10/08/2023
🕉️हरियाणा में आर्यसमाज के जन्मदाता
महर्षि ने हरियाणा में केवल रेवाड़ी में १३ दिन निरन्तर वेद प्रचार करके आर्यसमाज के आन्दोलन को जन्म दिया पुराने सब विद्वान् जानते थे कि ऋषि जी वहाँ राव युधिष्ठिर सिंह पुत्र राव तुलाराम की विनती पर पधारे थे। हरियाणा में आर्यसमाज का जन्मदाता राव युधिष्ठिर सिंह ही था। वह आधुनिक काल का हरियाणा का पहला सुधारक था। आर्य समाचार मासिक मेरठ में ऋषि के जीवनकाल में इस आर्यपुरुष का नाम हरियाणा से बार बार छपा मिलता है।
एक अन्य आर्यपुरुष हरफूलसिंह जाट गोभक्त का नाम भी एक बार छपा मिलता है। इसी राव युधिष्ठिर सिंह की पत्नी माता लाडकँवर आगे चलकर वहाँ आर्यसमाज स्थापित होने पर आर्यसमाज की सर्वसम्मति से प्रधाना चुनी गई। विश्व में जब कहीं महिलाओं को vote (मतदान) का अधिकार तक प्राप्त नहीं था। आर्यसमाज में इस माता को बड़ी शान से प्रधान चुना गया।
महाराष्ट्र इतिहास परिषद् ने सन् १९८६ में मेरे शोध लेख में विशेष रूप से इसी खोज के लिये मुझे सर्वसम्मति से प्रथम पुरस्कार दिया था। आर्यसमाज इसे अपनी उपलब्धि मानकर भी इतिहास में छिपाता है। इसे आप क्या कहेंगे? यह आर्यसमाज के लिये एक अशोभनीय पाप कर्म है कि इतिहास का गला घोंटा जावे।किसी भी नेता के जीवन में किसी क्रान्तिकारी का उस युग में न तो नामोल्लेख मिलता है और न किसी क्रान्तिकारी का कोई पत्र ही मिलता है। ऋषि के पत्र व्यवहार तथा ऋषि जीवन में राव तुलाराम, श्रीकृष्ण सिंह बारहट, श्यामजी कृष्ण वर्मा आदि के नाम भी हैं और पत्र भी छपे मिलते हैं। आर्यसमाज इस इतिहास की धूम मचाने से कतराता घबराता है। अपवाद तो हैं ही। यह मैं मानता हूँ।
पाठक वृन्द इस सात खण्डों के हरियाणा के इतिहास में रेवाड़ी का इतिहास तो ऐसे दबाया, छुपाया गया है कि इस युग के महान् आर्यसंन्यासी रेवाड़ी क्षेत्र में जन्मे पूज्य स्वामी सर्वानन्द जी, स्वामी सोमानन्द जी, सन्तोषानन्द जी व महाशय हीरालाल जी का नाम उल्लेख नहीं है। क्या इनकी देन से किसी को इनकार है? डॉ. वेदपाल जी सरीखे विद्वान् यदि इधर तनिक ध्यान दें तो यह अनर्थ दूर किया जा सकता है।
परोपकारी पत्रिका अजमेर से
PS: #राजा_राव_युधिष्ठिर_सिंह जी ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती जी की प्रेरणा से विश्व की पहली गौ शाला रेवाड़ी में स्थापित की थी। महान #गौ_भक्त को शत् शत् नमन।
ाँ_भारती
#वन्दे_मातरम्
ौ_माता