11/06/2025
1. लालू प्रसाद यादव ने गाँवों के विकास के लिए विशेष ध्यान दिया, जिसके तहत उन्होंने बेरोजगार ग्रामीणों के लिए कई हज़ार पदों का सृजन किया. नए एवं पुराने रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाये. जिसके परिणामस्वरूप, 1993-94 तक लगभग 21 हज़ार डॉक्टर, 12,000 प्राथमिक स्कूल मास्टर, 36,000 होम गार्ड और 48,000 तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती की गयी. बेरोज़गारी भत्ते को भी 50 रुपये बढ़ाकर 100 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था.
2. रोज़गार की तरह ही मजदूरी सुरक्षा के क्षेत्र में भी लालू प्रसाद यादव ने बेहतर प्रगति हुई. बिहार में कृषि मजदूरों और गैर कृषि मजदूरों की मजदूरी प्रतिदिन क्रमशः 23 और 28 रुपये प्रति व्यक्ति करवा दी थी. जबकि उस समय राष्ट्रीय स्तर पर कृषि मजदूरों और गैर कृषि मजदूरों को क्रमशः 21 और 26 रुपये ही मिलते थे. बिहार का औसत राष्ट्रीय औसत से भी अधिक थी.
3. लालू प्रसाद यादव जी ने अदालतों में काफी समय से लंबित पड़े लगभग 38,997 मुकदमो को निबटवाकर लगभग 47,462 एकड़ भूमि 39,56,500 गरीब भूमिहीन( ज्यादातर अनुसूचित जातियों) में और 91,503 एकड़ भूमि अनुसूचित जनजातियों में बांटने का काम किये थे.
4. गावों में शिक्षा-प्रसार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गए थे. प्रत्तेक गरीब विद्यार्थी को मुफ्त किताबें, लेखन सामग्री और एक रुपया प्रतिदिन के हिसाब से दोपहर के भोजन का भत्ता दिया जाता था. इसका परिणाम यह हुआ की 14 वर्ष की कम आयु के 41.5 लाख विद्यार्थी प्राथमिक स्कूलों में भर्ती हो गए.
5. 1995-96 में गरीबों के लिए लगभग 2.03 लाख मकान बनवाएं गए. शहरों में उनके लिए रैन बसेरे बनाए गए. वृद्धों की पेंशन 30 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रतिमाह कर दी गयी थी.
6. 1991-92 में लगभग तीन लाख एकड़ भूमि की चकबंदी की गई. साथ ही सिंचाई-सुविधाओं में भी वृद्धि की गई. 1993-94 तक 1,006,000 हेक्टेयर भूमि नहरों से, 1,625,000 हेक्टेयर भूमि की ट्यूबवैलों से, 1,59,000 हेक्टेयर भूमि की टैंकों और 4,212,000 हेक्टेयर भूमि की कुओं द्वारा सिंचाई हुई थी. जिसके परिणामस्वरूप कृषि की स्थिति पहले से काफी बेहतर स्थिति में पहुँच गई. बिहार ने 1993-94 में अनाज की रिकॉर्ड पैदावार 175 लाख टन की. बिहार के लोगों ने इन वर्षों में सुखा अथवा अकाल का अनुभव नहीं किया था.
7. गरीब पासी समाज के लोग ताड़ी निकालकर अपनी जीविका चलाते थे. ताड़ी निकालने पर उन्हें उन्हें वृक्ष-कर और उसे तैयार करने और बेचने पर कर देना पड़ता था. लालू प्रसाद ने ताड़ी पर दोनों करों को समाप्त कर दिया. इस कदम से लाखों अनुसूचित और गरीब परिवार के लोगों को लाभ मिला.
8. 27 प्रतिशत आरक्षण मिलने के बावजूद भी नौकरियाँ प्राप्त करने में अन्य पिछड़ों वर्ग को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता था. योग्य होने पर भी निहित स्वार्थ उन्हें किसी न किसी तरह नौकरियों से दूर खड़ा कर देते थे. लालू प्रसाद ने इसे गंभीरता से लेते हुए यह क़ानून पास करवाया की जो अधिकारी उनकी सरकार के आरक्षण कार्यक्रम से खिलवाड़ करेंगे उन्हें अपराध का दोषी ठहराया जाएगा.
9. लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के शासनकाल में 1996 में विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा राज्य के 11 विश्वविद्यालयों में 1300 अध्यापक बहाल किए गए और 2003 में राबड़ी देवी ने 1050 अध्यापकों की नियुक्ति की.
10. लालू प्रसाद व राबड़ी देवी के द्वारा बिहार में तीन बार स्कूली शिक्षकों की नियुक्ति बीपीएससी के माध्यम से की गई जिसे अब तक का बिहार में सबसे बेहतरीन और निष्पक्ष शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया माना जाता है.
11. 1991-2001 के बीच जहां भारत की साक्षरता दर में वृद्धि 23 फीसदी थी, वहां लालू के नेतृत्व में बिहार 27 फीसदी की दर से अपनी साक्षरता को बढ़ा रहा था.
12. जहां लालू यादव के कार्यकाल में किसानों को प्रति बीघा मालगुजारी 3-5 रुपये देने होते थे, वहीं आज 300-500 रुपये देने पड़ते हैं. लालू प्रसाद जी ने हर समुदाय की आवश्कताओं को ध्यान में रखा और उनके लिए जमीनी स्तर पर काम किया.
13. जब विश्वविद्यालयों का शिक्षा बजट केरल में 21 करोड़ और यूपी में 68 करोड़ का होता था, तो लालू प्रसाद ने बिहार में उसे 105 करोड़ से बढ़ाकर 156 करोड़ कर दिया था.
14. युवा वर्ग के लिए उन्होंने 6 और राबड़ी देवी ने एक विश्वविद्यालय की स्थापना की. लालू प्रसाद ने 15 जिले, एक पुलिस जिला और राबड़ी देवी ने एक जिला बनाया.
15. राजनितिक परिणामों की परिवाह न करते हुए, लालू प्रसाद जी ने अक्टूबर 1990 में “दिग्विजय यात्रा” पर निकले भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवानी तक को नहीं बख्शा.
16. दिसम्बर 1992 में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के बाद भी, जब देश में करीब-करीब सभी स्थानों पर सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे, बिहार में पूर्ण रूप से शांति रही थी. न यहाँ सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ और न दंगे हुए, न मस्जिदों अथवा मंदिरों को ध्वस्त किया गया था.
17. न्यायपालिका में, यहाँ तक की जिलास्तर पर भी, पिछड़ों का प्रतिनिधितव नहीं था. लालू प्रसाद जी ने उनके लिए जिला जज के 29 प्रतिशत पद आरक्षित करवाए और उन्हें विधिवत भर दिया.
18. छपरा में 872 करोड़ की लागत से रेल पहिया कारखाना बनवाया.
19. 2025 करोड़ की लागत से सारण में मढ़ौरा में इंजन का कारखना खोलवाया
20. मधेपुरा में 1300 करोड़ की लागत से विद्युत रेल इंजन कारखना लगवाया.
21. 90 करोड़ की लागत से सोनेपुर में माल वैगन मरम्मत वर्कशॉप और 15 करोड़ की लागत से इएमयू डिपो लगवाया.
22. समस्तीपुर में 33 करोड़ की लागत से वैगन रिपेयर वर्कशॉप लगवाया.
23. 15 करोड़ की लागत से मधेपुरा, सीतामढ़ी और चक्सिकंदर में कंक्रीटस्लीपर फैक्ट्री लगवाया.
24. सारण के गरखा में 40 करोड़ की लागत से वैगन पुननिर्माण वर्कशॉप लगवाया.
25. 5500 करोड़ की लागत से 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन परियोजना लगवाया.
26. 1240 करोड़ की लागत से नई रेल लाइन निर्माण अमान परिवर्तन दोहरीकरण सह विधुतीकरण करवाया.
27. देश के पहले रेलमंत्री जिन्होंने लगातार हर बजट में रेल यात्री किराया कम किया.
28. कुली भाई को स्थाई रेल नौकरी दिया.
29. गरीब-रथ पूर्णत वातानुकूलित ac रेलगाड़ी चलवाया ताकि गरीब-गुरबा भी ac में सफ़र कर सकें.
30. जब बिहार में कोसी बाँध टुटा था तो बिहार को 900 करोड़ रुपये बाढ़ पीड़ितों के लिए बिहार सरकार को दिया.
31. साक्षात्कार के लिए जाने वाले युवाओं को रेल किराया मुफ्त किया.
32. इन्टरनेट से रेल टिकट बुकिंग की शुरुआत करवाया.
33. पटना में सबसे बड़े रेलवे अस्पताल का निर्माण जो पटना रेलवे स्टेशन के बगल में है.
34. रेल बजट के अंतर्गत पटना से छपरा तक गंगा नदी पर रेलवे व् सड़क पुल बनवाने का कार्य किया, जो पुल अब चालू है.
35. गरीब कुम्हार भाइयों को रोज़गार देने हेतु रेलवे में कुल्हड़ का उपयोग अनिवार्य किया.
36. गरीबों और अक्लीतियों के गाँव में लोकल गाड़ियों को रुकने के निर्देश दिए.
37. समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर वालों को राजधानी ट्रेन की सुविधा और पटना राजधानी प्रतिदिन करवाया.
38. लालू प्रसाद यादव ही देश के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो कि सामजिक न्याय के सिद्धांत के तहत गरीब, मजदूर, अल्पसंख्यको, किसान, पिछड़ों और दलितों के सच्चे हितैषी हैं.
39. अपने पहले कार्यकाल में सबसे ज्यादा प्राथमिक विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, प्रखंड, अनुमंडल, जिला व् विश्वविद्यालय खोलें.
40. जैसे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था करो या मरो, वैसे ही लालू प्रसाद कहा करते थे, ‘ पढो या मरो’
41. वे आह्वान करते थे, ‘ जन्म दिया तो शिक्षा दो’ चरवाहा विद्यालय एक सर्वथा अनूठा प्रयोग था, जिसकी मूल भावना थी- ‘ गैया-बकरी चरती जाय, मुनिया बेटी पढ़ती जाय’
42. युवा वर्ग के लिए उन्होंने 6 और राबड़ी देवी ने एक विश्वविद्यालय की स्थापना की.
43. लालू प्रसाद जी ने कुल नए 15 जिला बनाया, और राबड़ी देवी जी ने एक जिला बनवाया.
44. आज स्वच्छता अभियान को जोर-शोर से मीडिया में प्रचारित किया जाता है. पर गाँधी के बाद सही मायने में अगर किसी सोशलिस्ट लीडर ने हर समाज के लोगों की साफ़-सफाई को गंभीरता से अपना राजनैतिक व् सामाजिक कार्य बनाया, तो वे हैं लालू प्रसाद. डोम-मुसहर तबके के बच्चों को नहलाना, नाख़ून कटवाना, स्कूल जाने पर एक रुपये देने की योजना चलाई.
45. जिनके तन पर वस्त्र नहीं था, उनके लिए साड़ी व् धोती योजना चलाई. ये अन्त्योदय हेतु जरुरी कदम थे.
46. 1991-2000 के बीच जहाँ भारत की साक्षरता दर में वृद्धि 23 फीसदी थी. तो वहीं बिहार की साक्षरता दर 27 फीसदी थी.
47. लालू प्रसाद जी ने अपने कार्यकाल में निर्बलों एवं बुजुर्गों के लिए सामजिक सुरक्षा पेंशन 30 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति महीना एवं बेरोज़गारी भत्ता 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये किया.
48. पहले तीन साल के कार्यकाल में लालू प्रसाद ने भूमिहीनों औए बेघरों को 16253 गृहस्थल बांटा.
49. एक लाख हस्तकरघा बुनकरों को समूह बीमा के तहत लाने में वे सफल रहे और 50 हज़ार बुनकरों का बीमा हुआ.
50. “Devlopment for All Model” को अपनाया, सुदूर गावों के बहुतेरे गावों में पहली बार बिजली पहुंचाया.