26/09/2026
*कुर्सीखोरों ने भारतीय लोकतंत्र का अंग-अंग नोच खाया, देशद्रोही ज्ञानेश के पाप की सजा भारत की जनता कई पीढ़ियों तक भुगतेगी*
आज भारत के हाल पर भगत सिंह और गांधी जी भी शर्मिंदा हो रहे होंगे कि देश की जनता ने देश की बागडोर किन चरित्रहीन अपराधियों, मक्कारों और नीचों के हाथों में सौप दिया है।
🔴 लेकिन ये बात नोट कर लो, अगर सुप्रीम कोर्ट ज्ञानेश कुमार पर कोई एक्शन नहीं लेता है, अगर ज्ञानेश डकैत दो-चार दिन में अपने पद से नहीं हटाया जाता है तो हो सकता है कि देश की जनता ही इसे कुर्सी से घसीटकर उतारे।
ये भाजपाई-संघी बड़े बेशरम है, लग रहा है कि ये नेपाल में ओली का हाल भूल गए। अब इन्हें तभी जनता की ताकत समझ आएगी जब ओली जैसा हाल रंगा-बिल्ला और उसके पिल्ला ज्ञानेश कुमार का होगा। जनता इनके गांव में बांस कर देगी।
👉 राहुल गांधी लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार चिल्ला रहे हैं कि देश मे लोकतंत्र की हत्या हो रही है, देश में चुनावों की चोरी हो रही है, मगर तब लोगों को मजाक लग रहा था। अब जब लोकतंत्र की हत्या लगभग हो चुकी है, तब जाके लोग समझ पाए हैं कि वोट कहीं डाल आओ, आएगा मोदी ही। क्योंकि चुनाव आयोग अब चुनाव चोरी आयोग बन चुका है।
➡️ लोकसभा चुनाव 2024 में वोट चोरी आयोग ने वोटर टर्न आउट की वास्तविक संख्या दी ही नहीं जो फॉर्म 17-C में लिखी जाती है। वोटर टर्न आउट परसेंटेज में दिया और बाद में इसमें 8%, 15% से लेकर 30% तक बढ़ोत्तरी हो गई। जिस फॉर्म 17-C से वोटिंग की निष्पक्षता तय होती थी, मोदी-ज्ञानेश की जोड़ी ने उसे ही नष्ट कर दिया।
➡️ इसके बाद हरियाणा चुनाव में वोटिंग की शाम को इलेक्शन कमीशन ने बताया कि 61.19% पोलिंग हुई है। अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को बताया कि 65.65% पोलिंग हुई, फिर 7 अक्टूबर को बताया कि 67.9% वोट पड़े और 8 को रिजल्ट आ गया। EVM बंद हो गई। सील करके रखवा दी कई। तो फिर दो दिन बाद, काउंटिंग से 12 घंटे पहले 2.25% वोट कहां से आ गए?
➡️ इस चुनाव के बाद हाइकोर्ट ने आदेश दिया कि CCTV फुटेज और डिजिटल सबूत महैया कराया जाए। लेकिन सरकार ने अदालत का आदेश नहीं माना और चुनाव का नियम ही बदल दिया कि CCTV फुटेज वगैरह 45 दिन के बाद नहीं दिए जाएंगे। संसद से 145 सांसदों को निलंबित करके कानून पास करवा लिया कि चुनाव आयुक्त के जीते जी उनपर केस मुकदमा नहीं हो सकता। जो सुरक्षा राष्ट्रपति को भी नहीं मिलती, वो वोट चोर आयुक्त को क्यों दी गई? क्योंकि उनसे चोरी करवानी थी।
➡️ इसी तरह का खेल महाराष्ट्र में हुआ। इस चुनाव में तो बीजेपी के वर्कर्स के पास एक ऐप पकड़ा गया, जो चुनाव आयोग के सर्वर से जुड़ा था और बीजेपी के वर्कर लोगों के नाम जोड़ रहे थे या काट रहे थे। नतीजा ये हुआ कि जो पार्टी लोकसभा में धूल चाट गई थी, उसने विधानसभा में चमकत्कार कर दिया।
➡️ बिहार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर 3 लाख ऐतराज आए। इनमें से 57% लोगों ने खुद दस्तखत करके अपने ही नाम पर ऐतराज किया, जबकि कुछ ही हफ्ते पहले इन्होंने खुद ही इन्युमिरेशन फॉर्म भरकर नाम जोड़ने की अपील की थी। यानी लोगों ने खुद ही फॉर्म भरा कि हमें वोटर बनाओ। फिर खुद ही कह दिया कि नाम काट दो। 700 ऐसे भी लोग थे जिन्होंने कहा कि हम विदेशी हैं। 28 ने तो दस्तखत करके कहा है कि हम मर चुके हैं, हमारा नाम हटा दो। मतलब समझिए कि कितना बड़ा खेल था.......इसी तरह का खेल दिल्ली, बंगाल और असम में भी किया गया।
➡️ मोदी को सर्वाकलिक प्रधानमंत्री बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 का नियम बदल दिया। लेकिन यह करने का अधिकार चुनाव आयोग को है ही नहीं। नाम जोड़ने और काटने का अधिकार EROs को है, लेकिन EROs से यह शक्ति ही छीन ली गई। EROs को वोटर लिस्ट का एक्सेस ही नहीं है। जिसके पास यह ताकत है, उससे यह अधिकार छीन लिया गया। फिर यह काम कर कौन रहा है?
👉 SIR के तमाशे का फैसला किसने किया? 13 करोड़ नाम काटने का फैसला किसने किया? वोटर लिस्ट कौन बना रहा है? RTI एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज जी ने RTI के ज़रिए वोट चोरी आयोग से पूछा कि SIR के फैसले से संबंधित फाइल के बारे में जानकारी दीजिए। वोट चोरी आयोग के अधिकारी ने लिखित में दिया कि यह फ़ैसला आयोग ने नहीं लिया। इसका मतलब आयोग के फैसले कहीं और से हो रहे हैं? लोकतंत्र के लुटेरों ने चुनाव आयोग को बंधक बना लिया है और मनमाने तरीके से अपने लिए मुफीद वोटर चुन रहे हैं?
👉🏿 मैं फिर कह रहा हूं कि रंगा, बिल्ला और उसके पिल्ला ने मिलकर चुनाव आयोग को चोरी आयोग बना डाला है। अगर देश को बचाना है, अगर लोकतंत्र को जिंदा रखना है तो राहुल गांधी के साथ मिलकर इन चोरों को घसीटकर गद्दी से उतारना होगा, वर्ना मुंह देखते रह जाओगे।