07/05/2026
“जिस हाथ ने देश को रोटी दी,
उसी हाथ को आज तक अधिकार नहीं मिला…”
आजादी आई, सरकारें बदलीं, नारे बदले, लेकिन OBC समाज की जिंदगी का दर्द बहुत कम बदला।
सदियों से खेतों में पसीना बहाने वाला, मजदूरी करके देश चलाने वाला, अपने श्रम से भारत की नींव मजबूत करने वाला समाज आज भी सम्मान और हिस्सेदारी के लिए संघर्ष कर रहा है।
जिस समाज की आबादी सबसे बड़ी कही जाती है, वही समाज आज भी शिक्षा में पीछे, नौकरियों में पीछे, बड़े पदों में पीछे और सत्ता में सबसे कम दिखाई देता है।
गाँव का गरीब पिछड़ा परिवार आज भी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए संघर्ष करता है। माँ अपने गहने बेचती है, पिता अपनी जिंदगी खपा देता है, फिर भी उनके बच्चों के सपने संसाधनों की कमी में टूट जाते हैं।
सबसे बड़ा दुख यह नहीं कि OBC गरीब है…
सबसे बड़ा दुख यह है कि उसे उसकी ताकत का एहसास ही नहीं होने दिया गया।
उसे जातियों में बाँट दिया गया, ताकि वह कभी एकजुट होकर अपने अधिकार की आवाज न उठा सके।
चुनाव के समय OBC याद आता है,
लेकिन हिस्सेदारी के समय वही OBC पीछे कर दिया जाता है।
देश बनाने वाला समाज आज भी अपने ही अधिकार के लिए दर-दर की लड़ाई लड़ रहा है।
यह केवल राजनीति नहीं,
यह करोड़ों मेहनतकश परिवारों की पीड़ा है…
उन युवाओं का दर्द है जो मेहनत तो करते हैं, लेकिन अवसर नहीं पाते।
उन बुजुर्गों की तकलीफ है जिन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत की, फिर भी सम्मान से जीवन नहीं जी पाए।
अब समय केवल भावनाओं का नहीं,
जागरूकता, शिक्षा, एकता और अधिकार की लड़ाई का है।
“जिस दिन OBC समाज अपनी ताकत पहचान लेगा,
उस दिन इतिहास बदल जाएगा…”