Bhaiya Ji

Bhaiya Ji ।। जय श्री राम ।।
प्रियेश

07/10/2025




यहाँ अकड़ और रगड़...🤔
दोनों एक दूसरे के समानुपाती हैं, बुझे की ना ही...✍️ 🙏🙏 Bhaiya Ji 🙏🙏






20/09/2024

दुश्मन बने दुनिया तो इतना याद रखना मेरे दोस्त...🤔
तेरा यार जिन्दा है, तो तेरा हथियार जिन्दा है...✍️

I have reached 600 followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉
28/04/2024

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राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में दिनांक 14.02.2024 को सरस्वती पूजा समारोह में सम्मिलित होने के पश्चात्‌ लिये गये ...
20/02/2024

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में दिनांक 14.02.2024 को सरस्वती पूजा समारोह में सम्मिलित होने के पश्चात्‌ लिये गये कुछ तस्वीरें। माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।...


यहाँ अकड़ और रगड़...🤔
दोनों एक दूसरे के समानुपाती हैं, बुझे की ना ही...✍️ 🙏🙏 Priyesh Verma Bhaiya Ji 🙏🙏






राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में दिनांक 14.02.2024 को सरस्वती पूजा समारोह में सम्मिलित होने के पश्चात्‌ लिये गये ...
20/02/2024

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में दिनांक 14.02.2024 को सरस्वती पूजा समारोह में सम्मिलित होने के पश्चात्‌ लिये गये कुछ तस्वीरें। माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।...


हद में रहोगे, तो लिहाज़ देखोगे…🤔
पार कर ली, तो मिज़ाज देखोगे...✍ 🙏🙏 Priyesh Verma Bhaiya Ji 🙏🙏







जब इंस्पेक्टर ने प्रेमचंद से कहा- तुम बड़े मग़रूर होप्रेमचंद बहुत स्वाभिमानी थे. गोरखपुर की दो घटनाओं से इसका जिक्र मिलता...
09/01/2024

जब इंस्पेक्टर ने प्रेमचंद से कहा- तुम बड़े मग़रूर हो

प्रेमचंद बहुत स्वाभिमानी थे. गोरखपुर की दो घटनाओं से इसका जिक्र मिलता है. एक बार उनके स्कूल में निरीक्षण करने स्कूल इंस्पेक्टर आया. पहले दिन प्रेमचंद उसके साथ पूरे समय स्कूल में रहे. दूसरे दिन शाम को वह अपने घर पर आरामकुर्सी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे. इंस्पेक्टर की मोटरकार उधर गुजरी.

इंस्पेक्टर को उम्मीद थी कि प्रेमचंद उठकर उन्हें सलाम करेंगे लेकिन ऐसा कुछ न हुआ. इंस्पेक्टर ने गाड़ी रोक दी और अर्दली को भेजकर बुलवाया. शिवरानी देवी इस घटना का वर्णन करते हुए लिखती हैं कि इंस्पेक्टर के सामने जाकर प्रेमचंद बोले, ‘कहिए क्या है?

इंस्पेक्टर ने कहा, ‘तुम बड़े मग़रूर हो. तुम्हारा अफसर दरवाजे से निकला जाता है और तुम उठकर सलाम भी न करते?’ प्रेमचंद बोले, मैं जब स्कूल में रहता हूं तब नौकर हूं. बाद में मैं भी अपने घर का बादशाह हूँ।

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