12/10/2024
अशोक धम्मविजय दशमी एवं बाबा साहब डा. अम्बेडकर के धर्मान्तरण (धम्म दीक्षा) दिवस की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाए।
प्रिय महानुभावों-
आज अशोक धम्म विजय दिवस है, इसे ही धम्म विजयदशमी कहा जाता है।
सर्वविदित है कि कलिंग युद्ध के बाद महाराजा अशोक ने बुद्ध धम्म स्वीकार किया था।
धम्म दीक्षा के उपरांत उन्होंने संकल्प लिया था कि "अब मैं युद्ध से नहीं बल्कि शान्ति और अहिंसा से लोगों के हृदयों पर विजय प्राप्त करूंगा"।
महाराजा अशोक ने धर्म विजय के संकल्प को पूरा करने के लिए धर्म प्रचारकों को नियुक्ति कर बिभिन्न देशों में भेजा।
देखते ही देखते एशिया के समस्त भूभागों पर शांति और अहिंसा का संदेश छा गया।
महाराज अशोक के इस हृदय परिवर्तन को हिंसा पर अहिंसा का विजय कहा गया।
मानव सभ्यता के इतिहास में कहा जाता है कि अशोक जैसा युद्ध विजेता कोई नहीं हुआ और मानव सभ्यता के इतिहास में अशोक जैसा धम्म विजेता भी कोई नहीं हुआ।
संसार में बहुत से महान शासक पैदा हुए लेकिन अशोक जैसा शासक आज तक ना तो हुआ और ना कोई होगा।
महाराज अशोक भारतवर्ष के आदर्श और गौरव के प्रतीक है।
धम्म राजा अशोक का अनुशरण करते हुए बाबा साहब डा. अम्बेडकर ने इस देश में ब्राह्मणी वर्णव्यवस्था / जाति व्यवस्था द्वारा सदियों से सतायी तथा दबायी गयी जातियों के साथ धर्मान्तरण किया.
धम्म दीक्षा के बाद बाबा साहब ने कहा ऐसा लगता है कि आज मैं नरक से छुटकारा पा गया हूँ।
मैं ऐसा मानता हूँ कि यह मैरा पुनर्जन्म हो रहा है।
बाबा साहब का अनुसरण करते हुए वर्णव्यवस्था एवं जाति व्यवस्था के विरोधी निरंतर धर्मान्तरण कर रहे हैं।
दोनों महापुरुषों के अनुयायीओं द्वारा धर्मचक्र को निरंतर गतिशील कर अधर्म पर धर्म की विजय जारी है।
आज देश का कोई भी ग्राम, ग्राम सभा, ब्लॉक, तहसील, जिला, मण्डल या राज्य नहीं है जहाँ तथागत बुद्ध, धम्म राजा अशोक तथा बोधिसत्व बाबा साहब के अनुयायी न रहते हो।
पुनः यह महान देश बाबा साहब के सपनों का प्रबुद्ध भारत अर्थात अशोक का भारत बनने की ओर अग्रसर है।
आइए, तथागत बुद्ध, धम्म राजा अशोक तथा बोधिसत्व बाबा साहब के पवित्र पावन स्मृति को नमन करते हुए बुद्धमय भारत हेतु दृढ़ संकल्पित हो।
पूज्य भिक्खु चन्दिमा थेरों जी