Rampur Khas [Bawli]

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12/02/2013

देशभक्त "बटुकेश्वर दत्त": जिन्हें आजादी के बाद मिली गुमनाम जिंदगी..
देश की आजादी के लिए तमाम पीड़ा झेलने वाले क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त का जीवन भारत की स्वतंत्रता के बाद भी दंश, पीड़ाओं, और संघर्षों की गाथा बना रहा और उन्हें वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वह हकदार थे।
आजादी की खातिर 15 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने वाले बटुकेश्वर दत्त को आजाद भारत में रोजगार मिला एक सिगरेट कंपनी में एजेंट का, जिससे वह पटना की सड़कों पर खाक छानने को विवश हो गये। बाद में उन्होंने बिस्कुट और डबलरोटी का एक छोटा सा कारखाना खोला, लेकिन उसमें काफी घाटा हो गया और जल्द ही बंद हो गया। कुछ समय तक टूरिस्ट एजेंट एवं बस परिवहन का काम भी किया, परंतु एक के बाद एक कामों में असफलता ही उनके हाथ लगी..
दत्त के जीवन के इन अज्ञात पहलुओं का खुलासा नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किताब (बटुकेश्वर दत्त, भगत सिंह के सहयोगी) में हुआ है। अनिल वर्मा द्वारा लिखी गयी यह संभवत: पहली ऐसी किताब है, जो उनके जीवन का प्रामाणिक दस्तावेज होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संघर्ष और आजादी के बाद जीवन संघर्ष को उजागर करती है।
बटुकेश्वर दत्त के 1964 में अचानक बीमार होने के बाद उन्हें गंभीर हालत में पटना के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस पर उनके मित्र चमनलाल आजाद ने एक लेख में लिखा, क्या दत्त जैसे कांतिकारी को भारत में जन्म लेना चाहिए, परमात्मा ने इतने महान शूरवीर को हमारे देश में जन्म देकर भारी भूल की है। खेद की बात है कि जिस व्यक्ति ने देश को स्वतंत्र कराने के लिए प्राणों की बाजी लगा दी और जो फांसी से बाल-बाल बच गया, वह आज नितांत दयनीय स्थिति में अस्पताल में पड़ा एडियां रगड़ रहा है और उसे कोई पूछने वाला नहीं है..

इसके बाद सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया और आजाद, केंद्रीय गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा और पंजाब के मंत्री भीमलाल सच्चर से मिले। पंजाब सरकार ने एक हजार रुपए का चेक बिहार सरकार को भेजकर वहां के मुख्यमंत्री केबी सहाय को लिखा कि यदि वे उनका इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं तो वह उनका दिल्ली या चंडीगढ़ में इलाज का व्यय वहन करने को तैयार हैं।
बिहार सरकार की उदासीनता और उपेक्षा के कारण क्रांतिकारी बैकुंठनाथ शुक्ला पटना के सरकारी अस्पताल में असमय ही दम तोड़ चुके थे। अत: बिहार सरकार हरकत में आयी और पटना मेडिकल कॉलेज में ड़ॉ मुखोपाध्याय ने दत्त का इलाज शुरू किया। मगर उनकी हालत बिगड़ती गयी, क्योंकि उन्हें सही इलाज नहीं मिल पाया था और 22 नवंबर 1964 को उन्हें दिल्ली लाया गया।
दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने पत्रकारों से कहा था, मुझे स्वप्न में भी ख्याल न था कि मैं उस दिल्ली में जहां मैने बम डाला था, एक अपाहिज की तरह स्ट्रेचर पर लाया जाउंगा। उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया। पीठ में असहनीय दर्द के इलाज के लिए किए जाने वाले कोबाल्ट ट्रीटमेंट की व्यवस्था केवल एम्स में थी, लेकिन वहां भी कमरा मिलने में देरी हुई। 23 नवंबर को पहली दफा उन्हें कोबाल्ट ट्रीटमेंट दिया गया और 11 दिसंबर को उन्हें एम्स में भर्ती किया गया..

बाद में पता चला कि दत्त बाबू को कैंसर है और उनकी जिंदगी के चंद दिन ही शेष बचे हैं। भीषण वेदना झेल रहे दत्त चेहरे पर शिकन भी न आने देते थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री रामकिशन जब दत्त से मिलने पहुंचे और उन्होंने पूछ लिया, हम आपको कुछ देना चाहते हैं, जो भी आपकी इच्छा हो मांग लीजिए। छलछलाई आंखों और फीकी मुस्कान के साथ उन्होंने कहा, हमें कुछ नहीं चाहिए। बस मेरी यही अंतिम इच्छा है कि मेरा दाह संस्कार मेरे मित्र भगत सिंह की समाधि के बगल में किया जाए..
लाहौर षडयंत्र केस के किशोरीलाल अंतिम व्यक्ति थे जिन्हें उन्होंने पहचाना था। उनकी बिगड़ती हालत देखकर भगत सिंह की मां विद्यावती को पंजाब से कार से बुलाया गया। 17 जुलाई को वह कोमा में चले गये और 20 जुलाई 1965 की रात एक बजकर 50 मिनट पर दत्त बाबू इस दुनिया से विदा हो गये। उनका अंतिम संस्कार उनकी इच्छा के अनुसार, भारत-पाक सीमा के करीब हुसैनीवाला में भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की समाधि के निकट किया गया। !! बिना पढ़ें लाईक ना करें जरूर पढ़ें..!!

06/02/2013

एक ये साहब भी हैं जिले का नाम रौशन कर रहे हैं॥
उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक कार्यक्रम के
दौरान अखिलेश सरकार के एक मंत्री ने
डीएम की खूबसूरती की खुलेआमt तारीफ
कर
डाली. वहां मौजूद लोगों ने भले ही मामले
को हंसी-ठिठोली में उड़ा दिया, पर मंत्रीजी के बयानों पर विवाद
खड़ा होता नजर आ रहा है.
आम तौर पर इस तरह की बातें
मुंबइयां फिल्मों में ही देखने
को मिलती हैं,
लेकिन यूपी में यह हकीकत में देखा गया. दरअसल, प्रदेश के खादी व ग्रामोद्योग
मंत्री राजा राम पांडेय सोमवार
को सुल्तानपुर के कमला नेहरू इंस्टिट्यूट
ऑफ
टेक्नोलॉजी में बेरोजगारों को चेक बांटने
आए थे. इस दौरान वे जिले की डीएम की खूबसूरती पर फिदा दिखे.
मंत्रीजी ने डीएम
धनलक्ष्मी की खूबसूरती की तारीफों के
पुल
बांधने शुरू कर दिए. हद तो तब हो गई, जब
उन्होंने खूबसूरती के पैमाने पर जिले की पूर्व डीएम व मौजूदा डीएम
की तुलना भी कर डाली.
सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान
मंत्री राजा राम पांडेय ने कहा, 'यह
मेरा सौभाग्य है कि मैं दूसरी बार इस जिले
का प्रभारी मंत्री बना हूं. मुझे यहां हर बार किसी खूबसूरत डीएम के साथ काम
करने का मौका मिला है.'
मंत्रीजी यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा, 'जब
मैंने जिले की पूर्व डीएम कामिनी चौहान
रतन को देखा, तो लगा कि उनसे खूबसूरत
महिला हो ही नहीं सकती है. लेकिन यह नई डीएम (धनलक्ष्मी) तो उनसे
भी खूबसूरत
हैं. इनके बात करने का लहजा भी बेहतर है.'
राजा राम पांडेय ने कहा, 'मैं
इनकी खूबसूरती के बारे में सोचता रहा हूं,
पर ये बहुत कुशल प्रशासक भी हैं.' इस दौरान डीएम धनलक्ष्मी भी सभा में
मंत्रीजी के साथ मौजूद थीं.
मंत्रीजी की ऐसी बातें सुनकर डीएम कुछ
असहज नजर आईं. वे अनायास ही मुंह पर
हाथ
रखकर पीछे की तरफ देखने लगीं

GLORY AND HISTORY OF RAMPUR BAWLI
04/09/2012

GLORY AND HISTORY OF RAMPUR BAWLI

रामपुरबावली उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला में स्थित एक पुरातन एवं एतिहासिक स्थान है।

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Rampur Bawli Pratapgarh
Bela Pratapgarh
230132

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9554146222

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