Gandhi Sagar WLS

Gandhi Sagar WLS Gandhi Sagar Sanctuary is a wildlife sanctuary situated on the northern boundary of Mandsaur and Nimach districts in Madhya Pradesh, India.

It is spread over an area of 368.62 km2 (142.32 sq mi) adjoining Rajasthan state in India. It was notified in 1974.

स्वतंत्रता दिवस समारोह आज स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर अधीक्षक कार्यालय, गांधीसागर में अधीक्षक महोदय द्वारा गरिमामय म...
15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस समारोह
आज स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर अधीक्षक कार्यालय, गांधीसागर में अधीक्षक महोदय द्वारा गरिमामय माहौल में झंडा वंदन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी को संबोधित करते हुए कर्तव्यनिष्ठा, एकता और राष्ट्र निर्माण में योगदान का संदेश दिया।
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💐

अंतर्राष्ट्रीय विश्व बाघ दिवस – 29 जुलाई 2026गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य, सामान्य वनमंडल मंदसौर (म.प्र.)29 जुलाई 2026 को ...
29/07/2026

अंतर्राष्ट्रीय विश्व बाघ दिवस – 29 जुलाई 2026

गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य, सामान्य वनमंडल मंदसौर (म.प्र.)

29 जुलाई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय विश्व बाघ दिवस के अवसर पर गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य द्वारा जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गांधीसागर क्रमांक-3 के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों एवं वन अमले द्वारा वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता हेतु रैली निकाली गई, जिसमें वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन से संबंधित प्रेरणादायी नारों का उद्घोष किया गया।

रैली के उपरांत विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट चीता एवं केराकल प्रोजेक्ट के संबंध में प्रस्तुतीकरण (Presentation) के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही पेंच, सतपुड़ा एवं कूनो राष्ट्रीय उद्यानों पर आधारित वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री फिल्म) का प्रदर्शन कर वन्यजीव संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया।

विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों द्वारा बाघ की आकर्षक रंगोली तैयार की गई, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र में संचालित चीता मॉनिटरिंग एवं वन्यजीव संरक्षण की गतिविधियों की भी जानकारी साझा की गई।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया तथा सभी विद्यार्थियों एवं उपस्थित नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण एवं लगाए गए पौधों के संरक्षण की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम में श्री पराग सेनानी, गेम रेंज अधिकारी (पूर्व एवं पश्चिम), गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य, श्री श्रेयश, केराकल प्रोजेक्ट प्रभारी (ग्लोबल टाइगर फोरम), विद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त विद्यालयीन स्टाफ, वन विभाग का अमला तथा गणमान्य नागरिक श्री पूरन माता, श्री दीपसिंह सोलंकी एवं श्रीमती बबीता चक्रवर्ती उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन एवं विशेष रूप से विद्यार्थियों में बाघ सहित समस्त वन्यजीवों के संरक्षण, जैव विविधता के महत्व तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।
Department of Forest, Madhya Pradesh .P. Tiger Foundation Society, India

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एवं “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत वन मंडल मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में पौधा...
05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एवं “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत वन मंडल मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सहभागिता करते हुए संयुक्त रूप से पौधारोपण किया।


गांधीसागर, मंदसौर। मंदसौर वनमंडल अंतर्गत गांधीसागर वन्यजीव अभ्यारण्य में तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना का कार्य सफल...
25/05/2026

गांधीसागर, मंदसौर।
मंदसौर वनमंडल अंतर्गत गांधीसागर वन्यजीव अभ्यारण्य में तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दिनांक 22 मई से 24 मई तक चली इस विशेष ग्रीष्मकालीन गणना में वन विभाग के समर्पित मैदानी अमले द्वारा अभ्यारण्य के विभिन्न चिन्हित स्थलों पर सुबह के समय गिद्धों की मॉनिटरिंग और गिनती की गई।
​तीन दिनों तक चले इस व्यवस्थित सर्वे में गिद्धों की संख्या में लगातार उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं। गणना के पहले दिन (22 मई) अभ्यारण्य क्षेत्र में कुल 478 गिद्ध देखे गए। दूसरे दिन (23 मई) यह संख्या बढ़कर 580 तक पहुंची, वहीं गणना के अंतिम दिन (24 मई) को कुल 638 गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई।

गांधीसागर वन्य जीव अभ्यारण में प्रभास और पावक ने सफलतापूर्वक पूर्ण किया एक साल।    #मंदसौर
21/04/2026

गांधीसागर वन्य जीव अभ्यारण में प्रभास और पावक ने सफलतापूर्वक पूर्ण किया एक साल।



#मंदसौर

Meet the Coppersmith Barbet (Psilopogon haemacephalus). Known for its metronomic 'tuk-tuk-tuk' call that echoes like a h...
13/04/2026

Meet the Coppersmith Barbet (Psilopogon haemacephalus). Known for its metronomic 'tuk-tuk-tuk' call that echoes like a hammer on metal, this vibrant bird is more than just a colorful face. As a primary frugivore, it plays a vital role in our ecosystem by dispersing seeds of keystone species like Ficus trees, aiding natural forest regeneration.
Spot these "living jewels" chiseling nest cavities in soft wood during your next visit to the sanctuary. 🛠️✨
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This is the Yellow-throated Sparrow—the very species that inspired Dr. Salim Ali to become the 'Birdman of India'."
28/02/2026

This is the Yellow-throated Sparrow—the very species that inspired Dr. Salim Ali to become the 'Birdman of India'."




🦉 The Tiny Guardian of Gandhi Sagar 🦉Meet the Spotted Owlet (Athene brama), a small but mighty resident of our sanctuary...
24/02/2026

🦉 The Tiny Guardian of Gandhi Sagar 🦉
Meet the Spotted Owlet (Athene brama), a small but mighty resident of our sanctuary. Known for their piercing yellow eyes and white-spotted plumage, these owlets are vital to our ecosystem as natural pest controllers, keeping rodent and insect populations in check.

गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की उत्साहजनक वृद्धिमन्दसौर परिक्षेत्र में 1084 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिक...
23/02/2026

गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की उत्साहजनक वृद्धि
मन्दसौर परिक्षेत्र में 1084 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य एक बार फिर गिद्धों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2025-26 के तहत आज संपन्न हुई गणना का निरीक्षण वन संरक्षक (CF) उज्जैन वृत्त, श्री आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी (DFO) मंदसौर, श्री संजय रायखेरे द्वारा किया गया। गणना के परिणामों में कुल 1084 गिद्ध पाए गए हैं।
*विदेशी मेहमानों का आगमन: प्रवास की जानकारी*
गाँधीसागर अभयारण्य केवल स्थानीय गिद्धों का ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रजातियों का भी पसंदीदा ठिकाना है।
कहाँ से आते हैं: गणना में पाए गए हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस जैसे गिद्ध लंबी दूरी तय कर यहाँ पहुँचते हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत, मध्य एशिया, और हिमालय की ऊँचाइयों से शीतकाल के दौरान प्रवास करते हैं।
प्रवास का समय: ये प्रवासी गिद्ध आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में गाँधीसागर पहुँचते हैं और गर्मी शुरू होने से पहले यानी मार्च-अप्रैल तक यहाँ रुकते हैं।
ये गिद्ध वर्ष भर अभयारण्य में रहते हैं और यहीं प्रजनन करते हैं:
• भारतीय गिद्ध (Long-billed Vulture): चंबल की ऊँची चट्टानों पर घोंसले बनाने वाली मुख्य प्रजाति।
• सफेद पीठ वाला गिद्ध (White-rumped Vulture): पेड़ों पर बसेरा करने वाले ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।
• राज गिद्ध (Red-headed Vulture): अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट लाल सिर वाली प्रजाति।
• मिस्र का गिद्ध (Egyptian Vulture): आकार में छोटे और सफेद रंग के स्थानीय गिद्ध।
विदेशी मेहमान/प्रवासी (3 प्रजातियाँ):
ये प्रजातियाँ शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल) के दौरान तिब्बत, मध्य एशिया और हिमालय की ऊँचाइयों से प्रवास कर यहाँ पहुँचती हैं:
• हिमालयन ग्रिफन (Himalayan Griffon): हिमालय के ठंडे क्षेत्रों से आने वाले विशालकाय गिद्ध।
• यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Griffon): लंबी दूरी तय कर आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी।
• सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture): दुनिया के सबसे भारी और बड़े गिद्धों में शुमार।
गाँधीसागर ही क्यों है 'गिद्धों का स्वर्ग'?
निरीक्षण के दौरान डीएफओ श्री संजय रायखेरे ने गाँधीसागर की अनुकूलता के प्रमुख कारण बताए:
सुरक्षित चट्टानें (Nesting Sites): चंबल नदी के किनारे स्थित ऊँची और दुर्गम चट्टानें गिद्धों को सुरक्षित घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं।
प्रचुर भोजन और जल: अभयारण्य में वन्यजीवों की अच्छी संख्या और आस-पास के क्षेत्रों में पशुधन की उपलब्धता के कारण इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। चंबल का पानी इनके लिए बारहमासी जल स्रोत है।
मानवीय हस्तक्षेप मुक्त: अभयारण्य का शांत वातावरण और सुरक्षित कॉरिडोर इनके फलने-फूलने में मदद करता है।
संरक्षण के प्रयास
सीसीएफ श्री आलोक पाठक ने बताया कि गाँधीसागर में 120 सक्रिय घोंसलों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहाँ का ईकोसिस्टम बेहद मजबूत है। हम इन प्रकृति के सफाईकर्मियों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहे हैं।


#मंदसौर

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