07/03/2025
हम स्मार्ट नही हो पाये. हम चाय से रोटी खाने वाले लोग हैं, चम्मच को हटा कर हाथ से दाल भात खाये बिना हमारी भूख नही मिटती। खाना खाकर कुरते से ही हाथ पोछने वाले लोग हैं, हमसे स्मार्ट नही बना जाएगा।
हवाई जहाज की आवाज सुन कर ऊपर देखने लगते हैं, काले बादलों को देख छत पर भीगने पहुँच जाते हैं । कोयल की कू पर जोर जोर से कूक लगाने वाले लोग हैं, हमसे स्मार्ट नही बना जाएगा। हम आइसक्रीम को चम्मच से नही खाते, टूथपेस्ट की अंतिम किश्त को प्लास से दबा कर निकाल लेते हैं। हम स्मार्ट नही बन पाएंगे। डीजे की धुन पर नाचते गाते आधे घण्टे की बारात के जमाने में हम खिचड़ी टिकने के दिनों को याद करते हैं, त्योहारों के आने पर मन की विकलता कई गुना बढ़ जाती है। होली के टीके लगाते और दीवाली पर चॉकलेट खाते हमें लगता है जैसे किसी ने सात तालों में बंद कर रखा हो।
धूप को खिलते देख, सुबह और साँझ के सूरज की लाली देख, पार्क में फूलों को देख, फुदकती चिड़ियों और भन्न भन्न करती तितलियों को देख हमें कैसा लगता है जब किसी से बताते हैं तो वह जाने क्यों हंस देता है। एफ एम के दौर में विविध भारती के पंचरंगी कार्यक्रम सुनने वाले हम लोग कभी स्मार्ट नही बन पाएंगे।
हमारी स्मार्टनेस मेहमान के जाने के बाद बची मिठाई पर निगाह जमाने में थी। हम केवल यस यस कहने कह पाते हैं, इससे आगे की अंग्रेजी बोलने में सोचना पड़ता है। हम बुफे सिस्टम में पंगत और कॉस्मेटिक्स की दुकान पर बिसारती को याद करते हैं। फ्लैट में रहने के बावजूद अपने दालान से कभी निकल नही पाए, हमारे गाँव का देसीपन हमें कभी शहर का वह सभ्य नागरिक नही बनने देता जो एप्रन पहने आम काट कर एक एक टुकड़े में कांटा लगाकर खता है।
हमसे स्मार्ट नही बना जाएगा, हम चतुर नही हो पाए, ठगे गए, पर भरोसा करना नही छोड़ा, हमने कभी यह नही सच समझा कि आँसू नकली भी होते हैं। हम किसी सही बात पर भी पिताजी के डाँटने पर बाद चुप रहने वाली पीढ़ी के लोग हैं। सभी रिश्ते नाते की समझ रखने वाले हम लोग यह नही जान पाए कि फादर्स डे पर पापा को बधाई कैसे दी जाती है, मदर्स डे पर माँ से नही कह पाए कि अम्मा तुम्हारे बिना कैसे जीते हैं, हम स्मार्ट नही बन पाए।
हम कि अपने गाँव को भूल नहीं पाते, जमाने के साथ दौड़ नहीं पाते, बिसलेरी की बोतल को छोड़ कुएं की जगत पर बैठ उसके सूख कर चटख गए तली को देखते हैं। उन दिनो को याद करते हैं जब कुए भरे थे, ताल लहराते थे, रातें जुगनुओ से जगमग थी,एक एक तारे गिने जाते थे, जब चंद्रमा से अमृत छलकता था जब बाबा कहानियां सुनाते थे।
हम वर्तमान के क्रूर विकास में अतीत की हरी और कोमल दूब हेरने वाले लोग स्मार्ट नहीं बन पाए।