27/06/2023
Ajanta gufa vlog l अजन्ता गुफा कि खोज, निर्माण, व किस धर्म से संबन्धित है? अजन्ता गुफा का सम्पूर्ण कला इतिहास क्या है? Ajanta gufa mandir kis rajya me hai ?
अजन्ता केव(गुफा )(200 ई. पू. से 650 ई.) प्राचीन भारत का एक ऐसा समय जो अपनी अद्भुत कला कौशल और जीवन्त भित्ति चित्रो के माध्यम से इतिहास के पन्नो दर्ज हो गया l जी हा हम बात कर रहे है अजन्ता गुफा कि जिसका निर्माण काल 200 ई. पू. से लेकर 7वी शताब्दी तक अनवरत रूप लगभग 850 वर्षो तक चलता रहा, वर्तमान मे अजन्ता गुफा महाराष्ट्र के aurangabad जिले मे पडती है, वर्तमान मे यहा से 30 गुफाये प्राप्त है l जो पहाडियो को काट कर बनाया गया है यह गुफा औरन्गाबाद जिले से लगभग 100कं और जलगाव स्टेशन से लगभग 55km कि दूरी पर स्थित है l यह सतपुडा कि पहाडियो को काट कर बनाई गयी है जो बघोरा नदी के किनारे स्थित है l इस गुफा का आकार अर्ध्दचन्द्राकार रूप मे है l
--हर्ष के दरबारी विद्वान बाणभट्ट ने अजन्ता गुफा के बारे मे अपनी पुस्तक मे जानकारी दी है
--398 ई. मे चीनी यात्री फह्ययान ने इस गुफा के कला के बारे मे वर्णित किया है
--travels in india नामक पुस्तक मे चीनी बौध्द यात्री युवाङ्ग् च्वाङ्ग् ने अजन्ता कि कला कि खूब प्रसंसा कि है l
अजन्ता नाम कैसे पडा?
इस गुफा के पास कुछ दूरी पर अजिष्ठा नामक ग्राम है जिसको आम तौर पर अजिस्ठा नाम से उच्चारित किया जाता रहा है वर्तमान मे इसी का हिन्दी रूप मे अजन्ता नाम से बुलाया जाता है l इस गुफा के नामकरण मे एक और मत मिलता है जिसमे--'यो मैत्रेय बुध्द 'अर्थात भविष्य मे अवतरित होने वाले बुध्द को 'आजित ' कहा गया है इन साक्ष्यो के के आधार पर हम महात्मा बुध्द से जुडी गुफाओ को अजन्ता नाम देना हमे ठीक जान पडता है l
अजन्ता गुफा का सम्बन्ध किस धर्म से है?
अजन्ता गुफा का संबन्ध बौध्द धर्म से है l अजन्ता मे गुफाओ कि संख्या 30 है l यहा पर महात्मा बुध्द से संबन्धित अनेक भित्ति चित्र बनाये गये है वर्तमान मे 30 गुफाओ मे से केवल 6 गुफाओ मे ही चित्र शेष बचे है l इस गुफा मे बुध्द के पुर्वजन्मो(जातक कथा )के दृश्य बनाये गये है l
अजन्ता गुफा कि खोज कब और कैसे हुई?
सन् 1819 ई. मे मद्रास सेना का एक सेवानिवृत्त अधिकारी के द्वारा हमे अजन्ता गुफा कि जानकारी हुई l
-- अजन्ता पर सबसे पहले एक कम्पनी के अधिकारी विलियम एरिकसन ने व्यौरा लिखा और उसे बाम्बे लिटरेरी सोसायटी मे पढा l
--1844 राबर्ट गिल ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कहने पर भारत आये और 1847 ई. मे अजन्ता कि प्रतिलिपिया तैयार किl और इन चित्रो को क्रिस्टल पैलेस लन्दन मे प्रदर्शित कि गयी l
--1872 ई. से 1876 ई. तक जे. जे. स्कूल आफ आर्ट के प्राचार्य के सानिध्य मे वहा के सैकडो बच्चो ने अनुकृतिया बनाई l
--1854 मे युनेस्को ने यहा के रङ्गीन चित्रो का एक संग्रह पेन्टिग आफ अजन्ता केव प्रकाशित किया l
अजन्ता गुफाओ का निर्माण और रचना समय --अजन्ता गुफाओ गुफाओ का निर्माण कई राजवंशो के समय मे हुआ है जैसे गुप्त, सातवाहन, चालुक्य, वकाटक आदि l अजन्ता गुफा का निर्माण काल दूसरी शताब्दी से सातवी शताब्दी तक चला l यहा पर 30 गुफाओ का निर्माण हुआ है जिसमे 5 चैत्य गुफाये व 25 विहार गुफाये है सबसे प्राचीन गुफा संख्या 9,10 है और सबसे नवीन गुफा संख्या 1,2 है l गुफा संख्या 13 कि दीवार पर मौर्य कालीन पलिश है l अजन्ता कि गुफाये बौध्द धर्म के हीनयान और महायान से संबन्धित है l
- फर्ग्युसन के विचार मे पहली गुफा सबसे बाद मे चित्रित कि गयी है
-- सबसे प्राचीन चित्र 9,10 गुफा के है l
अजन्ता गुफा के चित्र व उसके विषय क्या थे?
अजन्ता गुफा के चित्रो का विषय बौध्द ग्रन्थ, बुध्द के उपदेश और जातक कथाये रही है l अजन्ता के चित्रो का सृजन केद्र बौध्द धर्म रह है l
-वाचस्पति गैरोला कि पुस्तक 'भारतीय चित्रकला ' मे अजन्ता के चित्रो के विषय को तीन भागो मे विभाजित किया है
1- अलङ्कारिक
2- रूप भैदिक
3- जातक कथाये
अजन्ता भित्ति चित्रो कि रङ्ग योजना क्या थी?
यहा पर खनिज रङ्गो का प्रयोग हुआ है, यहा पर लाल, सफेद, भूरा और पीला रङ्गो का प्रयोग हुआ है l सफेद रङ्ग चूना या खडिया से, लाल व भुरा दोनो खनिज रङ्ग है, हरा एक स्थानीय पत्थर से बनाया गया l (लेपिस लजुली फारस से आयात किया जाता था वाकी सब रङ्ग यही के थे )
अजन्ता कि कितनी गुफाओ मे अब चित्र शेष है?
गुफा संख्या 1,2,9,10,16, व 17 मे चित्र शेष बचे हैl
गुफा संख्या 9 के चित्र ----- बौध्द भिक्षुओ कि उपासना हेतु बनाई गयी थी जो कि एक चैत्य गुहा है l इस गुहा के चित्र दूसरी शताब्दी ई. पू. से लेकर चौथी शताब्दी ई. तक निर्मित होते रहे l ये गुहा हीनयान और महायान दोनो से संबन्धित है l
-- इस गुफा मे एक पाषाण स्तूप भी है l
--इस गुफा मे 23 खम्भे है l
--इस गुफा का सबसे प्राचीन चित्र 'एक बैठी हुई स्त्री ' है l
-- स्तूप पूजा का सुन्दर चित्र भी है l
--नागपुरुष का चित्र
--पशुओ को कदेडते चरवाहे
गुफा संख्या 10 के चित्र
इसमे भी एक स्तूप है यह भी एक चैत्य गुहा है, बाहरी दिवार पर एक लेख खुदा हुआ है जो 200ई. पू. का है जिसके अनुसार यह अन्ध्र सातवाहन मे निर्मित कि गयी l
--छदन्त जातक
--एक जुलूस का चित्र - जिसमे राजा बोधिवृक्ष व स्तूप पूजा के लिये जाते हुए दिखाया गया है l
--साम जातक - श्रवण कुमार जैसी कहानी
गुफा संख्या 16 के चित्र
इस गुफा कि बायी दिवार पर लेख प्राप्त हुआ है जो वकाटक राजा हरिसेन के मन्त्री वराहदेव ने ने बनवाया था (निर्माण काल 475 ई. से 500 ई. )
--सप्त कुण्ड
--बुध्द मूर्ति (चैत्यमन्दिरम् )
--माया देवी का स्वप्न
--धर्मोपदेश
-- नन्द कि दीक्षा
--हस्ति जातक, महाउमङ्ग् जातक
-- नन्द कुमार का वैराग्य
--बुध्द उपदेश
--मरणासन्न राजकुमारी
-- अजातुशत्रु व बुध्द कि मिलन
-- वायी दिवार पर चार दृश्य - शव, वृध्द, सन्यासी व ज्वर पीडित
गुफा संख्या 17 के चित्र
वकाटक नरेश हरिसेन के मण्डलाधीश ने करवाया था l वर्गेस ने इस गुफा के 21 चित्रो का उल्लेख किया है l
-- हस्ति जातक, वेसन्तर जातक, मातृपोषक जातक, महाहन्स जातक,महाकपि जातक, मृग जातक
-- राहुल समर्पण (माता पुत्र )
--सिघलावदान कि कथा
-- उडती हुई गन्धर्व अप्सराये
गुफा संख्या 1 के चित्र
500 ई. से 625 ई. के बीच मे यह गुहा निर्मित हुई l
वकाटक व चालुक्य काल के चित्र इसमे प्राप्त होते है l
--शिवि जातक, महाजनक जातक, चाम्पेय जातक
--नन्द तथा सुन्दरी कि कथा
--नृत्य वादन
--अवलोतिकेश्वर बोधिसत्व
--नागराज सभा
--बोधिसत्व पद्मपाणि
--मार विजय
--श्रावस्ती का चमत्कार
--चालुक्य राजा पुलकेशियन द्वितीय के दरबार मे इरानी राजदूत
--बैलो कि लडाई, चीटियो के पहाड पर सर्प कि तपस्या,छतो पर कमल व हन्सो का अल्न्करण व प्रेमी युगल
गुफा संख्या 2 के चित्र
(500 ई. से 550 ई. तक )
-- महाहन्स जातक
-- बुध्द जन्म
--दो वाये अगूठे वाली रमणी
--माया देवी का स्वप्न
-- तुषित स्वर्ग
--सर्वनाश
--क्षान्तिवादी जातक, विदुर पण्डित जातक कथा, पुर्णक इरन्दति कि प्रेम कथा, सुन्हरे मृग का धर्मोपदेश, प्राणो कि भिक्षा, पुजर्थिनि स्त्रिया