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06/06/2026

सूत्र- सचिन पायलट बन सकते हैं राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष...

05/06/2026

सोते सोते एक बार जयकारा हो जाये श्री देव दरबार का

बयाना क्षेत्र के गजेंद्र सिंह गुर्जर ( ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी बयाना) का राजस्थान लोक सेवा आयोग RPSC द्वारा आयोजित...
05/06/2026

बयाना क्षेत्र के गजेंद्र सिंह गुर्जर ( ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी बयाना) का राजस्थान लोक सेवा आयोग RPSC द्वारा आयोजित Assistnat Professor ( EAFM) विषय में संपूर्ण राजस्थान में 55 वीं रैंक एवं MBC श्रेणी में प्रथम रैंक के साथ चयनित हुआ है बहूत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं🙏🏻🙏🏻🙏🏻

 #डाॅ_प्रियम_गुर्जर को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) में सफलता के साथ प्रदेश की टॉप- 5  सूची में स्थान प्राप्त करने प...
05/06/2026

#डाॅ_प्रियम_गुर्जर को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) में सफलता के साथ प्रदेश की टॉप- 5 सूची में स्थान प्राप्त करने पर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं 💐🙏🏻
ईश्वर से प्रार्थना हैं कि आप भविष्य में ऐसे ही सफलता की अग्रिम पंक्ति में रहते हुए क्षेत्र एवं गॉंव का नाम रोशन करते हुए परिवार को गौरवान्वित करें!

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बगडावत भारत कथा -18रानी जयमती ने सवाई भोज को अपने पास महल में ही चौपड़ में उलझाए रखा और युद्ध भूमि में जाने नहीं दिया। सा...
05/06/2026

बगडावत भारत कथा -18

रानी जयमती ने सवाई भोज को अपने पास महल में ही चौपड़ में उलझाए रखा और युद्ध भूमि में जाने नहीं दिया। सारे भाईयों की मौत के बाद सवाई भोज खुद रण क्षेत्र में जाने की तैयारी करते हैं। रानी जयमती से अपने अस्र-शस्र मांगते हैं तो रानी वहां पर भी एक वर मांगती है कि मैं भी आपके साथ युद्ध में चलूंगी और आपके पीछे बुंली घोड़ी पर सवार रहूंगी मगर आप पीछे मुड़कर मेरी ओर नहीं देखना, नहीं तो मैं आपका सिर उतार लूंगी। यह वचन देने के बाद रानी सवाई भोज को उनके अस्र-शस्र देती है। सवाई भोज अपनी सेना को साथ लेकर युद्ध करने के लिये राठोडा की पाल पर पहुंच जाते हैं। रावजी के सामने जाकर उनके ऊपर तलवार से हमला करते हैं। रानी जयमती अपना हाथ आगे कर देती हैं, जिससे उसके हाथों की चूड़ियां कट जाती है। सवाई भोज पीछे मुड़ कर कहते है ये क्या करती हो रानी सा अभी आप का हाथ कट जाता। रानी कहती है की लाओ मेरा वचन पूरा करो, आपने वचन दिया था कि पीछे मुड़कर नहीं देखूंगा इतना सुनते ही सवाई भोज खुद अपना सिर काट कर रानी को दे देते हैं। सवाई भोज की मौत की खबर सुनकर सवाई भोज की दूसरी रानियाँ भी वहाँ आ जाती हैं और हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती हैं। मगर पदमादे, जो मेहन्दु जी की माँ थी उन्होने, साडू माता को हाथ जोड़ने से मना कर दिया। वहीं भवानी, चौबीस भाईयों की मुण्ड माला बना रही थी। इधर रावजी कहते हैं भाई राणी कहां है, राणी के लिये ही तो युद्ध किया है। रावजी के इतना कहते ही पेड़ पर बैठी भवानी बोलती है राजाजी ऊपर देखो, रावजी देखकर घबरा जाते है। रानी जयमती भवानी का रुप धारण कर गले में मुण्ड माला धारण कर २० भुजाओं युक्त सिंह पर सवार बड़ के पेड़ पर बैठी हुई है। यह रुप देख रावजी और नीमदेव घबरा जाते हैं। रावजी को रानी के विराट रुप के दर्शन करने के बाद रावजी पछताते हैं कि हमने ऐसे ही अपने भाईयों को खत्म कर दिया है। बगड़ावतों के मरने के बाद उनकी सम्पत्ति की लूट मच जाती है। कश्मीरी तम्बू तो मन्दसोर का मियां ले जाता है, जय मंगला और गज मंगला हाथी पीलोदा के कुम्हार ले गये और सवाई भोज की बुंली घोड़ी सावर के ठाकुर दिया जी ले जाते हैं। सोने का पोरसा पहले ही तेजाजी लेकर चले गये थे और बगड़ावतों की अच्छी नस्ल की गायें नापा ग्वाल गोसमा डूगंरा में ले गया। रावजी नीमदेव से कहते हैं कि सब सामान तो लोग लूट कर ले गये हैं। उन्हें बगड़ावतों के मारे जाने का अफसोस होता है और कहते हैं कि ऐसे भाई कहां मिलेगें। और यह महसूस करते हैं कि यह सब भवानी की माया है जो बगड़ावत मारे गये। सारी रानियों के सती होने के साथ पदमादे भी सती हो जाती है और साडू माता को सती होने से मना कर देती है क्योंकि भगवान ने अभी उनके यहाँ जन्म लेना है। सभी बगड़ावतों की रानियों के सती होने के बाद, साडू माता हीरा दासी को साथ लेकर मालासेरी की डूगंरी पर रहने आ जाती है। अब रावजी कहते हैं कि बगड़ावतों के बालक टाबर हो तो उन्हें मैं पाल-पोस कर बड़ा करूं और वापस बगड़ावत खड़े करूं। यह बात छोछू भाट का मौसेरा भाई गांगा भाट सुन लेता है। उसे पता होता है कि बगड़ावतों के ७ बीसी कुमारों ( १४० कुमार) को छोछू भाट, भाट मगरें में पाल रहा है। रावजी जब अपनी सेना के साथ भाट मंगरे पहुंचते हैं, वहां छोछू भाट मंगरे पर बैठा देखता है कि सेना आ रही है तो सभी ७ बीसी राजकुमारों को मंगरे में छोड़ कर भाग जाता है। कालूमीर पठान रावजी से कहते हैं कि रावजी इनको पालने की गलती मत करना, इन्हें यहीं मार देते हैं, नहीं तो ये बड़े होकर अपने बाप-दादों का बैर आपसे लेगें। और कालूमीर कहता है कि रावजी २४ बगड़ावतों से युद्ध करते-करते ६ - ८ महीने हो गये, ये तो पूरे १४०है इनसे कैसे निपटेगें। रावजी कालूमीर पठान की बात मान जाते है और उन्हें मारने का आदेश दे देते हैं। कालूमीर पठान उन बच्चों को वहीं मार देता है। उनमें से एक बच्चा बच जाता है भूणाजी, उसे पत्थर पर पटक देते हैं लेकिन वह बच्चा नहीं मरता है। (इन्हें लक्ष्मण का अवतार बताया गया है।) जब भूणाजी नहीं मरता हैं तो रावजी उसे अपना पीण्डी पाछ बेटा बना लेते हैं, अपनी पीड़ली के चीरा लगाकर एक दूसरे का खून आपस में मिला कर धरम बेटा बना लेते हैं। भूणाजी को लाकर रावजी अपनी रानी को देते हैं और कहते हैं कि इसे भी राजकुमारी तारादे के साथ-साथ अपना दूध पिलाओ और पाल-पोस कर बड़ा करो। रानी अपने स्थनो के जहर लगाकर भूणाजी को दूध पिलाती है, भूणाजी फिर भी नहीं मरते। आखिर रानी भूणाजी को हाथी के पावों से कुचलवाने को कहती है, हाथी उन्हें अपनी सूण्ड से उठाकर अपनी पीठ पर बैठा लेता है। यह सब देख कर रानीजी के भाई चान्दारुण के रहने वाले सातल-पातल, भूणाजी की चंटी अंगुली काटकर उन्हें खाण्डेराव का नाम देते हैं। सातल-पातल भूणाजी की अंगुली काटते समय यह कहते हैं की भाण्जे जब तू बड़ा हो जावे तब तेरे में ताकत हो तो हमसे बैर ले लेना। ये बात वहां बैठा एक पून्या जाट सुन लेता है और इस बात को गांठ बांध लेता है, वक्त आने पर भूणाजी को बता इस तरह बगड़ावतों के मारे जाने पर सारा परिवार अलग-अलग हो गया। रावजी ने बगड़ावतों के ७ बीसी कुमारों को भी मरवा दिया। उनके परिवार के बचे हुए ४ कुमार अलग-अलग जगह पर पले बढ़े। जिनमें सबसे बड़े मेहन्दू जी अजमेर में, तेजाजी के बेटे मदनों जी उनके पास पाटन में, भूणा जी राण में और भांगीजी बाबा रुपनाथ के पास ही पले बढ़े।
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अगला भाग कल पोस्ट किया जाएगा
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धन्यवाद
टीम गुर्जर न्यूज़ राजस्थान

04/06/2026

अगर सोये नही हो तो एक बार जयकारा हो जाये श्री देव दरबार का 🙏🏻

राजस्थान से राज्यसभा चुनाव 2026 हेतु भारतीय जनता पार्टी द्वारा श्रीमती Dr. Alka Gurjar जी को उम्मीदवार घोषित किए जाने पर...
04/06/2026

राजस्थान से राज्यसभा चुनाव 2026 हेतु भारतीय जनता पार्टी द्वारा श्रीमती Dr. Alka Gurjar जी को उम्मीदवार घोषित किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

आपके उज्ज्वल, सफल एवं यशस्वी राजनीतिक भविष्य की मंगलकामनाएं।

बगडावत भारत कथा -17रण क्षेत्र में नियाजी के पास रानी जयमती (भवानी) आती है और कहती है कि नियाजी मुझे अपना शीश दे दीजिए। आ...
04/06/2026

बगडावत भारत कथा -17

रण क्षेत्र में नियाजी के पास रानी जयमती (भवानी) आती है और कहती है कि नियाजी मुझे अपना शीश दे दीजिए। आपने वचन दिया था कि मैं एक बार आपसे जो भी मांगूगीं आप मुझे वो दे देंगे। नियाजी अपने हाथ से ही अपना शीश काटकर भवानी के थाल में रखकर देते हैं और कहते हैं कि भाभीजी मेरा वचन पूरा हो गया। नियाजी का सिर कटने के बाद उनकी छाती में आँखे निकल आती हैं, नाभि की जगह मुँह बन जाता है और गले के ऊपर कमल का फूल खिल जाता है। सिर कटने के बाद भी नियाजी अपने दोनों हाथों से हाथियों की पूंछ पकड़कर घुमा-घुमाकर फेंक देते हैं। जिनके नीचे दबकर कई सैनिक मर जाते हैं। भवानी नियाजी से कहती है कि आपका माथा कटने के बाद भी आप लड़े जा रहे हैं और कहती है कि माथा तो है नहीं मैं आपकी आरती करूं तो तिलक कहाँ करूं। नियाजी कहते हैं माताजी मैं आपको मान गया हूं। बस आपने आरती कर ली। भवानी सोचती है कि यह तो अभी रुकेगा नहीं। भवानी सोचती है कि यह तो सिर कटने के बाद भी लड़ता जा रहा है इसलिए क्यों न मैं इसे नील का छींटा दे दूँ (जो कि अशुभ होता है) जिससे नियाजी खाण्डा डाल देंगे। नियाजी को भवानी की बात समझ आ जाती है और उनकी वाणी होती है कि भाभीजी मेरे ऊपर नील का छींटा मत डालना। इससे मेरा मोक्ष नहीं होगा। मैं खाण्डा डाल देता हूँ लेकिन माँ चामुण्डा मेरा वंश खत्म मत करना जैसे तूने भूणाजी, मेहन्दू जी और मदनो जी को छोड़ा है वैसे मेरे वंश को छोड़ देना। इस पर भवानी नेतुजी के ६ महीने के गर्भ को जीवित छोड़ देने का वचन देती है। नियाजी अब खाण्डा छोड़ देते हैं और पृथ्वी माता से निवेदन करते हैं कि मुझे धरती में समा ले। जब सवाई भोज को नियाजी की मौत का पता लगता है तो वह भवानी को कोसते हैं कि तू मेरे निया जैसे भाई को खा गई। भवानी कहती है कि मैं तो डायन हूं। नियाजी की क्या सोच करते हो, मैं तो द्रौपदी बनकर कौरवों और पाण्डवों को खा गई, मेरा तो काम ही यही है। सवाई भोज कहते हैं कि नियाजी जैसा भाई तो मुझे कभी नहीं मिल सकता। वह मेरे २२ भाइयों के बराबर एक ही था। भवानी कहती है कि मैं कई देवी देवताओं को खा गई, तू एक नियाजी की क्या बात करता है। मैं तो बड़े- बड़ों को खा गई। सवाई भोज कहते हैं कि माँ चामुण्डा दूर रह ये तेरी करनी मुझे जचीं नही मुझे। नियाजी के बाद रण भूमि में बाहरावत जी अपनी सेना के साथ युद्ध करने के लिए आते हैं और वो भी लड़ाई करते हुए मारे जाते हैं। नियाजी और बाहरावतजी की तरह सभी भाई एक-एक करके रावजी की फौजों से युद्ध करने के लिए खारी नदी पर आए। खारी नदी पर ही सब युद्ध हुए थे। खारी नदी के एक किनारे पर रावजी की फौजें थी तो दूसरी और बगड़ावतों की फौजें। यह युद्ध कलयुग का महाभारत का युद्ध था। इस युद्ध में सवाई भोज के सभी महाबली योद्धा भाई काम आ गए। रानी को दिए वचन के अनुसार एक-एक भाई ने अपनी फौज के साथ खारी नदी पर आकर रावजी की सेना के साथ युद्ध किया था। इन बगड़ावत भाइयों की रानियाँ सतीवाड़े में सती होती हैं। चूंकि नेतुजी ६ महीने के गर्भ से थी इस अवस्था में वह सती नहीं हो सकती थी, इसलिए वह बगड़ावतों के गुरु बाबा रुपनाथ की धूणी पर आती है और कहती है बाबाजी इस पेट में लोथ पल रहा है इसे निकाल कर आप अपने पास रख लो। बाबा रुपनाथ कहते है, मैं तेरे हाथ नहीं लगा सकता क्योंकि तू मेरे चेले की रानी है, मैने तेरे हाथ का खूब भोजन किया है, और यदि मैं तेरे को हाथ लगाता हूँ तो अगले जन्म में मैं सूअर बनूंगा। यह सुनकर नेतुजी खुद ही अपना पेट चीरकर गर्भ बाहर निकाल कर बाबा को देती है और बाबा उसे अपने पास रखे भांग के घड़े में डाल देते हैं और ढक देते हैं। नेतुजी कहती है बाबा जी अब आप ही इसके मां-बाप हो और इसकी सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है। यह कहकर नेतुजी अपनी कमर को वापस बांध लेती है और कहती है तीन महीने बाद इसका जन्म होगा और इसका नाम भांगड़े खान रखना। नेतुजी बाबा रुपनाथजी से कहती है इस बच्चे को साधू मत बनाना। और इसको सफेद कपड़े देना, भगवा वस्र मत पहनाना। राताकोट की जीत यही करेगा, यह बड़ा होकर अपने बाप का बैर लेगा। यह एक नया बदनोरा गांव बसायेगा। बाबा से आज्ञा लेकर नेतु वहां से सती होने के लिये जाती है जहां सभी बगड़ावत भाईयों की स्रियाँ नहा धोकर १६ श्रृंगार कर सती होने के लिए अपने-अपने पति के शवों के साथ चिता में बैठ जाती हैं। सती होते समय नेतु रानी जयमती को श्राप देती है कि अगले जनम में तू बड़े घर में जन्म लेगी तेरे शरीर पर कोढ झरेगा, तेरे सिर पर सींग होगा और तेरे से शादी करने वाला कोई नहीं मिलेगा। रानी श्राप से भयभीत हो जाती है और नेतु से कहती है की मेरा उद्धार कैसे होगा। विनती करती है।नेतु कहती है कि पीपलदे के नाम से तू धार के राजा के यहां जन्म लेगी और भगवान देवनारायण मालवा से लौटते समय तेरा उद्धार करेगें।
अगला भाग कल पोस्ट किया जाएगा ।
श्री देव भक्त
गणेश गुर्जर
रायपुर भीलवाड़ा

03/06/2026

जय श्री देव जी की दोस्तों🙏🏻

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