Project Change

Project Change We have a dream to improve the education standard of our nation. Very soon we will officially register our NGO so that we can attract donations

we have started this initiative to held quiz competition locally to help poor and talented students.

आज Project  Change की तरफ से गांव मैं 72वाँ  गणतंत्र बनाया गया। इसके साथ ही प्रोजेक्ट की तरफ से क्विज प्रतियोगिता भी करव...
26/01/2021

आज Project Change की तरफ से गांव मैं 72वाँ गणतंत्र बनाया गया। इसके साथ ही प्रोजेक्ट की तरफ से क्विज प्रतियोगिता भी करवाई गई। जिसमें प्रथम स्थान चंचल कुमारी D/O मुकेश कुमार को प्राप्त हुआ। इनाम के रूप मैं 2100 rs रुपए और एक शील्ड प्रदान की गई। द्वितीय स्थान पर आरती D/ O मुकेश कुमार को 1100 rs रुपए, तृतीय स्थान पर प्रिया कुमारी D/O दिनेश चंद को भी 1100 रुपए, चतुर्थ स्थान पर शीतल D/O मुकेश कुमार को 551rs और पाचवें नंबर पर कौशल और रोहित को दोनों को 251 rs -251 rs देकर सम्मानित किया गया। साथ ही अन्य बच्चों को कई अन्य प्रकार की इनाम वितरित करवाई गई। छात्र छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए Project Change आगे भी कार्य करते रहने का प्रयास करता रहेगा। Keep Suport

28/10/2020

"मानवीय दृष्टिकोण का सबसे कॉमन आयाम"

आपको एक कहानी बताता हूं जो आपके सोचने के तरीके पर एक शानदार व्यंग अवश्य करेगी।

ये आज से लगभग 1170 वर्ष पहले की बात है।पश्चिम अफ्रीका के जनजातीय कबीले मैं एक सोलोमन नाम का प्रसद्धि चित्रकार रहता था।
एक दिन उसने अपने नगर के चौराहे पर अपनी एक बेहतरीन पेंटिंग को एक टेबल पर रख दिया और बगल मैं एक पुस्तिका और कलम रख दी और उस पुस्तिका पर लिखा कि इस पेंटिंग मैं जो भी कमियां हैं उन्हें इस पुस्तिका मैं लिख दें। कुछ समय बाद लोंगो ने उस पेंटिंग को और पुस्तिका को देखा तो सबने उस पेंटिंग मैं कोई न कोई कमी निकाल कर उस पुस्तिका मैं लिख दिया देखते ही देखते थोड़े ही समय में लोगो ने कमियां इतनी सारी निकाल दी कि वो पुस्तिका भर गई। कुछ समय बाद चित्रकार सोलोमन उस चौराहे पर अपनी बेजोड़ पेंटिंग पर लोगों की प्रतिक्रिया को देखने आया। तो उसने पुस्तिका मैं इतनी सारी कमियों को देखा तो उसे बहुत निराशा हुई क्योंकि उसकी नजर मैं वो पेंटिंग बेजोड़ थी लेकिन लोगों ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया वो निराश होकर उस पेंटिंग और पुस्तिका को वापिस लेकर घर चला गया। वो दुःखी था लेकिन कुछ समय बाद उसने कुछ निश्चय किया। अगले दिन फिर से वो उसी पेंटिंग को लेकर गया औऱ इस बार उसने टेबल पर एक ब्रुश और रंग की डिब्बी रख दी औऱ साथ मैं एक कागज पर लिखा कि कल लोगों ने इस पेंटिंग मैं जो-जो कमियां निकाली थी वो आज उनको सुधार दें। धीरे धीरे पूरा दिन ढलकर शाम मैं परवर्तित हो गया। एक भी व्यक्ति ने पेंटिंग मैं निकाली गई कमियों को सुधारने के लिए ब्रुश नहीं उठाई। शाम को जब सोलोमन ने लोंगो की ऐसी प्रतिक्रिया देखी तो वो बहुत अचंभित हुआ एक भी व्यक्ति ने ब्रुश उठाने की कोशिश भी नहीं की। लेकिन अब सोलोमन अपनी पेंटिंग को लेकर निराश नही था क्योंकि वो लोगों की मानसिकता समझ गया था। आगे से उसने हमेशा अपने नजरिए के मूल्यांकन को महत्व दिया।
कहानी का संदेश---- इस कहानी का सार स्प्ष्ट तौर पर बताता है कि लोगों का काम निर्रथक कमियां निकालना ज्यादा होता है। क्योंकि दुनिया का सबसे आसान काम सलाह देना या आधुनिक युग की भाषा शैली मैं कहु तो फोकट का ज्ञान देना होता है।
आप कितने से कितना अच्छा विचार प्रस्तुत करके देख लीजिए लोग उसमें कमियां निकालने के लिए आ ही जाएंगे। मार्के ज़करबर्ग और उनके साथी जब फ़ेसबुक को स्थापित करने के लिए कैम्पेनिंग कर रहे थे तो सब लोगों ने उन्हें मूर्ख ठहराने की बहुत कोशिश की। बोलते थे कि क्या फालतू का प्लेटफ़ॉर्म बना रहे हैं लेकिन आज रेवन्यू के मैटर मैं फ़ेसबुक दुनिया की टॉप फाइव मैं आने वाली IT कंपनी है।
ये दुनिया का कॉमन सा फण्डा है हर अच्छे विचार का पहले उपहास उड़ाया जाता है फिर उसको क्रिटिसाइज किया जाता है। और अंत मैं यदि विचार अपने मुकाम पर पहुँच जाता है तो शुरुआती दौर मैं हँसी उड़ाने वाले लोगों के मुंह पर एक शानदार व्यंग्यात्मक तमाचा जड़कर अपनी विजय का आगाज़ कर ही देता है।
निष्कर्ष--अगली बार से किसी भी व्यक्ति की या उसकी किसी सही उद्देश्य वाली पोजीशन की आलोचना या उस पर टौंट कसने से पहले ये ज़रूर सोच ले कि आपके पास क्या बेहतर विकल्प उपलब्ध है और यदि है भी तो क्या आप उसको ज़मीन पर उतारने के लिए कुछ ठोस कर भी रहे या नहीं?
"अगर किसी को उठाने मैं मदद न कर सकें तो कभी भी गिराने वालों का भी साथ न दें।
जय हिंद
By_ कृपाल सिंह

आज से एक महीनें पहले हमने Project Change की journey शुरू की थी। हमने इन 30 दिनों मैं कई सारे ऐसे कार्य किये जो दशको पहले...
01/09/2020

आज से एक महीनें पहले हमने Project Change की journey शुरू की थी। हमने इन 30 दिनों मैं कई सारे ऐसे कार्य किये जो दशको पहले ही कर लिए जाने चाहिए। लेकिन कोई नहीं अंग्रेजी मैं एक कहावत है न कि ""It is never too late to mend|""हमने अपनी ग्राम पंचायत की पहली पब्लिक लाइब्रेरी का शुभारंभ किया आज लाइब्रेरी के अंदर 7 से 8 टीचर लगभग 85 से 90 बच्चों को पूर्णतया निःशुल्क पढ़ा रहें हैं। हमारा विजन बहुत विशाल है। हम इन बच्चों को एजुकेशन मैं इतना ताक़तवर बना देंगे जिनको defeat करना बिलकुल भी आसान नहीं होने वाला है। कुछ वक़्त के बाद भरतपुर के 2 सबसे महंगे स्कूल सेंट पीटर्स और T.M मोटर्स के बच्चों से हमारे पढ़ाये हुए बच्चों का हम लाइव कॉम्प्टीशन करवाएंगे। आप बस देखते चलिए हम इन बच्चों को कितना बदल देंगे। ।इस महीनें मैं आपको Project Change की तरफ़ से कई और भी शानदार पहल देखने को मिल सकती हैं। हम काम कर रहे हैं और करते भी रहेंगें

27/08/2020

Project Change की तरफ से बच्चों को निःशुल्क फुटबॉल प्रदान की गई। हम आगे भी बच्चों को खेलों के प्रति रुझान को बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे।

आज Project Change की तरफ से अपना घर आश्रम मैं जाकर जरूरतमंदो को 50 kg केलों का वितरण करवाया गया। आगे भी अपना घर के साथ म...
21/08/2020

आज Project Change की तरफ से अपना घर आश्रम मैं जाकर जरूरतमंदो को 50 kg केलों का वितरण करवाया गया। आगे भी अपना घर के साथ मिलकर मानवीय सेवा मैं हर संभव मदद की जाएगी। please come forward to suport our vision to make a difference..

Today we have landed on ground... Please read share.....
15/08/2020

Today we have landed on ground... Please read share.....

13/08/2020

15 अगस्त तक इंतजार कीजिए आपको Project Change का मिशन कई शानदार सरप्राइज देने वाला है। हमारी टीम दिन रात काम कर रही है। बस आप देखते चलिए। डोंट वरी अच्छी तरह से देख रहा हूं कि कौन किस तरह से सहयोग कर रहा है और कौन इग्नोर कर रहा है। हमने पहले से ही प्लान किया था कि लोगों का फर्स्ट रिएक्शन क्या होगा? और वो किस तरह से हमारे विज़न को रोकने का प्रयास करेंगे? इसलिए हमें कोई खास चिंता नहीं है।
""शरुआती असफलताएँ किसी भी महान लक्ष्य का आवश्यक अंग होती हैं"" । जो लोग हमसे दूरी बना रहे हैं उनके लिए कुछ शब्द----- आप मूकदर्शक बनें रहकर समझदारी का ढोंग करते रहें लेकिन आपको बता देता हूं कि अब हम नहीं रुकने वाले हैं। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा हम असफल हो जाएंगे लेकिन हमारी टीम की गिनती कोशिश करने वालों मैं होगी नाकि मुकदर्शक बनने का दिखावा करने वालों मैंI बहुत लोग वैसे तो इतने अच्छे अच्छे सुविचार वाले फोटोस फेसबुक और व्हाट्सएप पर डालेंगे और हर चीज को शेयर करके तुरंत महान बनने का आडंबर करेंगे। लेकिन जब real बदलाव की बात आती है तब उनका दोगलापन स्प्ष्ट नजर आता है।हम जमीन पर काम करने का दृण निश्चय कर रहें हैं तब भी हमसे बहुत महानविभूतिया दूरी बनाने का प्रयास कर रह हैं। कोई नहीं आपको आपकी संकुचित सोच मुबारक हमें हमारी कोशिश मुबारक। I will show you very strong diplomacy under "Project Change" just wait and watch.
Kripal Singh

Project Change की मुहिम को समाज की तरफ से बहुत सकारात्मक सहयोग मिल रहा है। हमारी टीम हमारे विज़न को लोगों तक पहुचाने मैं ...
07/08/2020

Project Change की मुहिम को समाज की तरफ से बहुत सकारात्मक सहयोग मिल रहा है। हमारी टीम हमारे विज़न को लोगों तक पहुचाने मैं काफी सफल प्रतीत हो रही है। बहुत जल्द हम मडरपुर ग्राम पंचायत में पहली लाइब्रेरी खोलने का प्रयास कर रहें हैं। हम कोशिश कर रहें हैं कि कुछ ऐसी व्यवस्था करवाई जाए कि जिन बच्चों के घर मैं पढ़ने का माहौल नहीं हैं वो लाइब्रेरी मैं जाकर अध्ययन कर सकें। अभी तक लगभग 1300 किताबें कन्फर्म हो चुकी है। और हम कोशिश कर रहें हैं कि लगभग 10 हजार रुपए की किताबें और मंगवाई जाएं। आप लोगों से सहयोग की बहुत उम्मीद है कृपया अपना फर्ज समझ कर आगे आएं। कोई भी पैसा तबतक संतोष नहीं देता जब तक कि उसका कुछ भाग हम समाज के पिछड़े हुए लोगों के लिए उपयोग नहीं करते । आप समझों "सामाजिक उत्तरदायित्व" हमारे जीवन का एक अहम भाग होना ही चाहिए।

06/08/2020

जीवन की वास्तिविक पहचान के क्या मायने होते है?
So Let's Begin.... कृपया पूरा पढ़े कुछ सीखने को अवश्य मिलेगा।
सबसे पहला सवाल यही है कि क्या जीवन मैं कुछ भी चीज पूर्ण रूप से सही या गलत होती है और अगर कोई भी चीज सही या गलत होती भी है तो उसे सही और गलत ठहराने के मापदंड क्या होते हैं? आदर्शवाद वैसे तो समाजशास्त्र और राजनीतिशास्त्र विषय की एक विचारधारा है लेकिन इसका सीधा सा संबंध हम सबके व्यवहारिक जीवन से ही होता है।
यह सिद्धांत स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर डालता है कि जीवन में सबकुछ नैतिक मूल्यों के अनुसार उचित ही किया जाना चाहिए लाइफ मैं कभी भी गलती नहीं करनी चाहिए लेकिन अब सवाल यहां पर यह है कि क्या जीवन को इस विचारधारा के अनुसार हमेशा नैतिक मूल्यों के हिसाब से जिया जा सकता है? मैं अपने जीवन के पिछले 5 सालों के तार्किक अनुभव के आधार पर कहना चाहूंगा कि जीवन हमेशा आदर्शवादी सिद्धान्तों के अनुसार जी पाना कभी भी पूर्ण रूप से संभव नहीं हो सकता क्योंकि जीवन का पथ एक सीधी रेखा मैं होता ही नहीं है जीवन मैं कई बार ऐसे पड़ाव आ ही जाते हैं जहाँ इंसान को अपने मूल्यों के साथ भी ज्यादा ना सही लेकिन कुछ समय के लिए समझौता करने पर मजबूर होना ही पड़ जाता है। अच्छा खासा इंसान जिसके पास मजबूत तर्कशक्ति और सकारात्मक विचारों का असीम भण्डार होने के बावजूद भी जीवन मैं आने वाले अनचाहे विपरीत परिस्थितियों के तूफान मैं खुद को स्थिर नहीं रख पाता है कहने का भावार्थ यही है कि कोई भी इंसान कितना भी मजबूत क्यों न हो लेकिन जीवन के कई पड़ावों पर समय की असीम शक्ति के सामने धाराशाही हो जाता है और वह बुरी तरह से बिखर जाता है उसे सबकुछ निराशा के सागर में विलीन होता हुआ प्रतीत होता है। मेरा मानना है कि ताकतवर हम नहीं समय होता है वो एक जटके मैं आपको अर्श से फर्श पर ला सकता है इतिहास की गोद मैं ऐसे कितने अनगिनत उद्धरण नहीं होंगे जो समय की एकात्मक असीम सत्ता की प्रामाणिकता को साबित नहीं करतें हैं।
इसलिए हमें कभी भी भौतिकवादी उपलब्धियों के आधार पर "मैं" होने का गुमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए क्या पता समय की मार का अगला कोड़ा आप पर पड़ जाए। मानव समाज को अपनी आधुनिकता पर बहुत गुमान होता है ना लेकिन आज एक छोटे से कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को हिला के रख दिया है अमेरिका और यूरोपीय देशों के इतना ताकवर होने के बावजूद इस छोटे से वायरस के प्रभाव से धराशायी हो चुके है अमेरिका अब तक चिकित्सा के क्षेत्र में दिए जाने वाले दुनिया के सबसे बड़े नॉबेल पुरुस्कार को पाने मैं अग्रणी रहता हुआ आया है लेकिन आज इस देश में 1 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गवा चुके हैं।
मैं इस उदहारण के द्वारा बस यहीं बताना चाहता हूं कि इंसान की अपनी सीमाएं होती हैं कभी भी अल्प लाभ की वजह से गुमान नहीं करना चाहिए।
दूसरा मैं यही कहूंगा कि जीवन में गलत रास्ते को अपनाना बहुत आसान होता है हमें एक छोटा सा विचार ही हमारे पूरे अनुशासित जीवन को एक झटके में बिगाड़ सकता है इसलिए भटकना बहुत आसान होता है और और परिस्थिति में सही रास्ते पर चलना बहुत कठिन होता है ज्यादातर लोग सही रास्ते की शुरुआती मुसीबतों से घबराकर उस रास्ते को छोड़ देते हैं लेकिन जो व्यक्ति उस रास्ते के शुरुआती भय से लड़ने का निश्चय करके आगे बढ़ने का अडिग निर्णय लेता है वो अंत मैं विजयी भी बनता है। इसलिए फैसला हमें करना होता है कि हमें जीवन में कौनसा रास्ता और क्यू चुनना चाहिए?
आखिरी सवाल सफलता के मायने क्या होने चाहिए?
क्या सिर्फ एक नौकरी प्राप्त करके शादी करके सैटल हो जाना ही सफलता का मापदंड ठहराया जा सकता है? अच्छा घर, अच्छी गाड़ी और अच्छी लाइफ स्टाइल ही सफलता के घोतक होते हैं?अगर ऐसा है तो क्या कार्लमार्क्स जिनके पास जीवन के आखिरी समय में अपनी रचनाओं को छपवाने के लिए भी पैसे नहीं थे, या फिर अम्बेडकरजी जो एक शानदार बैरिस्टर होने के बाद भी अपने बच्चों को इलाज के अभाव मैं बचा नहीं पाए ,या फिर गांधीजी जिन्होंने लगभग 28 साल तक एक धोती पहनकर ही जीवन निकाल दिया और लगभग 5 से 6 साल जेल मैं बिता दिए और जीवन के अंत मैं एक चरमपंथी के द्वारा गोली से मार दिए गए, या फिर एक 23 साल का लड़का जो शादी करने से यह कहकर इनकार कर देता है कि शादी तो कोई भी कर सकता है लेकिन देश के के लिए हर कोई अपनी जान न्यौछावर नहीं कर सकता और अंत मैं वो देश के लिए अपने साथियों के साथ 23 साल की उम्र में हँसते हँसते फाँसी के फंदे पर चढ़ जाता है, मैं ऐसे कई और उदहारण दे सकता हूं जिन्होंने देश और समाज के लिए अपनी सभी खुशिओं को त्याग दिया। तो मूल सवाल यही उठता है कि क्या इन सबके पास नोकरी ,बड़ा घर या गाड़ी बंगला था अगर नहीं था तो क्या ये सब लोग असफल घोषित कर दिए जाएंगे? सोचना आपको है कि आपके लिए सफलता के मापदंड क्या होंगे? क्या सिर्फ भौतिकवाद ही तुम्हारी सफलता का घोतक होगा?
निष्कर्ष- इस पोस्ट के आखिरी मैं यहीं कहना चाहूंगा कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता हम सब मैं हमेशा कुछ न कुछ कमियां मौजूद रहती हैं इसलिये हमें हमेशा आलोचनात्मक आत्मविश्लेषण की प्रवृत्ति खुद के अंदर ढालनी होगी । हमें किसी के बारे में जजमेंटल होने से बचना चाहिए।
जीवन में परिपक्वता की निशानी विनम्रता के बिना हमेशा अधूरी होती है इसलिए हमें हमेशा अपने व्यवहार में विनम्र होना चाहिए अपने से अलग विचारों को भी सहमति के साथ सम्मान देना चाहिए। इंसान के लिए मानवीय प्रेमभाव की प्रेरणा हमेशा अनिवार्य होनी चाहिए।
आखिर में उन सभी लोगों को मैं ह्रदय से आभार प्रकट करता हूं जिन्होंने भी "Project Change" की मुहिम को समझ कर आगे आकर हर सम्भव मदद प्रदान करने का आश्वासन दिया है। देखो हमारा किसी पर भी कोई दबाव नहीं हैं कि आप सामाजिक हित के लिए डोनेशन दे ये आपकी स्वेच्छा का विषय की आप सहयोग करें या न करें। क्योंकि आपका पैसा हमारी पूरी टीम के किसी भी मेंबर को नहीं कि चाहिए। बस जितना मैंने पढ़ा व समझा है और बहुत बड़े महानायकों ने भी अनुभवों से बार बार यही दोहराया है कि पैसे का महत्व तब ही मुल्यवान होता है जब हम गरीब और असहाय लोगों के हक़ के लिए लड़े।
उम्मीद करता हूं की आप इस ब्लॉग को पढ़कर और थोड़ा ठहरकर इन विचारों के बारे चिंतन करके खुद पर लागू करेंगे। अंत में यही कहना चाहूंगा कि अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दें। आपकी छोटी सी प्रतिक्रिया Project Change लिए बहुत मायने रखेगी।
शुक्रिया !
Kripal Singh

02/08/2020

वो जीवन ही क्या जिसमें हम लोंगो के हक़ की आवाज़ न उठा पाए। किसी को फर्क पड़े या न पड़े लेकिन मुझे पड़ता है जब हमारे समाज का कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव मैं आगे बढ़ने से रह जाए। हम Project Change के माध्यम से देश के कोने कोने से ऐसी प्रतिभाओं को खोज कर निखारेंगे जो आगे चलकर IAS, IPS, Doctors, Engineers, औऱ Politicians के सपने देखें नाकि सिर्फ परिवार को पालने के लिए कोई भी सरकारी नौकरी के पीछे भागे। हम गांव से शुरू करके देश के कोने कोने के बच्चों को RTI कानून का इस्तेमाल करना सिखाएंगे ताकि वो स्थानीय स्तर पर किये जा रहे भृष्टाचार के खिलाफ आवाज़ शशक्त कर सके। हम छात्रों की ऐसी क्लास तैयार करेंगे जिन्हें मैनिपुलेट करना कम्प्लीटली इम्पॉसिबल हो। समाज के सभी कैपेबल लोगों से अनुरोध है कि आप "Project Change" को timely डोनेट करें ताकि हम बहुत तेजी से देश के कोने कोने तक विस्तार कर सकें। आप बस हमें fund कीजिये आपको मैं पूरी गारण्टी देता हूं कि आप का पैसा गरीब बच्चों के लिए ही ख़र्च किया जाएगा। कृपया खुद से आगे आकर डोनेट करें आप के थोड़े से सहयोग से समाज मैं बहुत बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। *सामाजिक दायित्व* नाम की भी कोई चीज होती है सिर्फ खुद पर ही ख़र्च करना गलत है। हर व्यक्ति का सामाजिक रूप से दायित्व होता है कि वो अपने गांव या समाज के पिछड़े बच्चों के लिए काम करे। सिर्फ खुद की गाढ़ी और बंगला पर खर्च करने का क्या नैतिक औचित्य रह जाता है जब आपका पड़ोसी भूखा सो जाए। इसलिए कोशिश करें कि खुद से ही आगे चलकर डोनेट करें मुझे कॉल न करनी पड़े क्योंकि कॉल करने मैं भी समय जाता है। अगर ये समय बचेगा तो मैं बाकी के कार्यों को और तेजी से कर पाऊंगा।
Please Donate on this number 9636453194 phone pe.....
By_Kripal Singh

Most important blog to understand the entire process of our process
01/08/2020

Most important blog to understand the entire process of our process

01/08/2020

इस पेज पर मैं प्रत्येक दिन हर सामाजिक मुद्दें पर ब्लॉग लिखूंगा। आप सबसे बस एक ही अनुरोध होगा कि आप प्रत्येक पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर व्यक्त करें औऱ अपने सुझाव दे। सिर्फ लाइक या सीन करके न छोड़ें।

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