशाला का उद्घाटन श्री शिव शेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, सामान्य प्रशासन एवं संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय सभ्यता में देवस्थानों की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल से पूर्व के भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि में देवस्थानों का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने देवस्थानों के प्रभावी प्रशासन को भारत के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उद्घाटन सत्र में श्री मुजीबुर्रहमान खान, संचालक, आरसीवीपी नरोन्हा अकादमी; प्रशिक्षण संचालक डॉ. ममता खेड़े; संयुक्त संचालक धर्मस्व डॉ. पी.एस. मालवीय; उपसंचालक धर्मस्व श्री श्रेयस गोखले; डॉ. राजेश श्रीवास्तव मुख्य कार्यपालन अधिकारी म.प्र. तीर्थस्थान मेला प्राधिकरण उपस्थित रहे। मंच संचालन श्रीमती रूबी यादव, अधीक्षक धर्मस्व द्वारा किया गया।
व्याख्यान सत्र में श्री अजय शर्मा, भा.प्र.से. (सेनि.) ने लोक न्यास अधिनियम 1951 पर; श्री रूपेश उपाध्याय, अपर कलेक्टर श्योपुर ने देवस्थान भूमि प्रबंधन पर; श्री एच.एस. चुंडावत, पूर्व माफी अधिकारी उज्जैन संभाग ने देवस्थान प्रशासन के व्यावहारिक पहलुओं पर; श्री श्रेयस गोखले ने देवस्थान प्रशासन की अवधारणा, इतिहास एवं प्रावधानों पर; डॉ. पी.एस. मालवीय ने देवस्थान जीर्णोद्धार कार्यों पर; तथा डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने तीर्थ-मेला प्राधिकरण एवं विभागीय योजनाओं पर विशेष व्याख्यान दिए।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने विषयवस्तु को आत्मसात करने के साथ-साथ मैदानी अनुभव एवं क्रियान्वयन की चुनौतियों से जुड़ी अपनी शंकाएँ भी साझा की जिनका समाधान कार्यशाला के प्रशिक्षकों द्वारा किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से अधिकारियों को नवीनतम दिशा-निर्देशों से अद्यतन रखने के साथ ही श्रेष्ठ कार्य-प्रणालियों के आदान-प्रदान का मंच भी प्रदान किया गया, जो राज्य नियंत्रित देवस्थानों की वित्तीय स्वावलंबिता, बेहतर प्रबंधन एवं श्रद्धालुओं हेतु उत्तम सुविधाएं सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।
Dr Mohan Yadav Dharmendra Singh Lodhi mla