विशाल कुमार मिश्र बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज अनुमंडल अंर्तगत केहुनिया गांव के मध्यम वर्ग के परिवार से आते है।किसान पिता और साधारण माँ के बेटे विशाल जिले के सबसे कम उम्र के सबसे अधिक सक्रिय छात्र नेता एवं समाजसेवी है अपने सामाजिक/ राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर किया। 2012-13 में संत माइकल एकेडमी बेतिया के स्टूडेंट कौंसिल के उपाध्यक्ष रहे 2014 में
उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता लिया।विद्यार्थी परिषद् में नगर सहमंत्री,नगर मंत्री,जिला प्रवक्ता,जिला सदस्यता प्रमुख जैसे बड़े दायित्व का सफल निर्वाहन किया।2014 से 2016 तक विद्यार्थी परिषद में रहे उसके उपरांत राष्ट्रीय आजाद मंच से जुड़ कर आरक्षण विरोधी आंदोलन में कूद पड़े। राष्ट्रीय आजाद मंच में वह पश्चिम चंपारण के जिला अध्यक्ष और 2017 में आजाद मंच के केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी क्रांतिकारी कार्यों को देखते हुए बिहार के प्रदेश उपाध्यक्ष की कमान सौंपी।2019 में जब राष्ट्रीय आज़ाद मंच,राजनीतिक दल बानी तब वे बिहार के संस्थापक अध्यक्ष बने,उनके नेतृत्व में आज़ाद मंच बेतिया जिला से शुरू हो कर 11 अन्य जिलों तक पहुँची।संगठन से मिले कार्यो वह बखूबी निर्वहन करते हैं.इसी बीच विशाल ने बैचलर इन फार्मेसी की डिग्री हिमाचल प्रदेश के महाराजाअग्रसेन विश्वविद्यालय से प्राप्त किया। उनकी सामाजिक रूचि एवं आंदोलनकारी विचारों से प्रेरित होकर भारत का सबसे बड़ा फार्मासिस्ट संगठन अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी परिषद में जगह दिया। इन सभी कार्यों से परे वह चंपारण ग्रुप ऑफ कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर भी है।विशाल कुमार मिश्र बेतिया में ओवरब्रिज,शहीद पार्क,सड़क निर्माण, छात्रों से अवैध वसूली और अश्लील गानों ,स्टील प्लांट सहित सरकारी विभागों में भ्रस्टाचार पर रोक के लिए बड़ा आंदोलन कर चुके हैं।यहां तक की 8 जनवरी 2017 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफिला बेत्तिया में रोक कर ज्ञापन सौपें।सरकारी हॉस्पिटलो में अनियमितता के विरुद्ध वे तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय के काफिला शाहिद स्मारक के सामने रोक दिया था।साथ ही विशाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि धर्म जागरण के धर्म रक्षा सेना के जिला प्रमुख पद पर भी नियुक्त हैं एवं वे संघ के प्रशिक्षित स्वंयसेवक है।