रमेश मूंदड़ा

रमेश मूंदड़ा Tent & Light Decoration, Event Gardens for Marriages and other occasions.

*एकात्म मानववाद के प्रेरणा स्त्रोत्र, अंत्योदय के जनक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अवतरण दिवस की सबको हार्दिक बधाई, पुण्य द...
25/09/2025

*एकात्म मानववाद के प्रेरणा स्त्रोत्र, अंत्योदय के जनक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अवतरण दिवस की सबको हार्दिक बधाई, पुण्य देवात्मा के श्री चरणों में कोटि कोटि प्रणाम*🙏🚩🇮🇳🪷💐

एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म जयंती पर पर शत्-शत् नमन🙏🙏
25/09/2024

एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म जयंती पर पर शत्-शत् नमन🙏🙏

देश का सम्मान ! 🇮🇳🇮🇳🇮🇳माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ग्रीक राष्ट्रपति द्वारा ग्रीस के "ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑ...
25/08/2023

देश का सम्मान ! 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को ग्रीक राष्ट्रपति द्वारा ग्रीस के "ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर" से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई🇮🇳🇮🇳🇮🇳

🇮🇳🇮🇳 वन्देमातरम 🇮🇳🇮🇳🙏🙏 भारत माता कि जय 🙏🙏
26/07/2023

🇮🇳🇮🇳 वन्देमातरम 🇮🇳🇮🇳

🙏🙏 भारत माता कि जय 🙏🙏

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी का पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर मा. J.P.Nadda जी को बहुत-बहुत शुभ...
17/01/2023

विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी का पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर मा. J.P.Nadda जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ओर बधाई.......

Narendra Modi
Amit Shah
Bharatiya Janata Party

आने वाला हर दिन मंगल पर्व लगे,जीवन अपना अनुपम उपहार लगे ,नज़र जिधर टिक जाए ,वहीं ज्ञान के दीप जले,कदम जिधर बढ़ जाए,वहीं ...
26/10/2022

आने वाला हर दिन मंगल पर्व लगे,
जीवन अपना अनुपम उपहार लगे ,
नज़र जिधर टिक जाए ,
वहीं ज्ञान के दीप जले,
कदम जिधर बढ़ जाए,
वहीं प्रगति के पुष्प खिले,
मन जहां हर्षित हो जाए,
वहीं प्रेम और ख़ुशी मिले,
शब्द कहीं से निकले ,
ब्रह्म नाद की गूंज लगे,
सुबह सुनहरी,
रजत दुपहरी ,
शाम महकती,
निशा सुरमई सरगम में ढले,
अगले दिन फिर इसी तरह से,
नई सुबह के द्वार खुले…🌹🌺🌷🌿🎋🥀🍁नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

सेमिनार...उपनिवेशवाद का अन्त.......2047 का भारत.......
21/10/2022

सेमिनार...
उपनिवेशवाद का अन्त.......
2047 का भारत.......

13/10/2022

विवेकानन्द सन्देश यात्रा के विषय में किशनगढ़ में भारत विकास परिषद् के सदस्यों के साथ सार्थक चर्चा।

राष्ट्रीय भाजपा कार्यालय प्रभारी माननीय प्रद्युम्न कुमार जी भाई साहब के साथ ...... दिल्ली राष्ट्रीय भाजपा कार्यालय में ....
13/10/2022

राष्ट्रीय भाजपा कार्यालय प्रभारी माननीय प्रद्युम्न कुमार जी भाई साहब के साथ ...... दिल्ली राष्ट्रीय भाजपा कार्यालय में .......

13/10/2022

परिवार/कुटुम्ब प्रबोधन क्यों आवश्यक है?

पिता का समाज व पुत्रों के नाम पत्र
लखनऊ के एक उच्चवर्गीय वृद्ध कर्नल पिता ने अपने पुत्रों के नाम एक पत्र लिखकर स्वयं को गोली मार ली।
पत्र क्यों लिखा और क्या लिखा ? यह जानने से पहले संक्षेप में पत्र लिखने की पृष्ठभूमि जान लेना आवश्यक है।
पिता सेना में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए। वे लखनऊ के एक पॉश कॉलोनी में अपनी पत्नी के साथ रहते थे उनके दो बेटे जो अमेरिका में रहते थे। यहां यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि माता-पिता ने अपने लाड़लों को पालने में कोई कोर कसर नहीं रखी। बच्चे सफलता की सीढ़िंया चढते गए। पढ़-लिखकर इतने योग्य हो गए कि संसार की सबसे नामी-गिरामी कार्पोरेट कंपनी में उनको नौकरी मिल गई। संयोग से दोनों भाई एक ही देश में लेकिन अलग-अलग अपने परिवार के साथ रहते थे।
एक दिन अचानक पिता ने रूंआसे गले से बेटों को सुचना दी। बेटे! तुम्हारी मां अब इस संसार में नहीं रही। पिता अपनी पत्नी के शव के साथ बेटों के आने की प्रतिक्षा करते रहे। एक दिन बाद छोटा बेटा आया जिसका घर का नाम चिंटू था।
पिता ने पूछा चिंटू! मुन्ना क्यों नहीं आया। मुन्ना यानी बड़ा बेटा। पिता ने कहा कि उसे फोन किया कि पहली उडान से आये।
धर्मानुसार बडे बेटे का आना सोच वृद्व फौजी ने हट सी पकड़ ली।
छोटे बेटे के मुंह से एक सच निकल पड़ा उसने पिता से कहा कि मुन्ना भईया ने कहा कि "मां की मौत में तुम चले जाओ, पिता जी मरेंगे तो मैं चला जाऊंगा।"
कर्नल साहब (पिता) कमरे के अंदर गए। स्वयं को कई बार संभाला फिर उन्होंने कुछ पंक्तियो का एक पत्र लिखा। जो इस प्रकार था-
प्रिय बेटों,
मैंने और तुम्हारी मां ने बहुत सारे स्वप्नों के साथ तुम्हें पाला-पोसा। दुनिया के सारे सुख दिए। देश-दुनिया के विख्यात स्थानों पर शिक्षा दी। जब तुम्हारी मां अंतिम सांस ले रही थी तो मैं उसके पास था। वह मरते समय तुम दोनों का चेहरा एक बार देखना चाहती थी और तुम दोनों को बाहों में भर कर लाड करना चाहती थी। तुम लोग उसके लिए वही मासूम मुन्ना और चिंटू थे उसकी मृत्यु के बाद उसके शव के पास तुम लोगों की प्रतिक्षा करने लिए मैं था। मेरा मन कर रहा था कि काश तुम लोग मुझे ढांढस बधाने के लिए मेरे निकट होते। मेरी मृत्यु के पश्चात मेरे शव के निकट तुम लोगों की प्रतिक्षा करने के लिए कोई नहीं होगा। सबसे बड़ी बात यह कि मैं नहीं चाहता कि मेरी लाश निपटाने के लिए तुम्हारे बड़े भाई को आना पड़े इसलिए सबसे अच्छा यह है कि अपनी मां के साथ मुझे भी निपटाकर ही जाओ। मुझे जीने का कोई अधिकार नहीं क्योंकि जिस समाज ने मुझे जीवन भर धन के साथ सम्मान भी दिया, मैंने समाज को असभ्य ओर कपुत नागरिक दिये। हाँ अच्छा रहा कि हम अमरीका जाकर नहीं बसे, सच्चाई दब जाती।
मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे मैडल तथा फोटो बटालियन को लौटाए जाए तथा घर का पैसा नौकरों में बांटा जाऐ। जमापूँजी आधी वृद्ध सेवा केन्द्र में तथा आधी सैनिक कल्याण में दे दी जाऐ।
तुम्हारा पिता

कमरे से ठांय की आवाज आई। कर्नल साहब ने स्वयं को गोली मार ली।
यह क्यों, किस कारण हुआ? कोई दोषी है या नहीं। हमें इसके बारे में कुछ नहीं कहना।
हाँ यह काल्पनिक कहानी नहीं। पूरी तरह सत्य घटना है।

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