26/10/2017
|| ये छठ पूजा जरुरी है ||....... धर्म के लिए नहीं, अपितु ......
*ये छठ जरुरी है* :
हम-आप सभी के लिए जो अपनी जड़ों से कट रहे हैं |
उन बेटों के लिए जिनके घर आने का ये बहाना है |
*ये छठ जरुरी है* :
उस माँ के लिए जिन्हें अपनी संतान को देखे महीनों हो जाते हैं |
उस परिवार के लिये जो टुकड़ो में बंट गया है |
*ये छठ जरुरी है* :
उस नई पौध के लिए जिन्हें नहीं पता की दो कमरों से बड़ा भी घर होता है |
उनके लिए जिन्होंने नदियों को सिर्फ किताबों में ही देखा है |
*ये छठ जरुरी है* :
उस परंपरा को ज़िंदा रखने के लिए जो समानता की वकालत करता है |
जो बताता है कि बिना पुरोहित भी पूजा हो सकती है |
*ये छठ जरुरी है* :
जो सिर्फ उगते सूरज को ही नहीं डूबते सूरज को भी प्रणाम करना सिखाता है |
*ये छठ जरुरी है* :
गागर , निम्बू और सुथनी जैसे फलों को जिन्दा रखने के लिए |
*ये छठ जरुरी है* :
सूप और दउरा को बनाने वालों के लिए |
ये बताने के लिए कि , इस समाज में उनका भी महत्व है |
*ये छठ जरुरी है* :
उन दंभी पुरुषों के लिए जो नारी को कमज़ोर समझते हैं |
*ये छठ जरुरी है , बेहद जरुरी* ||
बिहार के योगदान और बिहारियों के सम्मान के लिए |
सांस्कृतिक विरासत और आस्था को बनाये रखने के लिए |
परिवार तथा समाज में एकता एवं एकरूपता के लिए |
II *संयमित एवं संतुलित व्यव्हार = सुखमय जीवन का आधार* II