12/01/2023
ऐसा हिन्दू हूं मैं........................................
आज 12 जनवरी है. स्वामी विवेकानंद की जयंती.
हर साल स्वामी विवेकानंद की जयन्ती पर कई लोग स्वामी जी के बहाने तमाम हिन्दुओं को ललकारने लगते हैं. कहते हैं, गर्व से कहो हम हिन्दू हैं!
मैं कहता हूँ!!
गर्व से कहता हूँ कि मैं हिन्दू हूँ.
लेकिन आपका वाला दंगाई नफ़रती हिन्दू नहीं, विवेकानन्द वाला उदार सहिष्णु हिन्दू . विवेक और आनंद वाला हिन्दू. घृणा और हिंसा वाला नहीं.
मैं सबके लिए सुख, शान्ति और शुभ की कामना करने वाला हिन्दू हूँ.
मैं मनुस्मृति वाला नहीं, आरण्यक- उपनिषद वाला हिन्दू हूँ. एकोहम बहुष्यामः वाला हिन्दू. हिन्दू होने के इस मायने पर मुझे गर्व है.
लेकिन इस गर्व के साथ अक्सर मुझे शर्म भी आती है. इस बात पर कि समस्त जड़ और चेतन में ब्रह्म देखने के बावजूद सिर्फ हिन्दुओं में ही जाति- वर्ण की विभेदकारी व्यवस्था है. मैं इसका नासूर का जड़ से खात्मा चाहता हूँ.
एक हिन्दू होने के नाते मैं हर तरह की ग़ैर-बराबरी के खिलाफ खड़ा होना चाहता हूँ.
मुझे अपने मत-पंथ और व्यवस्था से जो शर्म आती है, मैं सार्वजनिक तौर पर उसका इज़हार कर सकता हूँ, और इससे मेरे हिन्दू होने पर कोई फर्क नहीं पड़ता. इसलिए भी गर्व से कहता हूँ कि मैं हिन्दू हूँ.
मैं वेदों में छुपे ज्ञान से सीखना चाहता हूँ, लेकिन उसकी हिंसा का विरोध करता हूँ. मैं वेदों में उल्लिखित किसी भी इंद्र द्वारा किसी भी कारण से किसी भी वृत्तासुर की हत्या का विरोधी हूँ.
मैं गर्व से कहता हूँ कि मैं ऐसा हिन्दू हूँ, जो अपने आराध्य देवों की भी आलोचना कर सकता है. मैं माता शबरी के जूठे बेर खाने वाले सहृदय प्रभु राम का उपासक हूँ, और मर्यादा के नाम पर सीता माता का त्याग करने वाले राजा राम का आलोचक भी हूँ.
मैं प्रदीप्त अग्नि, प्रचंड सूर्य, सदा बहती वायु, जीवनदायी जल, अगणित पृथ्वियों और अनंत आकाश का पुत्र हूँ. अन्तिम सत्य का उत्सुक अन्वेषक. यह हैं मेरे हिन्दू होने के मायने.
मैं शक्तिस्वरूपा देवी का उपासक हूँ, इसलिए शाक्त हूँ. मुझे राम की मर्यादा और कृष्ण की नीति ने वैष्णव बनाया है, और शिव के औघड़पन ने शैव.
मैं बुद्ध से बोध प्राप्त करता हूँ, और उनकी तरह पाखण्ड के खिलाफ खडा होना चाहता हूँ. मैं यीशु से करुणा और महावीर से अहिंसा की दीक्षा लेता हूँ. एक्योंकार कहते हुए मैं नानक का सिख हो जाता हूँ.
मैं सच और हक़ के पक्ष में डटकर खड़े और दुश्मनों से घिरे करबला के हुसैन का उतना ही अनुयायी हूँ, जितना कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में गीता का संदेश देते कृष्ण का।
मैं अपने मत-पंथ पर आस्था और दूसरों के पंथ- मज़हब के प्रति पूरा सम्मान रखता हूँ, लेकिन मैं इनमें से हरेक की गलत बातों का विरोधी भी हूँ. मुझे धर्मग्रंथों में बहुत कुछ प्रेरित करता है, और कुछ गैरज़रूरी और आउटडेटिड भी लगता है. यह ज़रूर है कि मैं आलोचना की शुरुआत अपने घर से करने की ही कोशिश करता हूँ.
मैं धर्म को मठों-मंदिरों के दायरे और पुजारियों-पण्डों यहाँ तक कि देवताओं के कब्ज़े से भी मुक्त रखना चाहता हूँ.
मैं मूर्ति को पूजकर भी हिन्दू ही रहता हूँ, अग्नि को पूजकर भी, और निराकार की उपासना करके भी. मैं जानता हूँ कि नास्तिक चार्वाकों की तरह मंदिर की सीढ़ियों पर खडा होकर ईश्वर की आलोचना करूंगा, तब भी मैं हिन्दू ही रहूँगा. कोई आचार्य-महंत, कोई मठ- मन्दिर- पीठ या धर्मसंस्था.. कोई मुझे हिन्दू होने से खारिज नहीं कर सकता. इसलिए भी मुझे हिन्दू होने पर गर्व है.
मैं पाखण्ड के खिलाफ खडा होना चाहता हूँ. असहिष्णुता के खिलाफ भी. मुझे उदार और सहिष्णु हिन्दू परंपरा से जुड़ा होने पर गर्व है. मैं सिगरेट नहीं पीता, लेकिन धुआँधार सिगरेट पीने वाले विवेकानंद को पसंद करता हूं . मैंने अपनी इच्छा से चौदह- पंद्रह की उम्र में मांसाहार छोड़ा, लेकिन जमकर मछली का आनन्द लेने वाले विवेकानंद मुझे अच्छे लगते हैं. अद्भुत यह है कि यह विरोधाभास भी मुझे हिन्दू होने का गर्व ही देता है.
लेकिन इस गर्व के बावजूद मैं अपने पडौसी से ईसाई या मुसलमान होने का गर्व नहीं छीनना चाहता, इसलिए भी मुझे अपने हिन्दू होने पर गर्व है.
तो साहब, ऐसा हिन्दू हूँ मैं. इससे बेहतर ही बनना चाहता हूँ. आपकी तरह वाला हिन्दू आपको ही मुबारक हो.
आपको सद्बुद्धि मिले. आपका भी कल्याण हो. मुझे यह कहते हुए भी अपने हिन्दू होने पर गर्व हो रहा है.
(जो मित्र सहमत हों, और जिन्हें मेरी तरह अपने हिन्दू या मुसलमान या कुछ और होने पर गर्व हो, कृपया इस ज़रूरी बात को आगे बढाएं. शेयर करें. कॉपी- पेस्ट करें,व्हाट्सऐप पर बढाएं. मेरा नाम न भी दें, तो भी चलेगा। वैसे भी, यह अच्छा वाला हिन्दू होना मुझे 'इदन्न मम्' कहना सिखाता है। 'इदन्न मम्' यानी 'यह मेरा नहीं है, मेरे लिए नहीं है'।)
तमसोमाज्योतिर्गमय!!