03/07/2020
गाय ने केला देखकर मुँह मोड़ लिया,
औरत ने गाय के सामने जाकर फिर उसके मुँह मे केला देना चाहा,,
लेकिन गाय ने केला नहीं खाया; पर औरत केला खिलाने के लिये पीछे ही पड़ी थी; जब औरत नहीं मानी; तो गाय सींग मारने को हुई; औरत डरकर बिना केला खिलाये चली गयी;।
औरत के जाने के बाद पास खडा साँड बोला;- "वह इतने 'प्यार से' केला खिला रही थी; तूने केला भी नहीं खाया; और उसे डराकर भगा भी दिया;"
प्यार नहीं मजबूरी; आज एकादशी है; औरत मुझे केला खिलाकर पुण्य कमाना चाहती है; वैसे यह मुझे कभी नहीं पूछती; गल्ती से उसके मकान के आगे चली जाती हूँ; तो डंडा लेकर मारने को दौड़ती है;
गाय बोली;-"प्रेम से सूखी रोटी भी मिल जाये; तो अमृत तुल्य है;"
जो केवल अपना भला चाहता है; वह दुर्योधन है
जो अपनों का भला चाहता है; वह युधिष्ठिर है;
और जो सबका भला चाहता है,, वह श्रीकृष्ण है;
अत: कर्म के साथ-साथ- भावनाएँ भी महत्व रखती हैं,,,
राधे राधे🙏